कांग्रेस को बिल्कुल पसंद नहीं आया बजट, राहुल गांधी से लेकर पी चिदंबरम तक किसने क्या कहा?
Budget 2026: Rahul Gandhi ने मोदी सरकार के बजट पर निशाना साधा. उन्होंने देश में बेरोजगारी, कम मैन्युफैक्चरिंग और इन्वेस्टर्स के निवेश से पैसा खींचने जैसे मुद्दे उठाए. Congress के अन्य सीनियर नेताओं ने भी बजट में खामियां गिनाईं.

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मोदी सरकार के बजट 2026 की कड़ी आलोचना की है. पार्टी नेताओं का कहना है कि इस बजट में कुछ नहीं है और यह भारत की समस्याओं को नहीं सुलझाता है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मोदी सरकार के पास अब सोच की कमी है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी बजट की निंदा की. उन्होंने कहा कि यह बजट भारत के असली संकटों से बेखबर है. कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी बजट से नाराजगी जताई है.
चिदंबरम ने आंकड़ों के साथ केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट पर सवाल उठाए. 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश हुए केंद्रीय बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने X पर लिखा,
मोदी सरकार के पास अब कोई आइडिया नहीं बचा है. बजट 2026 भारत की कई आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का एक भी समाधान नहीं देता है. 'मिशन मोड' अब 'चैलेंज रूट' बन गया है.'रिफॉर्म एक्सप्रेस' शायद ही किसी 'रिफॉर्म' जंक्शन पर रुकती है.
नतीजा: कोई पॉलिसी विजन नहीं, कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं.
हमारे अन्नदाता किसान अभी भी सार्थक कल्याणकारी मदद या इनकम सिक्योरिटी प्लान का इंतजार कर रहे हैं.
असमानता ब्रिटिश राज के समय के स्तर को पार कर गई है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं है और न ही SC, ST, OBC, EWS और अल्पसंख्यक समुदायों को कोई मदद दी गई है.
उन्होंने बयान में कहा,
रुपये के गिरते हुए मूल्य से निपटने की भी योजना सरकार के पास नहीं है.
खरगे ने आगे कहा कि बजट में कम मजदूरी, कमजोर उपभोक्ता मांग, निजी निवेश में सुस्ती जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था के मूल संकट पर ध्यान नहीं दिया गया है.
राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार के बजट पर निशाना साधा. उन्होंने देश में बेरोजगारी, कम मैन्युफैक्चरिंग और इन्वेस्टर्स के निवेश से पैसा खींचने जैसे मुद्दे उठाए. गांधी ने बजट पर अपनी राय देते हुए X पर लिखा,
"बिना नौकरी वाले युवा.
गिरता हुआ मैन्युफैक्चरिंग.
इन्वेस्टर्स पैसा निकाल रहे हैं.
घरेलू बचत तेजी से गिर रही है.
किसान परेशान हैं.
आने वाले वैश्विक झटके - सभी को नजरअंदाज किया गया.एक ऐसा बजट जो सुधार करने से इनकार करता है, भारत के असली संकटों से अनजान है."

देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी लंबा-चौड़ा बयान देकर केंद्र के बजट का विरोध किया. उन्होंने कहा कि यह बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है. कांग्रेस ने उनके बयान को पोस्ट करते हुए लिखा,
हर बजट से पहले कॉमेंट करने वाले और लिखने वाले और इकोनॉमिक्स के हर स्टूडेंट को आज संसद में वित्त मंत्री की स्पीच सुनकर बहुत हैरानी हुई होगी.
मैं समझता हूं कि बजट सिर्फ सालाना कमाई और खर्च का बयान भर नहीं होता. मौजूदा हालात में बजट स्पीच में कुछ दिन पहले जारी किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में बताई गईं बड़ी चुनौतियों पर एक साफ नजरिया पेश किया जाना चाहिए था.
मुझे शक है कि सरकार और वित्त मंत्री ने इकोनॉमिक सर्वे पढ़ा भी है या नहीं. अगर उन्होंने पढ़ा है, तो ऐसा लगता है कि उन्होंने इसे पूरी तरह से नजरअंदाज करने और अपने पसंदीदा शौक पर वापस लौटने का फैसला किया- लोगों पर शब्दों की बौछार करना, आमतौर पर एक्रोनिम्स (शॉर्ट फॉर्म) के जरिए."
चिदंबरम ने भारत की ऐसी 10 चुनौतियाँ गिनाईं, जिन पर उनके मुताबिक सीधे तौर पर बजट में बात नहीं हुई. इनमें उन्होंने अमेरकी टैरिफ, लंबे समय से चल रहे व्यापारिक संघर्ष, चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा, प्राइवेट सेक्टर में निवेश से हिचकिचाहट, फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) जैसे मुद्दे उठाए.
उन्होंने कहा,
एक अकाउंटेंट के मानकों से भी देखें तो 2025-26 में वित्त प्रबंधन का यह एक बेहद खराब लेखा-जोखा था.
रेवेन्यू रसीद 78,086 करोड़ रुपये कम रहीं, कुल खर्च 1,00,503 करोड़ रुपये कम रहा. रेवेन्यू खर्च 75,168 करोड़ रुपये कम रहा और कैपिटल खर्च 1,44,376 करोड़ रुपये कम किया गया (केंद्र: 25,335 करोड़ रुपये और राज्य: 1,19,041 करोड़ रुपये).
इस खराब प्रदर्शन को समझाने के लिए एक भी शब्द नहीं कहा गया. असल में केंद्र सरकार का कैपिटल खर्च 2024-25 में GDP के 3.2 फीसदी से घटकर 2025-26 में 3.1 फीसदी रह गया है.
उन्होंने आखिर में कहा कि इनडायरेक्ट टैक्स के मामले में आम आदमी सिर्फ भाषण के पैराग्राफ 159, 160 और 161 से ही मतलब रखेगा. चिदंबरम ने माना कि वे इन छोटी-मोटी रियायतों का स्वागत करते हैं. उन्होंने बजट पर अपना नतीजा जाहिर करते हुए बताया कि बजट और बजट स्पीच आर्थिक रणनीति और आर्थिक राजनेतृत्व (Economic Statesmanship) की कसौटी पर खरे नहीं उतरते.
वीडियो: Budget 2026: कंटेंट क्रिएटर्स को लेकर क्या ऐलान हुआ?

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