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सेना में भ्रष्टाचार का खुलासा, CBI ने 50 लाख की रिश्वत लेने के आरोप में कर्नल को अरेस्ट किया

Army Colonel Arrested: CBI ने बताया कि उसने रिश्वत मांगने के आरोप में कर्नल हिमांशु बाली को गिरफ्तार किया है. वे कोलकाता के फोर्ट विलियम में ईस्टर्न कमांड की आर्मी ऑर्डनेंस कोर में तैनात हैं. उन पर घूस के जरिए नाजायज तरीके से टेंडर में हेरफेर कर एक प्राइवेट फर्म को आर्मी का टेंडर दिलाने का आरोप है.

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मौ. जिशान
| अरविंद ओझा
20 मई 2026 (पब्लिश्ड: 08:43 AM IST)
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CBI ने कोलकाता में तैनात आरोपी कर्नल को गिरफ्तार किया. (सांकेतिक तस्वीर: ITG)
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घटिया सैंपल, बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए बिलों को पास करना और 50 लाख रुपये की रिश्वत से आर्मी में टेंडर पास कराना. ये आरोप भारतीय सेना में कर्नल रैंक के एक अधिकारी पर लगे हैं. मंगलवार, 19 मई को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बताया कि उसने रिश्वत मांगने के आरोप में कर्नल हिमांशु बाली को गिरफ्तार किया है. वे कोलकाता के फोर्ट विलियम में ईस्टर्न कमांड की आर्मी ऑर्डनेंस कोर में तैनात हैं. उन पर घूस के जरिए नाजायज तरीके से टेंडर में हेरफेर कर एक प्राइवेट फर्म को आर्मी का टेंडर दिलाने का आरोप है.

मामले में कानपुर के प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर अक्षत अग्रवाल और उसके पिता मयंक अग्रवाल भी आरोपी हैं. अक्षत कानपुर में मेसर्स ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड चलाता है, जो देश भर में इंडियन आर्मी को अलग-अलग सामान सप्लाई करती है. CBI के मुताबिक, कर्नल हिमांशु बाली ने कथित तौर पर 50 लाख रुपये रिश्वत की बात तय करके अक्षत को आर्मी का एक टेंडर दिलाया.

इंडिया टुडे से जुड़े सीनियर रिपोर्टर अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने कर्नल हिमांशु बाली, अक्षत अग्रवाल, अक्षत के पिता मयंक अग्रवाल, अक्षत के सहयोगी आशुतोष शुक्ला, नरेश पाल(जिसे कर्नल हिमांशु बाली ने 50 लाख रुपये रिश्वत वसूलने भेजा) और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) सुनील कुमार (CBI, AC-II) इस केस की जांच कर रहे हैं.

CBI ने FIR में लिखा कि भरोसेमंद सोर्स से मिली जानकारी से पता चला है कि कोलकाता के फोर्ट विलियम में आर्मी ऑर्डनेंस कोर कॉर्प्स में तैनात कर्नल हिमांशु बाली ने अक्षत अग्रवाल और अन्य लोगों के साथ मिलकर अक्षत की फर्म को नाजायज फायदा पहुंचाने के लिए गैर-कानूनी रिश्वत की मांग और मंजूरी से जुड़े भ्रष्ट काम कर रहे हैं.

कोलकाता में हुई डील

FIR के मुताबिक, इस साल 22 अप्रैल को अक्षत अग्रवाल कोलकाता के पार्क स्ट्रीट में कर्नल हिमांशु बाली से पर्सनली मिला. दोनों के बीच कथित तौर पर रिश्वत के बदले टेंडर पास कराने को लेकर बातचीत हुई. दो दिन बाद 24 अप्रैल को अक्षत अग्रवाल की मेसर्स ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड को सफलतापूर्वक टेंडर मिल गया.

CBI को सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली कि 16 मई को कर्नल हिमांशु बाली ने अक्षत अग्रवाल से कॉन्टैक्ट किया और उसे पहले से तय वादे के मुताबिक रिश्वत की रकम के बारे में याद दिलाया. कर्नल ने कथित तौर पर पैसा दिल्ली-NCR इलाके में देने के लिए कहा. जवाब में अक्षत अग्रवाल ने माफी मांगी और बताया कि बड़ी रकम होने की वजह से उन्हें कैश की दिक्कत हो रही है.

उसी दिन कर्नल हिमांशु बाली ने कथित तौर पर दिल्ली में रहने वाले अक्षत अग्रवाल के ड्राइवर और साथी आशुतोष शुक्ला से कॉन्टैक्ट किया. कर्नल ने कथित तौर पर आशुतोष से कहा कि रिश्वत की रकम नरेश पाल तक बिना किसी चूक के पहुंच जाए.

हवाला से भेजने वाले थे 50 लाख

सूत्र ने CBI को आगे बताया कि 18 मई को अक्षत अग्रवाल दिल्ली में नरेश पाल को लगभग 50 लाख रुपये देने का इंतजाम कर रहा था. ये पैसा कर्नल हिमांशु बाली को देने वाली रिश्वत की बाकी रकम थी. आशुतोष शुक्ला हवाला के जरिए दिल्ली के चांदनी चौक से यह रकम लेकर किसी भी समय नरेश पाल को देने वाला था.

साजिश में शामिल अन्य लोगों की तलाश

CBI ने समय रहते कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया. एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे. मामला खुलने पर CBI ने आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 (2018 में संशोधन) के सेक्शन 7, 8, 9 और 10 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के सेक्शन 61(2) (आपराधिक साजिश रचने) के तहत FIR दर्ज की है.

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