चीन की सत्ताधारी पार्टी BJP के दफ्तर में, कांग्रेस ने पूछा- 'लद्दाख में अतिक्रमण, यहां गलबहियां'
BJP-China Meeting: जम्मू-कश्मीर की Shaksgam Valley में चीनी निर्माण की खबरों के बीच Congress ने China की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ BJP नेताओं की मीटिंग पर सवाल उठाए. इससे पहले BJP खुद चीन की पार्टी के साथ अपनी मीटिंग का खुलासा कर चुकी है.

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हेडक्वार्टर में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) के डेलिगेशन की बैठक हुई. सोमवार, 12 जनवरी को चीन की सरकार पर काबिज CPC के नेताओं के साथ BJP नेताओं की मीटिंग ऐसे समय पर हुई जब जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को लेकर भारत-चीन के बीच जबरदस्त तनातनी चल रही है. कांग्रेस ने दोनों पार्टियों की मुलाकात की आलोचना की और कई सवाल पूछ डाले.
मंगलवार, 13 जनवरी को कांग्रेस नेता और पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने BJP पर हमला बोला. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा पर चिंता जताते हुए BJP के सीनियर नेताओं की CPC डेलिगेशन के साथ मीटिंग पर निशाना साधा. सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि एक तरफ चीन भारत की जमीन को अपना बता रहा है, तो दूसरी तरफ दिल्ली में BJP चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से मिल रही है.
सुप्रिया श्रीनेत ने X पर लिखा,
"चीन ने जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम वैली को अपना इलाका कहा.
पिछले कई दिनों से CPEC के नाम पर चीन यहां कंस्ट्रक्शन कर रहा है.
लद्दाख के बाद अब चीन यहां तक कैसे घुस गया?
चीन इतनी हिमाकत कैसे कर रहा है?
उधर BJP नेताओं की चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मीटिंग हो रही हैं!"
कांग्रेस नेता ने इससे पहले BJP दफ्तर का एक फोटो पोस्ट करते हुए लिखा,
"यह फोटो BJP दफ्तर की है.
BJP के नेता और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के बीच मीटिंग हो रही है. ऑपरेशन सिंदूर में चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया. गलवान में हमारे जांबाजों की शहादत हुई. चीन लद्दाख में अतिक्रमण किए बैठा है. अरुणाचल प्रदेश में गांव बसा रहा है. और यहां गलबहियां चल रही है. मीडिया के चरणचुंबकों आज नहीं पूछोगे-
-यह रिश्ता क्या कहलाता है?
-BJP ने क्यों किया देशद्रोह?
-BJP-चीन में कौन सा गुप्त समझौता हुआ?"
कांग्रेस की आपत्ति पर BJP की कोई प्रतक्रिया नहीं आई है. हालांकि, BJP ने सोमवार को ही इस बातचीत का खुलासा कर दिया था. CPC डेलिगेशन की BJP के महासचिव और BJP हेडक्वार्टर इंचार्ज अरुण सिंह और पार्टी के विदेश मामलों के विभाग के इंचार्ज विजय चौथाईवाले के साथ बैठक हुई थी. उस बातचीत को 'नियमित आदान-प्रदान' का हिस्सा बताया गया था.
चौथाईवाले ने X पर लिखा था,
"चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल BJP हेड ऑफिस आया. इसकी अगुआई महामहिम सुन हैयान (वाइस मिनिस्टर, IDCPC) कर रही थीं. पार्टी के जनरल सेक्रेटरी अरुण सिंह जी की अगुआई में BJP के एक प्रतिनिधिमंडल ने BJP और CPC के बीच इंटर-पार्टी कम्युनिकेशन को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की. भारत में चीन के राजदूत महामहिम जू फेइहोंग भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल हुए."
अरुण सिंह ने भी लिखा था,
"इंटरनेशनल डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (IDCPC) की वाइस मिनिस्टर सुन हैयान आज (12 जनवरी 2026) BJP हेड ऑफिस आईं. मीटिंग के दौरान हमने BJP और CPC के बीच कम्युनिकेशन और बातचीत को कैसे बढ़ाया जाए, इस पर चर्चा की."
इस विवाद ने भारत-चीन संबंधों को लेकर पहले हुए राजनीतिक टकराव की यादें ताजा कर दी हैं. 2020 में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस को घेरा था. नड्डा ने उस समय कहा था,
"पहले कांग्रेस चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक MoU साइन करती है. फिर कांग्रेस चीन को जमीन सौंप देती है. डोकलाम मुद्दे के दौरान, राहुल गांधी चुपके से चीनी दूतावास जाते हैं. अहम स्थितियों में राहुल गांधी देश को बांटने और सेना का मनोबल गिराने की कोशिश करते हैं."
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, तब नड्डा ने आरोप लगाया था कि 2008 में कांग्रेस ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन करके 'राष्ट्रीय हित से समझौता' किया.
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