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चिदंबरम का आरोप- 'तमिलनाडु में बिहार के 6.5 लाख वोट जोड़ दिए', EC ने फैक्ट चेक कर दिया

Bihar में SIR का पहले फेज समाप्त हो गया है. Election Commission द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चला कि राज्य से स्थायी तौर पर बाहर रहने वाले लगभग 36 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं है. इसके बाद Tamilnadu के नेताओं ने दावा किया कि राज्य के वोटर लिस्ट में 6.5 लाख प्रवासी बिहारी वोटर जोड़े जा चुके हैं.

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4 अगस्त 2025 (पब्लिश्ड: 03:13 PM IST)
Election Commission Bihar sir p chidambaram
पी चिंदंबरम के आरोपों को चुनाव आयोग ने खारिज किया है. (इंडिया टुडे)
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बिहार में चल रहे SIR को लेकर तमिलनाडु में रार ठन गई है. DMK और उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर राज्य के वोटर लिस्ट में प्रवासी मजदूरों खासकर बिहार के मजदूरों को शामिल करने का आरोप लगाया है. कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इसे राज्य की इलेक्टोरल डेमोग्राफी बदलने की साजिश करार दिया है. लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भ्रामक और निराधार बताया है.

चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राजनीतिक नेताओं को चुनाव आयोग द्वारा आयोजित की गई SIR के बारे में गलत जानकारी फैलाने की कोई आवश्यकता नहीं है. चुनाव आयोग ने आगे बताया, 

 पता चला है कि SIR अभ्यास में बाधा डालने के उद्देश्य से मीडिया में जानबूझकर अफवाह फैलाया जा रहा है. SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही बिहार से स्थायी रूप से दूसरे राज्यों में बस जाने वालों के सटीक आंकड़े सामने आएंगे. यह वोटर्स पर निर्भर है कि वो आगे आएं और उस निर्वाचन क्षेत्र में अपना नाम रजिस्टर कराएं जहां वो पात्र हैं. लेकिन तमिलनाडु में वोटर्स के रजिस्ट्रेशन को लेकर गलत आंकड़े फैलाए जा रहे हैं. तमिलनाडु में अब तक SIR शुरू नहीं किया गया है. इसलिए बिहार में हो रहे SIR को वहां से जोड़ना बेतुका है. इस तरह के झूठे बयानों से बचना चाहिए.

चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(e) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 19 (b) का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति उस निर्वाचन क्षेत्र में वोटर बनने का हकदार है. जहां वह सामान्य तौर पर निवास करता है. यानी कोई व्यक्ति चेन्नई में स्थायी रूप से रह रहा है, तो वह वहां वोटर बन सकता है, चाहे उसका मूल राज्य बिहार ही क्यों न हो. 

विवाद की शरुआत कैसै हुई?

बिहार में SIR का पहले फेज समाप्त हो गया है. चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चला कि राज्य से स्थायी तौर पर बाहर रहने वाले लगभग 36 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं है. इसके बाद तमिलनाडु के नेताओं ने दावा किया कि राज्य के वोटर लिस्ट में 6.5 लाख प्रवासी बिहारी वोटर जोड़े जा चुके हैं. इन लोगों ने चुनाव आयोग पर राज्य की राजनीतिक डेमोग्राफी को बदलने का आरोप लगाया.

कांग्रेस नेता पी चिंदंबरम ने चुनाव आयोग पर अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, 

एक ओर बिहार में 65 लाख वोटर्स के मताधिकार खतरे में है. वहीं तमिलनाडु में 6.5 लाख लोगों को वोटर लिस्ट में जोड़ने की खबरें चिंताजनक है. उन्हें स्थायी प्रवासी कहना प्रवासी मजदूरों का अपमान है. और तमिलनाडु के वोटर्स की अपनी पसंद की सरकार चुनने के अधिकार में घोर हस्तक्षेप है. 

DMK के महासचिव और तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री दुरैमरुगन ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. वहीं DMK की सहयोगी पार्टी विदुथलाई चिरुथैगल काची ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से इस मुद्दे पर तुरंत एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया है.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: SIR में 61 लाख लोगों के 'वोट कटे', कैसे होगा बिहार चुनाव?

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