The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Bombay High Court judge facing threats family attacked in uk over dawoodi bohra verdict

पूर्व HC जज और परिवार को कौन भारत से लंदन तक धमका रहा? दाऊदी बोहरा समुदाय पर दिया था फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस जीएस पटेल पिछले 10 महीनों से धमकियों और हिंसा का सामना कर रहे हैं. दरअसल जस्टिस पटेल ने इस साल अप्रैल में दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक नेतृत्व को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर फैसला सुनाया था. इसके बाद से उनका परिवार डर के साए में जी रहा है.

Advertisement
pic
8 जून 2026 (पब्लिश्ड: 10:22 PM IST)
dawoodi bohra verdict justice GS patel dawoodi bohra
जस्टिस जीएस पटेल और उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं. (एक्स)
Quick AI Highlights
Click here to view more

बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस जीएस पटेल पिछले 10 महीने से डर के साए में जी रहे हैं. उनके परिवार को भारत से लंदन तक लगातार धमकी और हमलों का सामना करना पड़ा रहा. इसकी जड़ में है दाऊदी बोहरा समुदाय के नेतृत्व विवाद पर उनका एक फैसला. इसको लेकर उनकी बेटी पर इस साल अप्रैल में लंदन में हमला हुआ था. वहीं 5 जून को धमकी भरी एक चिट्ठी मिली है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 जून को जस्टिस पटेल की बेटी अदिति पटेल को लंदन में एक गुमनाम पत्र मिला. पत्र में लिखा था, 

आपको पर्याप्त चेतावनी दी जा चुकी थी. अब गिरोह को पेमेंट दे दिया गया है. अगला कदम आपका और आपके परिवार का अंतिम संस्कार करना है. पिछले पत्र में बताई गई बात मानकर आप बच सकते हैं. अगर आप बात नहीं मानते हैं तो क्या होगा ये दिखाने के लिए एक मेमोरी कार्ड भेजा गया है.

इस लेटर पर जर्मनी की मुहर लगी है और इसे लंदन के एक फर्जी पते से भेजा गया था. ब्रिटिश पुलिस ने मेमोरी कार्ड को जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है. पत्र लिखने वालों की मांग है कि जस्टिस पटेल 23 अप्रैल 2024 के अपने फैसलो को एक यूट्यूब वीडियो बना कर वापस लें. हालांकि संवैधानिक कोर्ट के मामले में ऐसा बिलकुल नहीं होता है.

जस्टिस पटेल ने इस पूरे मामले की जानकारी भारत के उच्चायोग, बॉम्बे हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को भी दी है. उन्होंने साफ कहा कि किसी हाई कोर्ट के फैसले को यूट्यूब वीडियो जारी करके वापस नहीं लिया जा सकता और ऐसा दबाव भारतीय न्यायिक इतिहास में अभूतपूर्व है.

क्या है पूरा मामला?

इस विवाद की जड़ में 23 अप्रैल 2024 का एक फैसला है, जिसमें जस्टिस पटेल ने दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक नेतृत्व को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर फैसला सुनाया था. उन्होंने मुफद्दल सैफुद्दीन को समुदाय का 53वां दाई-अल-मुतलक माना था और प्रतिद्वंद्वी गुट के दावे को खारिज कर दिया था. दूसरे पक्ष ने हाई कोर्ट की खंडपीठ में इस फैसले के खिलाफ अपील की है.

अगस्त 2025 से शुरू हुआ धमकियों का सिलसिला

अगस्त 2025 से जस्टिस पटेल को धमकी मिलना शुरू हो गई. मुंबई स्थित उनके घर और लंदन में उनकी बेटी के पत्ते पर भेजे गए पत्रों में दावा किया गया कि एक संगठित समूह इस फैसले को बदलवाने के लिए दबाव बना रहा है. पत्रों में यहां तक निर्देश दिए गए कि जस्टिस पटेल यूट्यूब वीडियो जारी करके कहें कि उन्होंने दबाव में फैसला सुनाया था.

लंदन में बेटी पर नकाबपोश का हमला

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब अप्रैल 2026 में लंदन में उनकी बेटी अदिति पटेल पर कथित तौर पर एक नकाबपोश ने हमला कर दिया. इस हमले में उनकी नाक की हड्डी टूट गई और गंभीर चोटें भी आईं. ब्रिटेन की एंटी टेररिज्म यूनिट इस घटना की जांच कर रही है.

जस्टिस पटेल ने क्या कहा?

जस्टिस पटेल ने इन हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर उनके फैसले से किसी को असहमति है तो उसके लिए कानूनी तौर पर अपील का रास्ता खुला है. उन्होंने कहा,

 न्यायधीशों पर इस तरह का दबाव न केवल न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा है, बल्कि इससे ये सवाल भी खड़े होते हैं कि यदि जज और उनके परिवार सुरक्षित नहीं होंगे तो भविष्य में कौन बिना डर के न्यायिक जिम्मेदारी निभाना चाहेगा.

कौन हैं दाऊदी बोहरा ?

दाऊदी बोहरा समुदाय इस्लाम के शिया संप्रदाय की मुस्तअली इस्माइली शाखा से जुड़ा एक समुदाय है. इसकी जड़ें 11वीं-12वीं सदी में मिस्र के फातिमी खिलाफत काल से जुड़ती हैं. दुनिया भर में इस समुदाय की आबादी लगभग 10 लाख के आसपास बताई जाती है. इस समुदाय के पुरुष आमतौर पर सफेद पोशाक और सुनहरी कढ़ाई वाली टोपी पहनते हैं, जबकि महिलाएं रंग-बिरंगी रिदा पहनती हैं.

बोहरा समुदाय का सर्वोच्च धार्मिक मुखिया दाई-अल-मुतलक कहलाते हैं. उनको आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों मामलों में अंतिम मार्गदर्शक माना जाता है. फिलहाल सैयना मुफद्दल सैफुद्दीन को समुदाय का 53वां दाई-अल-मुतलक माना जाता है. 

साल 2014 में 52वें धर्मगुरु सैयद मोहम्मद बुरहानुद्दीन के निधन के बाद उत्तराधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई. एक पक्ष ने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन का समर्थन किया, जबकि दूसरा पक्ष ताहेर फकरुद्दीन के साथ खड़ा हुआ. इसी विवाद पर 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला आया था, जिसे लेकर जस्टिस जीएस पटेल और उनके परिवार को धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.

वीडियो: बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश, सड़क खाली करें मनोज जरांगे

Advertisement

Advertisement

()