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सड़क के गड्ढे से झटका लगा, एंबुलेंस के अंदर 'ब्रेन डेड' महिला जिंदा हो गई

Pilibhit Brain-dead woman pothole: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत की एक महिला की सांस कथित तौर पर गड्ढे से लगे झटके की वजह से लौट आई. डॉक्टर्स ने कह दिया था कि उन्हें सांस नहीं आ रही है. जिसके बाद परिवार वाले महिला को लेकर जा रहे थे. इसी दौरान ये घटना हुई.

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11 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 05:05 PM IST)
Pilibhit  Brain-dead woman pothole
मरीज विनिता शुक्ला अब बिल्कुल स्वस्थ हैं. (फोटो-इंडिया टुडे)
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सड़क के गड्ढे के चलते मौत की घटनाएं दिल्ली, बेंगलुरु समेत हर शहर में मिल जाएंगी. लेकिन गड्ढे की वजह से जिंदगी मिलने की एक खबर यूपी के पीलीभीत से आई है. 50 साल की विनिता शुक्ला को अस्पताल ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था, घर में अंतिम संस्कार की तैयारियों के लिए कह दिया गया था. परिवार एंबुलेंस से बरेली-हरिद्वार के नेशनल हाईवे NH74 के रास्ते विनिता को घर ला रहा था. इसकी बाद का दावा ही खबर है. बताया गया कि रास्ते में एक गड्ढे की वजह से कार को झटका लगा और विनिता सांस लेने लगीं.

इंडिया टुडे से जुड़े सौरभ पांडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पीलीभीत के ज्यूडिशियल कोर्ट में काम करने वाली विनिता 22 फरवरी को घर में अचानक चक्कर खाकर गिर गईं. परिवार पहले उन्हें पीलीभीत के ही एक अस्पताल में ले गए थे. जहां से उन्हें बरेली रेफर कर दिया गया. बरेली के अस्पताल में डॉक्टरों ने 24 फरवरी को कथित तौर पर ये कहते हुए विनिता को ले जाने के लिए कहा कि उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं है.

ठीक हो चुकीं मरीज विनिता शुक्ला ने खुद बताया, “बीपी थोड़ा सा बढ़ा था. मैंने एक गोली खाई थी. बस उसी के बाद से पता नहीं क्या हुआ. बेहोश हो गई थी. हमारे परिवार वालों ने बताया कि क्या हुआ था? डॉक्टर्स ने कह दिया कि मूवमेंट नहीं है. आप ले जा सकते हैं. लेकिन मैं आज पूरी तरह स्वस्थ हूं. न्यूरो सर्जन डॉक्टर राकेश सिंह हमारे लिए बिल्कुल भगवान जैसे हैं.”

विनिता के पति कुलदीप का कहना है कि उनकी पत्नी की तबीयत खराब हुई थी. उन्होंने BP की दवाई खाई थी. लेकिन 10-15 मिनट बाद वो बेहोश हो गईं. वो उन्हें सरकारी अस्पताल ले गए. वहां से दूसरे मेडिसिटी हॉस्पिटल लेकर गए. दो दिन अस्पताल में रखकर डॉक्टर्स ने कहा कि आप इन्हें घर ले जाओ, इनका बीपी भी डाउन है और सांस भी नहीं आ रही.

कुलदीप ने दावा किया, "24 को छुट्टी करा दी थी. हम रास्ते में आ रहे थे. रोड बन रहा था. वहां गड्ढे में टायर पड़ा और इन्हें सांस आने लगी. वहां से हम इन्हें पीलीभीत में ही डॉ. राकेश सिंह के पास लेकर आए."

परिवार के मुताबिक डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि मरीज में Brainstem reflexes नहीं मिल रहे थे. ये वो स्थिति है जिसे ब्रेन डेड होने का संकेत माना जाता है. ब्रेन कोमा का एक स्कोर होता है. ग्लासगो कोमा स्केल (GCS). वो मैक्सिम 15 होना चाहिए. लेकिन उनका 3 था. यानी ऐसी मेडिकल कंडीशन जिसमें मरीज बेहोश हो जाता है और आवाज, स्पर्श या दर्द होने पर रिएक्ट नहीं करता है.

न्यूरो सर्जन ने भी जांच की तो विनिता की आंख की पुतली फैलकर बड़ी हो गई थी. रोशनी से भी वो सिकुड नहीं रही थी. टेस्ट किए तो पता चला कि विनिता के खून में न्यूरोटॉक्सिन हैं. ऐसा जहर जिसने नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाया है. जिसके बाद उनका इलाज किया गया और एक हफ्ते बाद वो नॉर्मल सांस लेने लगीं. विनिता करीब 10 दिन डॉक्टर राकेश के अस्पताल में भर्ती रहीं और अब घर पहुंच गई हैं.

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