NCP के मर्जर पर बीजेपी ने शरद पवार को ही घेर लिया
Sharad Pawar ने Ajit Pawar की मौत के बाद दावा किया था कि NCP के दोनों धड़ों में मर्जर की सहमति बन चुकी थी और इसकी घोषणा 12 फरवरी को होनी थी. उन्होंने कहा कि अजित पवार मर्जर के पक्ष में थे और उनकी पार्टी (एनसीपी शरद गुट) की भी यही राय थी.

28 जनवरी को विमान हादसे में अजित पवार की मौत हो गई. 31 जनवरी को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. सवाल उठे कि इतनी भी क्या जल्दी थी. लोगों ने यहां तक कह दिया कि अजित पवार की चिता की आग भी ठंडी नहीं हुई थी और उनकी पत्नी को डिप्टी सीएम बना दिया गया. अब बीजेपी ने इसका काउंटर करते हुए शरद पवार को घेरने की कोशिश की है. बीजेपी ने सवाल उठाया है कि NCP के मर्जर को लेकर इतनी जल्दबाज़ी क्यों हुई.
दरअसल, 31 जनवरी को शरद पवार ने दावा किया था कि NCP के दोनों धड़ों में मर्जर पर सहमति हो चुकी थी. उन्होंने दावा किया कि अजित पवार की भी यही इच्छा थी. महाराष्ट्र बीजेपी ने शरद पवार के इन दावों पर उन्हें घेरने की कोशिश की है.
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में महाराष्ट्र बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा कि NCP, एनडीए और महायुति के साथ है. अगर शरद पवार की पार्टी NCP के साथ आना चाहती है तो उसे सरकार में शामिल होना पड़ेगा. ऐसे में उसके सेकुलर एजेंडे का क्या होगा? उपाध्याय ने पूछा,
शरद पवार की पार्टी NCP में विलय के लिए इतनी बेताब क्यों है? शोक की अवधि खत्म होने और अजित पवार की अस्थियों के विसर्जन से पहले ही उन्होंने विलय का मुद्दा उठा दिया. उन्हें विलय की इतनी जल्दी क्यों है?
पवार ने अजित पवार की मौत के बाद दावा किया था कि NCP के दोनों धड़ों में मर्जर की घोषणा 12 फरवरी को होनी थी. उन्होंने कहा कि अजित पवार मर्जर के पक्ष में थे और उनकी पार्टी (NCP शरद गुट) की भी यही राय थी.
केशव उपाध्याय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी मर्जर की बात उठाने को लेकर शरद पवार को निशाने पर लिया है. उपाध्याय ने लिखा,
अजित पवार की दुर्भाग्यपूर्ण मौत के बाद पवार ग्रुप ने जो पॉलिटिक्स शुरू की उसे देखते हुए शरद पवार की क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठना चाहिए था. लेकिन इसके बजाय सुनेत्रा पवार और बीजेपी को निशाने पर लिया गया. यह राजनैतिक ईमानदारी नहीं जिम्मेदारी से बचने का एक तरीका है. इस मौके पर कुछ आसान लेकिन परेशान करने वाले सवाल उठते हैं. जिस दिन एक्सीडेंट हुआ, उसी दिन पवार ग्रुप ने मर्जर पर बातचीत शुरू कर दी थी और खुद शरद पवार ने इस पर सहमति दे दी. जबकि NCP (अजित गुट) की ओर से किसी ने भी इस बातचीत की डिमांड नहीं की थी. फिर इस मुद्दे को इतनी जल्दीबाजी में उठाने की क्या जरूरत थी?
उन्होंने आगे लिखा,
मर्जर की बात उठाकर शरद पवार गुट ने अपनी हताशा का परिचय दिया है. उन्होंने सवाल उठाए, क्या मर्जर की मांग करना पवार गुट की राजनीतिक मजबूरी का संकेत था? क्योंकि उस समय यह साफ था कि अजित पवार एनडीए और महायुति के साथ ही रहेंगे. अगर मर्जर होने वाला था तो शरद पवार का तथाकथित सेक्युलर रुख कहां चला गया? अगर मर्जर की बात चल रही थी तो केंद्र में यूपीए और राज्य में महाविकास अघाड़ी (MVA) का क्या होगा?
बीजेपी प्रवक्ता ने आखिर में पूछा,
सबसे जरूरी सवाल तो ये है कि शरद पवार ने खुद स्पष्ट रुख अपनाते हुए यह क्यों नहीं कहा कि विलय को लेकर अभी कोई चर्चा नहीं होनी चाहिए. उन्हें कहना चाहिए था कि परिवार के मुखिया के तौर पर मैं सुनेत्रा पवार के साथ मजबूती से खड़ा हूं. उन्हें कहना चाहिए था कि वह जो भी फैसला लेंगी, मैं उसे स्वीकार करूंगा और शोक की अवधि खत्म होने के बाद ही हम राजनीतिक चर्चा करेंगे. आखिर शरद पवार ने ऐसा क्यों नहीं किया जो संयम, समझदारी और नैतिक ऊंचाई को दिखाता है. इसके पीछे की असली वजह क्या है?
NCP के मर्जर के सवालों के बीच NCP (अजित गुट) के महाराष्ट्र अध्यक्ष सुनील तटकरे ने साफ कर दिया है कि एनडीए के साथ बने रहने का उनकी पार्टी का निर्णय स्थायी है. इस बयान को शरद पवार गुट के लिए एक मैसेज के तौर पर देखा गया कि अगर वो NCP का मर्जर चाहते हैं तो उन्हें कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) वाले महाविकास अघाड़ी का साथ छोड़ना होगा.
वीडियो: अजित पवार और शरद पवार की NCP एक होने वाली थी? 8 फरवरी को कौन सा ऐलान होने वाला था?

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