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कोरोना से हुई थी पति की मौत, 5 साल की कानूनी लड़ाई के बाद पत्नी को मिलेंगे 50 लाख रुपये

Bombay HC MSRTC compensation: 24 फरवरी को जस्टिस मकरंद एस कार्णिक और श्रीराम एम मोदक की डिवीजन बेंच ने एक याचिक पर फैसला सुनाते हुए एकमहिला को 50 लाख रुपये का मुआवजा का हकदार बताया. कोर्ट ने MSRTC को कहा कि वे महिला को 8 हफ्ते के अंदर मुआवजा दें.

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Bombay HC MSRTC compensation
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनीता बापू जगताप की याचिका पर फैसला सुनाया. (फोटो-इंडिया टुडे)
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रितिका
27 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 07:58 PM IST)
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महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (MSRTC) के एक कर्मचारी की कोरोना महामारी से मौत हो गई थी. नाम था बापू जगताप. वह वडाला डिपो पर ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए तैनात थे. अप्रैल 2021 में उन्होंने कोविड टेस्ट कराया, जिसमें वो पॉजिटिव आए और दो दिन बाद ही उनकी मौत गई. उनकी मौत के बाद परिवार ने MSRTC से मुआवजे की मांग की थी लेकिन कॉर्पोरेशन ने साफ मना कर दिया. कार्पोरेशन का कहना था कि बापू जगताप इंटरस्टेट बस चलाने वाले ड्राइवर नहीं थे और उन्हें ‘जरूरी सेवाओं’ के लिए तैनात नहीं किया गया था. 

MSRTC के इन फैसलों के खिलाफ मृतक की पत्नी सुनीता बापू जगताप ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था. 24 फरवरी को जस्टिस मकरंद एस कार्णिक और श्रीराम एम मोदक की डिवीजन बेंच ने इस मामले पर फैसला सुनाया और MSRTC को आदेश दिया कि वो मुआवजे के तौर पर 50 लाख रुपये बापू जगताप के परिवार को दे. 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने निर्देश दिया कि MSRTC 8 हफ्तों के अंदर याचिकाकर्ता को मुआवजे के तौर पर 45 लाख रुपये देना होगा. इसमें पहले दिए गए 5 लाख रुपये को एडजस्ट करने के लिए भी कहा गया. बेंच ने आदेश दिया कि अगर 8 हफ्तों में ये रकम पिटीशनर को नहीं दी जाती है तो इस पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा. 

कोर्ट ने MSRTC के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि परिवार को सिर्फ इस आधार पर मुआवजा नहीं दिया गया कि मृतक ड्राइविंग का काम नहीं करता था. ये 'छोटी सोच' है. वो कोविड के समय की मुश्किल स्थिति को भूल गए. उस समय कोई भी ड्यूटी करने के लिए घर से बाहर जाने को तैयार नहीं था.

रिकॉर्ड में मौजूद सबमिशन और मटीरियल को देखने के बाद बेंच ने कहा, 

मृतक ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए तैनात किया गया था. अपनी ड्यूटी निभाते हुए उनका ड्राइवरों और कंडक्टरों से मिलना-जुलना और संपर्क में आना था जो असल में बसें चला रहे थे. ऐसे में उन्हें ड्राइवरों और कंडक्टरों जैसा ही खतरा था. फैक्ट्स और हालात को देखते हुए हम पिटीशनर को राहत देने के लिए एक नजरिया अपना रहे हैं”

रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक बापू जगताप 24 मार्च से 28 मार्च 2021 तक वडाला में BEST बस डिपो पर ट्रैफिक की देखरेख के लिए तैनात किया गया था. बीमार पड़ने के बाद उन्होंने 29 मार्च से 31 मार्च तक ऑफ लिया. 5 अप्रैल, 2021 को उन्होंने COVID-19 टेस्ट करवाया, जिसमें वो पॉजिटिव आए. दो दिन बाद यानी 7 अप्रैल को नासिक के येवला के सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में COVID से जुड़े निमोनिया की वजह से उनकी मौत हो गई थी. 

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