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"सिर्फ़ वोट की चिंता, वोटर की नहीं"; गांवों में मेडिकल सुविधाओं की कमी, ममता सरकार को कोर्ट की फटकार

Calcutta High Court Slams West Bengal Govt: कोर्ट ने कहा- '1976 से 10 बिस्तरों वाले अस्पताल की क्षमता में बढ़ोतरी नहीं हुई है. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव इसे जस्टिफ़ाई कर रहे हैं. ये स्वीकार्य नहीं है.'

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19 फ़रवरी 2025 (पब्लिश्ड: 03:15 PM IST)
Calcutta High Court news
1976 में हॉस्पिटल में दस बिस्तर थे, उसके बाद से बिस्तरों की संख्या नहीं बढ़ाई गई. (फ़ाइल फ़ोटो - इंडिया टुडे)
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कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई है. ये फटकार सरकार को राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों की ख़राब हालत को लेकर लगी है. कोर्ट ने अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाने वाली मेडिकल सुविधाओं की कमी पर कड़ी आपत्ति जताई. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि सरकार को सिर्फ़ वोटों की चिंता है, वोटर्स की नहीं.

मामला क्या है?

दक्षिण 24 परगना ज़िले का मथुरापुर शहर. यहीं के एक अस्पताल से मामला जुड़ा है. आरोप है कि यहां के एक अस्पताल में 1976 में 10 बिस्तर थे. इसके बाद से यहां बिस्तरों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है. मामले की सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस टी.एस. शिवगणनम और जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) की दो जजों की बेंच कर रही थी. इसी सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा,

1976 से 10 बिस्तरों वाले अस्पताल की क्षमता में बढ़ोतरी नहीं हुई है. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव इसे जस्टिफ़ाई कर रहे हैं. ये अस्वीकार्य है. जब तक आपको घसीटा नहीं जाएगा, आप कुछ नहीं करेंगे. आपको नागरिकों की चिंता नहीं है. आपका मानना है- ‘उन्हें मरने दो’. 1976 में 10 बिस्तरों वाला अस्पताल था. 2025 में प्रधान सचिव कह रहे हैं कि वही 10 बिस्तरों वाला अस्पताल पर्याप्त है. कोई मूर्ख इस पर विश्वास नहीं करेगा.

लाइव लॉ की ख़बर के मुताबिक़, सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस टी.एस. शिवगणनम ने आगे कहा,

आप 48 घंटों में चमत्कार कर सकते हैं. शहर को बदला जा सकता है. आप क्रिसमस और नए साल पर पार्क स्ट्रीट पर रोशनी देखकर बहुत प्राउड फील करते हैं. लोग पीड़ित हैं और यहां एक स्टैंड है कि 1976 का 10 बिस्तरों वाला अस्पताल पर्याप्त है. उन्हें विवेक के साथ काम करना चाहिए. सिर्फ़ वोटों की चिंता है, वोटर्स की नहीं.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आगे कहा कि “जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं होगी, तब तक नौकरशाह कुछ भी नहीं कर सकते.” कोर्ट ने भर्ती की पॉलिसी में बदलाव करने की ज़रूरत है. लोगों ने अगर सरकार को सत्ता में बिठाया है, तो ये सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वो जनता को भी कुछ लौटाए.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, राज्य स्वास्थ्य विभाग की तरफ़ से पक्ष रख रहे वकील ने कहा कि कोर्ट के निर्देश पर बिस्तरों की संख्या बढ़ाई जाएगी. अस्पताल को 25 बिस्तरों वाला किया जाएगा. इस पर कोर्ट का कहना था, ‘ये हमारे लिए बहुत शर्मनाक है. व्हीलचेयर उपलब्ध कराने के लिए भी हमें निर्देश जारी करने पड़ते हैं.’

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