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जनगणना के लिए गृह मंत्रालय ने मांगे 14,619 करोड़ रुपये, पहली बार होगी 'डिजिटल जनगणना'

National Census 2027: यह पहली ‘डिजिटल जनगणना’ होगी, जिसमें जातिगत आंकड़े भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से इकट्टा किए जाएंगे. गृह मंत्रालय ने जनगणना के लिए 14,618 करोड़ रुपये का बजट मांगा है.

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1 सितंबर 2025 (पब्लिश्ड: 12:31 PM IST)
Census 2027 budget of Rs 14,619 crore
जनगणना के लिए 35 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता तैनात किए जाएंगे (सांकेतिक फोटो: आजतक)
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2027 की जनगणना के लिए 14,618 करोड़ रुपये का बजट मांगा है. यह पहली ‘डिजिटल जनगणना’ होगी, जिसमें जातिगत आंकड़े भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से इकट्टा किए जाएंगे. मांगी गई राशि जनगणना के दोनों चरणों के लिए है. पहला चरण हाउसलिस्टिंग का है, जो अप्रैल से सितंबर 2026 तक पूरा चलेगा और दूसरा चरण जनसंख्या गणना का है. जो पूरे देश में फरवरी 2027 से शुरू होने वाला है.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा कि इस महीने की शुरुआत में, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत आने वाले भारत के महापंजीयक (RGI) ने व्यय वित्त समिति (EFC) की मंजूरी के लिए एक नोट जारी किया था. बताते चलें कि EFC, वित्त मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय निकाय है जो सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं का मूल्यांकन करता है. EFC से मंजूरी मिलने के बाद, गृह मंत्रालय केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए एक प्रस्ताव पेश करेगा.

35 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता करेंगे गणना

30 अप्रैल को राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCPA) ने जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, जनगणना के लिए 35 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता और सुपरवाइजर तैनात किए जाएंगे. जो 2011 में जनगणना के लिए तैनात किए गए कर्मचारियों की संख्या (27 लाख) से 30% ज्यादा है. 

सरकार के एलान के मुताबिक, जनगणना दो चरणों में होगी. पहले चरण में कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों समेत देश के पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में जनगणना कराई जाएगी. यह 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी. वहीं देश के बाकी हिस्सों में यह 1 मार्च 2027 से शुरू होगी.

छह साल की देरी से हो रही है जनगणना

केंद्र ने 16 जून को 2027 की जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था. यह पहली बार है जब दशकीय जनगणना में छह साल की देरी हुई है. 2021 की जनगणना भी दो चरणों में कराने की योजना थी. अप्रैल से सितंबर 2020 तक हाउसलिस्टिंग अभियान और फरवरी, 2021 तक जनसंख्या गणना. लेकिन कोविड-19 महामारी की वजह से इसे नहीं कराया जा सका. बताते चलें कि हाउसलिस्टिंग के दौरान, मकान की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और परिवारों के पास मौजूद संपत्तियों का विवरण इकट्ठा किया जाता है.

ये भी पढ़ें: जातियों की गिनती के साथ दो चरणों में होगी जनगणना, तारीखें पता चल गईं

देश की आबादी 1.41 अरब होने का अनुमान 

दशकीय जनसंख्या जनगणना 1872 से लगातार चली आ रही है. 2027 की जनगणना कुल मिलाकर 16वीं दशकीय जनगणना होगी और आजादी के बाद आठवीं होगी. इस प्रक्रिया के दौरान, गांव, कस्बे और वार्ड स्तर की जनसंख्या के आंकड़े इकट्ठा किए जाते हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक, 1 मार्च 2011 तक देश की जनसंख्या 1.21 अरब थी. इस साल इसके बढ़कर 1.41 अरब होने का अनुमान है.

वीडियो: जातिगत जनगणना का एलान होने से पहले BJP नेताओं ने क्या-क्या कहा था?

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