गलती से आए मार्जिन पर लगाया दांव और कमाए 1.75 करोड़, ब्रोकर बोला- 'ये पैसे मेरे हुए', फिर...
एक शख्स के डीमैट अकाउंट में गलती से आए 40 करोड़ के मार्जिन से उसने 1.75 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा लिया. हालांकि, ब्रोकर कंपनी ने उससे ये पैसे वापस मांगे, जिसके बाद वह इस केस को हाई कोर्ट तक ले गया. अब कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है.

एक कहावत है, जोखिम यानी रिस्क को संपत्ति में बदल डालो. मोटिवेशनल स्पीकर भी आपसे ये कहते मिल जाएंगे कि ‘जहां रिस्क नहीं है, वहां रिवार्ड (Reward) नहीं है’. आपके लिए ये कोरी बातें होंगी लेकिन एक ट्रेडर हैं गजानन राजगुरु, उन्होंने इसे हकीकत में बदल डाला है. उनके ट्रेडिंग अकाउंट में सिर्फ 3 हजार 175 रुपये थे. फिर ब्रोकर की एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलती से उन्हें 40 करोड़ रुपये का मार्जिन मिल गया. इसके बाद राजगुरु ने अपने जीवन का सबसे बड़ा रिस्क लिया. इन पैसों से ट्रेड किया और सिर्फ 20 मिनटों के भीतर 1.75 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाकर करोड़पति बन गए.
ये किस्मत की बात नहीं है. रिस्क लेने की हिम्मत का मामला है. हालांकि, कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. अपना मुनाफा हासिल करने के लिए गजानन को और भी बहुत कुछ करना पड़ा. तमाम ट्रिब्यूनलों से होते हुए हाई कोर्ट तक जाना पड़ा क्योंकि जिस ब्रोकर फर्म की तकनीकी गड़बड़ी से उन्हें इतना बड़ा मुनाफा हुआ था, वो इसे अपने पैसे बताकर वापस मांग रही थी. गजानन ने ऐसा करने से मना कर दिया और छोटी अदालतों से होते हुए मामले को बॉम्बे हाईकोर्ट तक ले गए. अब राज्य की सबसे बड़ी अदालत ने फैसला सुनाया है कि 1.75 करोड़ रुपये के इस मुनाफे पर सिर्फ गजानन का हक है. कंपनी इस पर अपना दावा नहीं कर सकती.
चलिए पूरा मामला विस्तार से समझते हैंमहाराष्ट्र के एक ट्रेडर हैं गजानन राजगुरु. Economic Times के मुताबिक, उन्होंने अक्टूबर 2021 में ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए कोटक सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट खोला था. 26 जुलाई 2022 को उनके अकाउंट में सिर्फ 3175.69 रुपये थे, लेकिन कोटक सिक्योरिटीज के सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी के कारण उनके अकाउंट में अचानक बहुत बड़ी रकम का मार्जिन दिखने लगा.
मार्जिन को आप ऐसे समझिए कि अगर आप किसी ऐसे शेयर में ट्रेड करना चाहते हैं जो आपकी क्षमता से बाहर है तो ब्रोकर आपको कुछ पैसे उधार देते हैं. इसमें फायदे की जितनी संभावना होती है, नुकसान का जोखिम भी उतना ही ज्यादा होता है.
इस मामले में ट्रेडर गजानन थे और कोटक सिक्योरिटीज था ब्रोकर. कोटक सिक्योरिटीज के सिस्टम में कोई टेक्नीकल ग्लिच आया होगा, जिसकी वजह से गजानन के डीमैट अकाउंट में 40 करोड़ का मार्जिन दिखने लगा था. गजानन ने इस रिस्क को संपत्ति में बदलने की कोशिश के तहत अपने जीवन का सबसे बड़ा दांव खेला. 40 करोड़ के मार्जिन का फायदा उठाकर तकरीबन 20 मिनट के भीतर ही उन्होंने लगभग 94.81 करोड़ रुपये के फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) ट्रेड कर डाले.
रिस्क लेने का फायदा हुआ और गजानन ने इन ट्रेड्स से 1.75 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा लिया. उसी दिन शाम को उन्हें इन ट्रेड्स का ‘कॉन्ट्रैक्ट नोट’ भी मिल गया और उनके अकाउंट में 1.83 करोड़ रुपये क्रेडिट भी हो गए. लेकिन इसके कुछ ही समय बाद कोटक सिक्योरिटीज ने यह कहते हुए 1.75 करोड़ रुपये उनके अकाउंट से वापस निकाल लिए कि ये ट्रेड गलत तरीके से मिले मार्जिन पर किए गए थे.
गजानन को ये बात ठीक नहीं लगी. वह अगले दिन कोटक सिक्योरिटीज के ऑफिस पहुंच गए, लेकिन वहां कोई सॉल्यूशन नहीं मिला. इसके बाद 15 सितंबर 2022 को उन्होंने नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के इन्वेस्टर सर्विस सेल में शिकायत दर्ज कराई. एनएसई की ग्रिवांस रिड्रेसल कमेटी ने 19 अक्टूबर 2022 को उसकी शिकायत खारिज कर दी. गजानन ने लेकिन हार नहीं मानी. उन्होंने इस फैसले के खिलाफ 25 नवंबर 2022 को आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल (Arbitral Tribunal) में अपील की, लेकिन 1 जून 2023 को वहां भी उनका दावा खारिज हो गया.
गजानन ने इसके बाद एनएसई के अपीलेट फोरम में अपील की. यहां वो केस जीत गए. अपीलेट ट्रिब्यूनल ने कोटक सिक्योरिटीज को आदेश दिया कि वो 26 जुलाई 2022 से 12 प्रतिशत ब्याज के साथ गजानन को 1.75 करोड़ रुपये लौटाए. फोरम के आदेश के आधार पर एनएसई ने कोटक सिक्योरिटीज के एक्सचेंज ड्यूज अकाउंट से 2.01 करोड़ रुपये काट लिए.
कोटक सिक्योरिटीज को ये फैसला ठीक नहीं लगा और उसने इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर दी. 3 दिसंबर 2025 को बॉम्बे हाई कोर्ट में भी इस मामले में गजानन राजगुरु की जीत हुई और कोटक सिक्योरिटीज को हार का सामना करना पड़ा.
कोर्ट ने क्या कहा?बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामला सुनते हुए कहा कि ट्रेडर को सिस्टम में मौजूद मार्जिन दिखाया गया था और उसने उसी आधार पर अपने स्किल और रिस्क उठाने की क्षमता का इस्तेमाल करते हुए F&O ट्रेड किए. इसलिए जो मुनाफा हुआ वह ट्रेडर का है न कि ब्रोकर का.
इस पर कोटक सिक्योरिटीज ने दलील दी कि उन्होंने गलती से लगभग 40 करोड़ रुपये का मार्जिन क्रेडिट कर दिया था. ऐसे में उस पैसे से जो भी मुनाफा होता है, उस पर उनका हक है. हालांकि, हाई कोर्ट ने उनकी दलील खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पैसा मिल जाने से अपने आप मुनाफा नहीं हो जाता. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी नोट किया कि शुरुआत में ट्रेडर गजानन को 54 लाख रुपये का नुकसान हुआ था. इसके बाद उसे 2.38 करोड़ रुपये का फायदा हुआ और इस तरह कुल मिलाकर 1.75 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा उसने कमाया था.
हाई कोर्ट ने साफ कहा कि कोटक सिक्योरिटीज को इस गलती से कोई नुकसान नहीं हुआ. वो इस बहाने से कि मुनाफा उनके मार्जिन से कमाया गया, ट्रेडर की मेहनत और जोखिम से हुए मुनाफे पर खुद फायदा उठाना चाहते हैं. कोर्ट ने कहा कि अगर इसका उलटा होता और ट्रेडर को नुकसान होता तब कोटक सिक्योरिटीज ये कहकर नुकसान माफ नहीं करती कि गलती से ज्यादा मार्जिन उन्होंने ही दिया था. ट्रेडर को वह नुकसान कोटक सिक्योरिटीज को लौटाना ही पड़ता. ऐसा नहीं हो सकता कि ट्रेडर से नुकसान की भरपाई तो ली जाए लेकिन मुनाफा उसे रखने न दिया जाए.
कोर्ट ने आगे कहा,
कोटक सिक्योरिटीज के लिए यह कोई ‘विन-विन सिचुएशन’ यानी दोनों तरफ से जीत की स्थिति नहीं हो सकती जहां वो नुकसान होने पर ट्रेडर से वसूली करें और मुनाफा होने पर पूरा मुनाफा खुद रख लें और वो भी सिर्फ इस दलील पर कि ट्रेड उनके मार्जिन से हुए थे.
हाई कोर्ट ने इस बात पर भी संज्ञान लिया कि कोटक सिक्योरिटीज ने ट्रेडर से कहा था कि वो 50 लाख रुपये रख ले लेकिन 1.75 करोड़ के मुनाफे पर दावा छोड़ दे. ट्रेडर ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था. कोटक सिक्योरिटीज ने यह भी कहा कि रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह मामला उनके पक्ष में जाना चाहिए, लेकिन कोर्ट ने कहा कि एक तरफ वो ट्रेडर से मुनाफा बांटने की कोशिश कर रहे थे और दूसरी तरफ अब पूरा मुनाफा खुद रखने के लिए कोर्ट से आदेश पलटने की मांग कर रहे हैं. जबकि उनके ही सिस्टम ने ये ट्रेड होने दिए.
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?इकनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए यूनिवर्सल लीगल के फाउंडर अपूर्व अग्रवाल ने कहा कि कोर्ट ने जो बात कही है वो तथ्यों पर आधारित थी. पहली बात तो ये कि पैसा सीधे ग्राहक के बैंक खाते में नहीं आया था. गलती से जो दिखाया गया, वह सिर्फ ज्यादा ट्रेडिंग मार्जिन था. इससे ग्राहक को बड़े ट्रेड करने की अनुमति मिल गई. मुनाफा तभी हुआ क्योंकि ग्राहक ने बाजार का रिस्क लिया. खुद फैसले किए और मार्केट उसके फेवर में गया. ऐसे में मुनाफा किसी तकनीकी गड़बड़ी से अपने आप मिलने वाला फायदा नहीं था, बल्कि बाजार में ट्रेडिंग का नतीजा था.
अग्रवाल ने आगे कहा कि दूसरी बात ये कि ब्रोकर ने उस समय इन ट्रेड्स को सही और वैध माना. ट्रेड के कॉन्ट्रैक्ट नोट जारी किए गए. ब्रोकरेज और बाकी फीस भी वसूली गई और पोजीशन चलने दी गई. सिर्फ तब जब ट्रेड मुनाफे में आ गए, ब्रोकर ने उस मुनाफे को वापस लेने की कोशिश की. कोर्ट के लिए यह पचा पाना मुश्किल था कि एक ब्रोकर पहले ट्रेड को मंजूरी दे. फीस कमाए और बाद में कहे कि मुनाफा अनुचित है.
तीसरी बात जो अग्रवाल ने बताई वो ये कि ब्रोकर साबित नहीं कर पाया कि इस गलती की वजह से उसे कोई आर्थिक नुकसान हुआ है.
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