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रेप केस में प्रोफेसर को हुई थी 20 साल की सजा, HC ने रद्द कर 10 लाख का मुआवजा दिलवाया

Calcutta HC quashes rape conviction professor: सेरामपुर की एक अदालत ने एक प्रोफेसर को एक नाबालिग लड़की के साथ रेप करने के मामले में दोषी ठहराया था. अब इस केस पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए निचली अदालत का फैसला पलट दिया और प्रोफेसर की 20 साल की सजा को भी रद्द कर दिया.

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27 मई 2026 (पब्लिश्ड: 11:37 PM IST)
Calcutta HC quashes rape conviction professor
कलकत्ता हाई कोर्ट ने रेप के आरोपी के केस में कई खामियां पाई. और प्रोफेसर की सजा रद्द कर दी. (फोटो-इंडिया टुडे)
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने 22 मई को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे श्रीरामपुर कॉलेज के एक प्रोफेसर को 10 लाख रुपये का मुआवजा दे. प्रोफेसर को एक नाबालिग लड़की से रेप करने का दोषी करार देते हुए 20 साल की सजा सुनाई गई थी. ये फैसला सेरामपुर की एक अदालत ने सुनाया था. मगर जब मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो बेंच ने इसमें कई खामियां पाईं और प्रोफेसर की 20 साल की सजा रद्द कर दी.

जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस अपूर्बा सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर (PP) जॉयदीप मुखर्जी और जांच अधिकारी SI निवेदिता कोली की 'खामियों' के कारण प्रोफेसर को चार साल जेल में बिताने पड़े. ऐसे में 10 लाख रुपये का मुआवजा इन दो अधिकारियों से वसूला जा सकता है.

रेप केस में दोषी प्रोफेसर की सजा रद्द

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला 23 मार्च 2022 का है. एक महिला ने सेरामपुर महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. FIR में उसने आरोप लगाया कि उसके पिता ने मुंबई से उसकी बहन को प्रोफेसर के साथ रहने के लिए भेजा था. जब बहन यहां आई, तो प्रोफेसर ने कई बार उसके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया. महिला ने शख्स पर नाबालिग को बंधक बनाने, उसके साथ रेप करने और उसे गोलियां खिलाने के भी आरोप लगाए गए थे.

SI (सब-इंस्पेक्टर) मामले में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर थीं. जब मामला सेरामपुर की एक कोर्ट में पहुंचा, तो प्रोफेसर ने कई बार मांग की कि स्पेशल PP जॉयदीप मुखर्जी को बदल दिया जाए. क्योंकि मुखर्जी 498A के एक मामले में प्रोफेसर की पत्नी के वकील भी थे. मगर अदालत ने पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रोफेसर को रेप करने और नाबालिग के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न करने का दोषी ठहराया.

प्रोफेसर ने फिर हाई कोर्ट का रुख किया. मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने आरोपों में कई कमियां पाईं. मसलन,

- जांच अधिकारी SI निवेदिता ने गवाह के तौर पर सिर्फ आरोपी की पत्नी और बेटे के बयान लिए. प्रोफेसर के पड़ोसियों, सोसाइटी के गेट पर रखे रजिस्टर और अन्य लोगों के बयान नहीं लिए गए. उनकी पत्नी ने 498A का एक केस पहले से ही दायर कर रखा था, जिसमें उनके वकील जॉयदीप थे. और जब प्रोफेसर पर रेप का आरोप लगा, तो सेरामपुर की अदालत में जॉयदीप ही स्पेशल PP थे.   

- वेजाइनल स्वैब को फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया.

- मेडिकल रिपोर्ट में रेप से जुड़ी चोटों के कोई निशान नहीं मिले.

- आरोपी की मौजूदगी के बिना उसके घर से चीजें जब्त की गईं.

HC ने फैसला सुनाते हुए कहा,

“क्योंकि पीड़िता का बयान विसंगतियों से भरा हुआ है. और उसे समर्थन देने वाला एकमात्र सबूत आरोपी की अलग रह रही पत्नी और बेटे से मिला है. इसलिए इस केस के बुनियादी तथ्य ही बेहद कमजोर हैं. ”

कोर्ट ने ये भी कहा कि अपीलकर्ता एक प्रोफेसर है. और मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी इज्जत और करियर को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई अब कभी नहीं हो सकती.

अदालत ने बार काउंसिल के चेयरमैन को निर्देश दिया कि वे जॉयदीप मुखर्जी के खिलाफ डिसीप्लिनरी एक्शन लें. और प्रॉसिक्यूशन निदेशालय के डायरेक्टर को सूचित करें. SI निवेदिता को लेकर बेंच ने पश्चिम बंगाल के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को निर्देश दिया कि वे उनके खिलाफ ‘जांच के बुनियादी नियमों की पूरी तरह से अनदेखी’ करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करें.

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