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8 साल की बच्ची से रेप फिर मर्डर, जज ने कहा- तुम पर दया नहीं करनी, और दोनों को सुना दी मौत की सजा

Bihar Death Sentence: कोर्ट ने कहा कि इस अपराध में शामिल ये दोनों दोषी दया के पात्र नहीं हैं. दोनों को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई है.

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Bihar Death Sentence
कोर्ट ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है.
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रवि सुमन
1 जून 2025 (पब्लिश्ड: 02:01 PM IST)
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बिहार (Bihar) के मधुबनी जिले की स्थानीय अदालत ने दो लोगों को फांसी की सजा सुनाई है. दोनों ने 8 साल की एक बच्ची का अपहरण किया था. इसके बाद दोनों ने पीड़िता के साथ सामूहिक बालात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी. पीड़िता दलित समुदाय से थी. 

SC/ST मामलों के स्पेशल जज और ‘एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज’ सैयद मोहम्मद फजलुल बारी ने दोनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई है. दोषियों के नाम हैं, सुशील कुमार राय और ओम प्रकाश झा. कोर्ट ने इन पर 1.2-1.2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा,

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क्या है पूरा मामला?

मामला 22 जून, 2023 का है. मधुबनी के जयनगर थाना क्षेत्र में दोनों दोषियों ने अपराध को अंजाम दिया था. पीड़ित पक्ष की ओर से केस लड़ने वाले सरकारी वकील (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) सपन कुमार सिंह ने पत्रकारों से कहा,

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स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर सपन कुमार सिंह.
आजीवन कारावास की भी सजा मिली

कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट और SC/ST की कई धाराओं के तहत अपना फैसला सुनाया. अलग-अलग धाराओं में दोषियों को आजीवन कारवास की सजा भी सुनाई गई है और जुर्माना भी लगाया गया है. हालांकि, इन सबमें सबसे कठोर सजा मृत्युदंड की दी गई. भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302/34 के तहत ये फैसला सुनाया गया.

मामले में 20 महीनों के ट्रायल के बाद कोर्ट का फैसला आया है. सपन कुमार ने बताया कि 23 सितंबर, 2023 को ये मामला SC/ST स्पेशल कोर्ट के संज्ञान में आया. 20 लोगों की गवाही हुई. पीड़िता के परिजनों के अलावा, स्वतंत्र गवाहों ने भी अपने बयान दर्ज कराए. 18 नवंबर, 2024 को दोनों आरोपियों का बयान दर्ज किया गया.

बच्ची को दिल्ली में बेचने की तैयारी थी

सपन कुमार सिंह ने कहा,

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ये भी पढ़ें: बेटी का रेप किया, पत्नी-बच्चों की हत्या... इस अपराधी ने जेल में जो किया, फांसी की सजा खत्म हो गई?

कोर्ट का फैसला सुनते ही रोने लगे माता-पिता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुशील और ओम प्रकाश ने बच्ची को दिल्ली में बेचने के लिए किडनैप किया था. घटना वाले दिन सुशील नेपाल से शराब पीकर लौटा था. उसने बच्ची को देखा तो उसे 'आलू चिप्स' खिलाने का प्रलोभन दिया और अपने साथ ले गया. फिर ओम प्रकाश भी वहां आ गया. 

अपहरण के बाद दोनों ने दिल्ली वाले गिरोह से संपर्क किया. लेकिन उन्होंने ये कहकर बच्ची को खरीदने से इनकार कर दिया कि उसकी उम्र बहुत कम है. इसके बाद दोनों ने दूसरी योजना बनाई और सामूहिक दुष्कर्म किया.

बच्ची तब अपने घर पर अकेली थी. उसकी दादी भट्ठा में काम करने गई थीं और मां जलावन चुनने गई थीं. उसके पिता राजमिस्त्री के साथ लेबर का काम करने गए थे. 

कोर्ट ने 31 मई को जब अपना फैसला सुनाया तो पूरा अदालत परिसर लोगों से भरा हुआ था. कोर्ट के बाहर मृतका के परिजन भी मौजूद थे. उन्हें जैसे ही पता चला कि दोषियों को फांसी की सजा दी गई है, उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे. मृतका की दादी और उसके पिता एक-दूसरे को गले लगाकर रोने लगे.

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