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'हमारी बेटियों ने वर्ल्ड कप जीता, लेकिन बराबरी अभी दूर,' हाई कोर्ट को ऐसा क्यों बोलना पड़ा?

Calcutta High Court ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें महिला और उसकी डेढ़ साल की बेटी की मौत के मामले में ससुराल वालों को बरी कर दिया गया था.

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Calcutta High Court, ICC Women's World Cup 2025
ICC महिला वर्ल्ड कप 2025 का खिताब भारतीय महिला खिलाड़ियों ने अपने नाम किया था. (आजतक/Calcutta High Court)
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अर्पित कटियार
8 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 8 फ़रवरी 2026, 05:34 PM IST)
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही देश की बेटियों ने क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता है, लेकिन बेटियों को पूरी तरह से बराबरी हासिल करने में अभी लंबा रास्ता तय करना है. हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें महिला और उसकी डेढ़ साल की बेटी की मौत के मामले में ससुराल वालों को बरी कर दिया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अपूर्बा सिन्हा राय राज्य की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पीड़िता के ससुराल वालों को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी. आरोप है कि ससुराल वालों ने पीड़िता के साथ क्रूरता की, बच्ची को जन्म देने पर ताना मारा और 5 लाख रुपये दहेज की मांग की. हाई कोर्ट ने कहा,

हमें खुशी और गर्व है कि हमारी बेटियों ने हाल ही में क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता है और वे कई क्षेत्रों में उपलब्धियां भी हासिल कर रही हैं, लेकिन डेढ़ साल की बेटी और महिला की मौत से हमें याद आता है कि हमारी बेटियों के लिए पूरी तरह से समानता हासिल करने के लिए अभी भी हमें बहुत लंबा रास्ता तय करना है. 

क्या है मामला?

पीड़िता की शादी 2018 में हुई थी. वह पति के साथ अंडमान-निकोबार में किराए के घर में रहती थी. 2021 में पति से झगड़े के बाद पीड़िता और उसकी बेटी की मौत हो गई. बाद में पीड़िता के पिता ने दहेज और क्रूरता की शिकायत दर्ज कराई. 2024 में ट्रायल कोर्ट ने ससुराल वालों को बरी कर दिया था. अब हाई कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दोबारा कार्रवाई का निर्देश दिया है.

क्या कहा अदालत ने

अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के परिजनों जैसे महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया. परिजनों ने बताया था कि शादी के बाद पीड़िता को ससुराल में लगातार प्रताड़ित किया गया. यह भी सामने आया कि शादी के तुरंत बाद, लड़की पैदा होने की स्थिति में 5 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की गई थी. बच्ची के जन्म के बाद अत्याचार और बढ़ गए.

बचाव पक्ष की दलील

ससुराल वालों की ओर से पेश सीनियर वकील दीप चैम कबीर ने कहा कि FIR पहले एक पड़ोसी ने दर्ज कराई थी और आरोपी उस समय मौके पर मौजूद नहीं थे. उन्होंने दावा किया कि पति-पत्नी के बीच सामान्य वैवाहिक तनाव था.

कबीर ने इस बात पर भी जोर दिया कि पति के साथ गंभीर झगड़े के तुरंत बाद ना केवल महिला की मौत हुई, बल्कि महिला ने अपनी बेटी की भी हत्या की थी. उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि "एक मां कितनी क्रूर हो सकती है."

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सरकार की ओर से क्या कहा गया

सरकार की तरफ से पेश वकील सुमित कुमार कर्माकर ने इस बात पर जोर दिया कि कई गवाहों के बयानों से पता चलता है कि सभी बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत थे. पीड़िता को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसके चलते यह दुखद घटना हुई. उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयानों पर ठीक से विचार नहीं किया.

आरोपियों के लिए निर्देश

जिन ससुराल वालों को पहले बरी किया गया था, उन्हें चार हफ्ते के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया गया है. कोर्ट को निर्देश दिया गया कि आरोपियों को हिरासत में लेकर जमानत बांड भरने पर जमानत दे और कानून के अनुसार उनके खिलाफ आरोप तय करे.

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