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टेंडर नहीं मिला तो मीटिंग में अफसर को मार डाला, अब मास्टरमाइंड रामधीन यादव एनकाउंटर में ढेर

रामधनी यादव अपने 3-4 साथियों के साथ भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय पहुंचा. सीधे उस कमरे में गया, जहां सावन मेले के टेंडर को लेकर बैठक चल रही थी. अंदर पहुंचते ही रामधनी और उसके साथियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी.

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30 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 09:26 AM IST)
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इस हमले में कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार (बाएं) की मौत हो गई है. (फोटो: ITG)
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बिहार के भागलपुर जिले में 12 घंटे के अंदर एक हत्या और फिर पुलिस एनकाउंटर ने पूरे इलाके को हिला दिया है. 28 अप्रैल को सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में दिनदहाड़े फायरिंग हुई. इस हमले में कार्यपालक पदाधिकारी (Executive Officer) कृष्ण भूषण कुमार की मौत हो गई. वहीं, चेयरमैन राजकुमार गुड्डू गंभीर रूप से घायल हो गए. हमले का मुख्य आरोपी रामधनी यादव था, जिसे अगले ही दिन 29 अप्रैल को पुलिस एनकाउंटर में मार गिराया गया.

लेकिन यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं था. इसके पीछे टेंडर, राजनीतिक पकड़ और पुराने आपराधिक नेटवर्क की कहानी सामने आई है. 

ऑफिस में घुसकर की गई फायरिंग

आजतक से जुड़े रोहित कुमार सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक,  28 अप्रैल की शाम करीब 4 बजे रामधनी यादव अपने 3-4 साथियों के साथ सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय पहुंचा. बताया गया कि वह सीधे उस कमरे में गया, जहां सावन मेले के टेंडर को लेकर बैठक चल रही थी. बैठक में जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार, चेयरमैन राजकुमार गुड्डू और अन्य अधिकारी मौजूद थे. अंदर पहुंचते ही रामधनी और उसके साथियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी.

इस दौरान कृष्ण भूषण कुमार ने चेयरमैन राजकुमार गुड्डू को बचाने की कोशिश की. इसी बीच रामधनी ने उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई. राजकुमार गुड्डू के सिर में गोली लगी और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल रेफर किया गया.

मेले के टेंडर से जुड़ा था विवाद

यह पूरा मामला सुल्तानगंज से देवघर तक होने वाली कांवड़ यात्रा और सावन मेले के टेंडर से जुड़ा बताया जा रहा है. हर साल सावन में सुल्तानगंज से देवघर तक लगभग 108 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा होती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं. इसी यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं और मेले के इंतजाम के लिए बड़े टेंडर जारी किए जाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 28 अप्रैल को इसी टेंडर को लेकर बैठक चल रही थी.

पत्नी पर मास्टरमाइंड होने का आरोप

रामधनी यादव की पत्नी नीलम देवी सुल्तानगंज नगर परिषद की वाइस चेयरमैन हैं. वे साल 2020 में LJP के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकी हैं. जांच में सामने आया कि नीलम देवी और चेयरमैन राजकुमार गुड्डू के बीच लंबे समय से ठेकों के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था. आरोप है कि नीलम चाहती थीं कि इलाके के ज्यादातर टेंडर उनके पति रामधनी यादव को मिलें, लेकिन राजकुमार इसका विरोध कर रहे थे.

पुलिस का मानना है कि इसी विवाद ने हत्या की साजिश का रूप लिया. आरोप है कि नीलम देवी ने इस पूरे हमले की योजना बनाई और अपने दामाद को भी इसमें शामिल किया. हालांकि अब तक यह साफ नहीं है कि बैठक की जानकारी रामधनी तक कैसे पहुंची. लेकिन CCTV फुटेज से यह साफ हुआ कि वह पूरी तैयारी के साथ आया था और उसे बैठक की सही जगह और समय की जानकारी पहले से थी.

रामधनी का पुराना आपराधिक इतिहास

भागलपुर के SSP प्रमोद कुमार ने बताया कि रामधनी यादव का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. उसके खिलाफ कई हत्या समेत दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे. SSP के मुताबिक, एक पुराने मामले में उसने एक व्यक्ति का सिर धड़ से अलग कर दिया था और सिर लेकर थाने तक पहुंच गया था. इसी वजह से इलाके में उसका नाम लंबे समय से डर का कारण बना हुआ था.

पुलिस ने कहा कि इस हत्याकांड में रामधनी यादव का पूरा परिवार साजिश में शामिल था. अब तक परिवार के तीन लोगों समेत कुल 5 लोगों को हिरासत में लिया गया है.

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12 घंटे के अंदर कैसे हुआ एनकाउंटर?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि हमले के कुछ घंटों बाद ही रामधनी यादव पुलिस एनकाउंटर में कैसे मारा गया. पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद रामधनी और उसके साथियों ने हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार छिपा दिए थे. पूछताछ के बाद पुलिस रामधनी को उस जगह लेकर गई, जहां हथियार रखे गए थे. 

पुलिस का दावा है कि मौके पर पहुंचते ही रामधनी ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें रामधनी यादव मारा गया. इस मुठभेड़ में एक DSP समेत दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए.

तेजस्वी यादव ने साधा निशाना

इस घटना के बाद RJD नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारी की हत्या करने वाला रामधनी यादव बीजेपी से जुड़ा हुआ था और कई बड़े नेताओं के करीबी था. तेजस्वी ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए. हालांकि, इस मामले पर अब तक बिहार सरकार या बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है.

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