आवारा कुत्तों ने पशु बचाव केंद्र में 15 हिरणों को मार डाला, अधिकारियों ने मामला दबाया?
Chhattisgarh animal rescue centre dogs attacked: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक पशु बचाव केंद्र के बाड़े में आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में 15 हिरण की मौत हो गई. बताया गया कि पार्क प्रबंधन बाड़े का दरवाजा बंद करना भूल गए थे, जिसके चलते जंगल से 4-5 कुत्ते अंदर घुस आए और वन्यजीवों पर हमला कर दिया.

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक पशु बचाव केंद्र के बाड़े में आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में 15 हिरणों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए. ये घटना 21 मार्च और 22 मार्च की मध्य रात्रि में हुई. बताया गया कि पार्क प्रबंधन के लोग बाड़े का दरवाजा बंद करना भूल गए थे, जिसके चलते जंगल से 4-5 कुत्ते अंदर घुस आए और वन्यजीवों पर हमला कर दिया. आरोप है कि वन विभाग ने इस मामले को छुपाने की भी कोशिश की थी.
ये घटना छत्तीसगढ़ स्थित अंबिकापुर के संजय वन वाटिका में हुई, जो एक एनिमल रेस्क्यू सेंटर है. पशु बचाव केंद्र यानी जहां घायल जानवरों को लाया जाता है और ठीक होने पर उन्हें वापस जंगल में छोड़ दिया जाता है.
इंडिया टुडे से जुड़े सुमित सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, बाड़े में हमले के समय बड़ी संख्या में हिरण, कोटरी और बारहसिंगा थे. लेकिन एक चूक ने 15 हिरणों की जान ले ली. आरोप है कि इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश भी की गई. कथित तौर पर संजय पार्क प्रबंधन और वन विभाग के अधिकारियों ने मिलकर मृत वन्यजीवों के शवों को पर पार्क के पीछे जंगल में ले जाकर जला दिया. ताकि किसी को घटना की भनक ना लगे.
मौके से जली हुई चिता के अवशेष भी मिले हैं. जिस स्थान पर शव जलाए गए, वहां से खून से सना एक धारदार हथियार भी मिला है. कुछ शवों को ग्रीन पर्दा लगाकर जंगल में दफनाने की भी कोशिश की गई. इन सब बातों ने कई सवालों को जन्म दे दिया है.
डिवीजन फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) अभिषेक जोगावत ने बताया,
“ये घटना रात करीब 3 बजे घटी. यहां जंगल से कुछ आवारा कुत्ते आ गए थे, जो हिरण के बाड़े में घुस गए. और उन्होंने हिरणों के ऊपर अटैक कर दिया. 14 हिरणों की मौत हो गई थी. लेकिन एक की हालात गंभीर थी. उसे ऑब्जर्वेशन में लाया गया था. लेकिन सुबह उसकी भी मौत हो गई.”
उन्होंने बताया कि एक वन्य जीव डॉक्टर की उपस्थिति में हिरण का पोस्टमार्टम कराया गया था. फिर उसे जलाने की कार्रवाई की गई. जहां शवों को जलाया गया वहां से एक धार-धार हथियार मिलने पर पत्रकार ने DFO से सवाल पूछा. इस पर उन्होंने कहा कि हथियार पोस्टमॉर्टम का इक्विपमेंट है, जो मौके पर छूट गया था. अभिषेक जोगावत ने कहा कि एक जांच समिति का गठन किया गया है. जिसकी भी गलती पाई जाएगी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग ने कथित लापरवाही के आरोप में चार कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है. इसमें एक डिप्टी रेंजर और तीन फॉरेस्ट गार्ड हैं. घटना के बाद संजय पार्क को आम लोगों के लिए तीन दिनों के लिए बंद कर दिया गया है. अंबिकापुर के वन रेंजर अक्षपालक ऋषि को भी नोटिस जारी किया गया है. उन्हें पांच दिनों के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया है. ऐसा न करने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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