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"रिसेप्शन की तस्वीर में खुश दिख रही थी पीड़िता", ये तस्वीर देख कोर्ट ने रेप आरोपी को बरी कर दिया

Chandigarh के एक District Court के जज ने Reception की तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि" युवती बहुत खुश दिख रही है. और उसका घर आरोपी के घर से मात्र 5-6 मकान की दूरी पर था, इसलिए यदि वह अपनी मर्जी के खिलाफ वहां गई होती तो आसानी से अपने घर लौट सकती थी."

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chandigarh district court rape kidnapping victim
चंडीगढ़ की जिला अदालत ने आरोपी को रेप और किडनैपिंग के मामले में रिहा कर दिया. (फेसबुक)
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आनंद कुमार
9 दिसंबर 2025 (पब्लिश्ड: 02:59 PM IST)
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चंडीगढ़ (Chandigarh) की एक जिला अदालत ने किडनैपिंग और रेप (Kidnapping and Rape) के एक आरोपी को बरी कर दिया. कोर्ट ने ये फैसला शादी के रिसेप्शन की तस्वीरों को देखने के बाद लिया, जिसमें लड़की बहुत खुश दिखाई दे रही थी. साथ ही अभियोजन पक्ष लड़की को नाबालिग साबित करने में भी नाकाम रहा. यह फैसला एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज डॉ. याशिका की कोर्ट ने सुनाया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 मई 2023 को युवती के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उनकी शिकायत के मुताबिक 12 मई को उनकी 15 साल की बेटी बिन बताए घर से निकल गई और आरोपी उसे विवाह का झांसा देकर भगा ले गया. पुलिस ने मामले में FIR दर्ज की और इसके बाद लड़की की हड्डियों की जांच (ऑसिफिकेशन टेस्ट) कराया. इस टेस्ट में लड़की की उम्र 15-16 साल और दांतों की उम्र 14 से 16 साल पाई गई.

इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ  IPC की धारा 363 (अपहरण), 376 (2) (n) (बार बार बलात्कार) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत चार्जशीट दायर किया. आरोपी ने इन आरोपों का स्वीकार नहीं किया. मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है. उन्होंने कहा कि लड़की और उसके पिता के बयान अलग-अलग अधिकारियों के सामने एक दूसरे से मेल नहीं खाते और इसलिए भरोसे लायक नहीं हैं.

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

चंडीगढ़ की जिला अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मेडिकल जांच में अनुमान लगाए जाने वाली उम्र मो दो वर्ष की त्रुटि-सीमा लागू करने पर युवती की उम्र उसकी मेडिकल टेस्ट के समय 18 साल से अधिक बैठती है. इसलिए 12 मई 2023 को घटना की तिथि मानने पर भी युवती की आयु 18 साल से ज्यादा मानी जा सकती है. अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष कोई भी दस्तावेज जैसे स्कूल रिकॉर्ड या नगर निगम का जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाया जिससे साबित हो सके कि घटना के समय युवती नाबालिग थी.

तस्वीर पर कोर्ट की टिप्पणी 

एडिशनल जज ने रिसेप्शन की तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि युवती बहुत खुश दिख रही है. और उसका घर आरोपी के घर से मात्र 5-6 मकान की दूरी पर था, इसलिए यदि वह अपनी मर्जी के खिलाफ वहां गई होती तो आसानी से अपने घर लौट सकती थी. अदालत ने आगे कहा कि यदि युवती के साथ जबरन यौन संबंध बनाए गए होते तो वह शोर मचा सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. इससे यह साफ होता है कि यदि कोई संबंध बने भी हों तो वे उसकी सहमति से बने.

बयानों में विरोधाभास 

जिला अदालत ने माना कि युवती और उसके पिता के बयान अलग-अलग मंचों पर एक दूसरे से मेल नहीं खाते, जिससे अभियोजन पक्ष की कहानी पर संदेह पैदा होता है. अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि पीड़िता और उसके पिता ने कहानी को तोड़ मरोड़कर पेश किया है. एडिशनल जज डॉ. याशिका ने कहा कि पीड़िता के आचरण से यही नतीजा निकाला जा सकता है कि वह खुद आरोपी के साथ गई ती और आरोपी ने उसे कभी भी अवैध संबंध के लिए मजबूर करने के इरादे से उसका अपहरण नहीं किया था.

वीडियो: इलाहाबाद हाई कोर्ट के रेप केस में किस फैसले से नाराज़ हुआ सुप्रीम कोर्ट?

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