इलाज के नाम पर युवक का पैर काटा, मां-पत्नी को कई दिन कैद में रखा, प्राइवेट अस्पताल की करतूत
Munger के एक प्राइवेट हॉस्पिटल पर इलाज के नाम पर एक युवक से लाखों रुपये ऐंठने के आरोप लगे हैं. पूरे पैसे नहीं चुकाने पर अस्पताल प्रशासन ने युवक के परिजनों को बंधक बनाए रखा.

बिहार के मुंगेर से एक प्राइवेट हॉस्पिटल के मनमानी की बेहद क्रूर और दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है. अस्पताल पर सड़क हादसे में घायल युवक का इलाज पैर काटने और लाखों रुपये वसूलने के आरोप लगे हैं. यही नहीं आरोप है कि पैसे नहीं देने पर अस्पताल प्रबंधन ने 13 दिनों तक मरीज के परिजनों को बंधक बना कर भी रखा.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 नवंबर को लखीसराय जिले के रहने वाले महेश साव के बेटे टिंकू साव रोज की तरह साइकिल पर रखकर बर्तन बेचने निकले थे. रास्ते में एक गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी. इस हादसे में टिंकू गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय लोगों ने उन्हें इलाज के लिए मुंगेर के सदर अस्पताल में भर्ती कराया. यहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने कथित तौर पर उन्हें पटना रेफर कर दिया.
बिना परिवार के अनुमति के पैर काट दियाटिंकू साव के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने उन्हें पटना ले जाने की बात कही. लेकिन चार लोगों ने मिलकर टिंकू को एंबुलेंस में बिठाया और मुंगेर नेशनल हॉस्पिटल पहुंचा दिया जो कि एक निजी अस्पाल था. अस्पताल में इलाज शुरू हुआ और रात के 12 बजे टिंकू का दाहिना पैर काट दिया गया. टिंकू के मुताबिक, पैर काटने से पहले उन्हें इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया गया. पांच दिन बाद होश आने पर उन्हें इस बात की जानकारी मिली.
टिंकू का कहना है कि बाद में डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें अगर पटना ले जाया जाता तो उनके पैर का इलाज हो सकता था और पैर काटने की जरूरत नहीं पड़ती. उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ बिल बनाने के लिए उनका पैर काट कर उन्हें दिव्यांग बना दिया गया.
इलाज के नाम पर चार लाख वसूलेटिंकू के पिता महेश साहू का कहना है कि उनको जानकारी दिए बिना उनके बेटे का पैर काट दिया गया. उन्होंने बताया कि अस्पताल ने बेड चार्ज और डॉक्टर की फीस के नाम पर 1 लाख 59 हजार 700 रुपये लिए, वहीं दवा के नाम पर ढाई लाख रुपये वसूल कर लिए. कुल मिलाकर लगभग चार लाख रुपये.
महेश साव का कहना है कि उन्होंने चंदा इकट्ठा करके और कर्ज लेकर चार लाख रुपये चुकाए. लेकिन अस्पताल की डिमांड फिर बढ़ गई. उन्होंने 2 लाख 90 हजार और जमा करने की मांग कर दी. पैसे नहीं देने पर अस्पताल ने कभी टिंकू की मां तो कभी उनकी पत्नी को बंधक बना कर रखा.
चार लाख चुकाने के बाद फिर से पैसे की डिमांड करने के बाद महेश साव ने मुंगेर डीएम के पास आवेदन दिया. आवेदन पर एक्शन लेते हुए डीएम निखिल धनराज निप्पणीकर ने एडिशनल कलेक्टर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की. जांच टीम ने 7 दिसंबर को टिंकू को अस्पताल से मुक्त कराके सदर अस्पताल में भर्ती कराया.
मां और पत्नी को बंधक बना कर रखाटिंकू के पिता महेश साव का आरोप है कि नेशनल हॉस्पिटल ने उनके बेटे को छोड़ते समय जबरन उनसे, उनकी पत्नी और उनकी बहू से एक कागज पर दस्तखत और अंगूठा लगवा लिया. इस कागज पर लिखा था कि इलाज में कुल 3 लाख 68 हजार 700 रुपये खर्च हुए, जिसमें से उनके द्वारा 1 लाख 59 हजार सात सौ रुपये जमा किए गए और बाकी दो लाख 90 हजार रुपये अस्पताल प्रबंधन ने मानवीय आधार पर छोड़ दिया. उन्होंने मुंगेर जिला प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.
मुंगेर डीएम ने कार्रवाई का आश्वासन दियामुंगेर डीएम निखिल धनराज निप्पणीकर ने बताया कि 2 दिसंबर 2025 को आवेदन मिलने के बाद उन्होंने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत एक जांच टीम बनाई थी. जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट के आधार पर निजी अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने आगे बताया कि सदर अस्पताल के आसपास गलत गतिविधियों में शामिल लोगों को भी चिह्नित करके उन पर कार्रवाई की जाएगी.
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