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'ट्रंप ने सीजफायर का एलान क्यों किया... क्या वो बातचीत कराएंगे?', कांग्रेस और ओवैसी ने पूछे सवाल

India और Pakistan के बीच हुए सीजफायर पर बीजेपी ने PM Narendra Modi के नेतृत्व की सराहना की है. वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने सीजफायर में Donald Trump और अमेरिका की भूमिका को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं.

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सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने सीजफायर का स्वागत किया है. (इंडिया टुडे, फाइल फोटो)
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आनंद कुमार
11 मई 2025 (Updated: 11 मई 2025, 11:02 AM IST)
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भारत और पाकिस्तान (India Pakistan Ceasefire) के बीच सीजफायर का एलान हो गया है. सत्तारूढ़ BJP और विपक्षी पार्टियों ने इसका स्वागत किया है. बीजेपी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और भारतीय सेना की तारीफ की है. वहीं कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक और संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है.

बीजेपी नेता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बहुत ही कम समय में आतंकियों और उनके स्पॉन्सर्स को सजा देने के लिए प्रधानमंत्री की तारीफ की है. उन्होंने कहा, 

यह भारत की जीत है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के जवाब ने दुश्मन को घुटने पर ला दिया है. और हर भारतीय को गर्व से भर दिया है.

एनडीए के घटक दल जेडीयू ने भी सीजफायर का स्वागत किया है. जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, 

भारत ने पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाया है जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा.

कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने आतंकी हमले के अपराधियों और उनके आकाओं के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए सरकार को स्पष्ट समर्थन दिया था. लेकिन इन पार्टियों ने सीजफायर कराने में अमेरिका की भूमिका को लेकर सवाल भी उठाया है. सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कहा, 

जैसे 2019 में पुलावामा-बालाकोट की घटना के बाद अमेरिकी हस्तक्षेप से चीजें शांत हुई थीं. इस बार भी अमेरिकी हस्तक्षेप, क्षेत्र को शांत करने की कोशिश कर रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा जारी बयान में सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने दावा किया है कि दोनों देश न्यूट्रल वेन्यू पर व्यापक मुद्दों पर बातचीत करेंगे. यह स्पष्ट तौर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का संकेत देता है. और यह दिखाता है कि 1972 के शिमला समझौते में जिस द्विपक्षीयता की बात हुई थी. वह अब अतीत की बात हो चुकी है. 

शिमला समझौता में भारत और पाकिस्तान ने तय किया था कि दोनों देश अपने मसले द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाएंगे. इसमें किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं होगी. कांग्रेस कम्यूनिकेशन डिपार्टमेंट के हेड जयराम रमेश ने ऑल पार्टी मीटिंग बुलाने की मांग की है. उन्होंने कहा, 

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए. साथ ही पिछले अठारह दिनों की घटनाओं पर चर्चा करने के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए, जिसमें पहलगाम में हुए क्रूर आतंकी हमले और आगे के कदमों की चर्चा की जानी चाहिए. और सामूहिक संकल्प प्रदर्शित किया जाना चाहिए.

कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने सीजफायर लागू होने को लेकर खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा, 

मैं बहुत खुश हूं. भारत कभी भी दीर्घकालीन युद्ध नहीं चाहता था. भारत का मकसद आतंकियों को सबक सिखाना था. मेरा मानना है कि सबक सिखाया जा चुका है.

कुछ कांग्रेसी नेताओं ने 1971 के युद्ध और बांग्लादेश के निर्माण के संदर्भ में इंदिरा गांधी को याद करते हुए एक्स पर पोस्ट किए. राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने एक्स पर लिखा, 

इंदिरा जी, आज पूरा देश आपको याद कर रहा है.

इसके अलावा जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल जैसे सीनियर कांग्रेसी नेताओं ने भी इंदिरा गांधी को याद करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट किए हैं. राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विशेष सत्र बुलाने और पहलगाम की आतंकी घटना से लेकर सीजफायर घोषित होने तक की एक-एक डिटेल शेयर करने की मांग की है. तेजस्वी यादव की मांग का समर्थन करते हुए उनकी पार्टी के सदस्य और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा, यह सुनकर थोड़ा अटपटा लगा कि सीजफायर का फैसला डॉनल्ड ट्रंप ने लिया.

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सीजफायर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 

जब तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करता रहेगा, तब तक कोई स्थायी शांति नहीं हो सकती…युद्धविराम हो या ना हो, हमें पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकियों का पीछा नहीं छोड़ना चाहिए. जब जब बाहरी आक्रमण हुआ है. मैं सरकार और सशस्त्र बलों के साथ खड़ा रहा हूं. यह समर्थन हमेशा रहेगा.  

हालांकि ओवैसी ने इसके साथ कुछ सवाल भी उठाए हैं. उन्होंने कहा, 

डॉनल्ड ट्रंप की बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीजफायर की घोषणा करनी चाहिए थी. हम शिमला समझौते के बाद से तीसरे पक्ष की मध्यस्ता का विरोध करते रहे हैं. अब हमने इसे क्यों स्वीकार किया? मुझे उम्मीद है कि कश्मीर मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर नहीं जाएगा, क्योंकि यह हमारा आंतरिक मामला है.

CPI(M) ने सीजफायर का स्वागत करते हुए कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि दोनों देश इस पर काम करेंगे. और ये सुनिश्चित करेंगे की लोगों को आतंकवाद से जूझना नहीं पड़े. साथ ही CPI(M) ने पाकिस्तान को नसीहत भी दी है. पार्टी ने कहा है कि पाकिस्तान को अपनी सीमाओं के भीतर से आतंकवादी गतिविधियों को पूरी तरह से समाप्त करना होगा. 

वीडियो: सीजफायर तोड़ा, भारत-पाक के बीच अगले 24 घंटे कितने महत्वपूर्ण

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