MP में क्या हो रहा? मरीज खांसी की दवा लेने सरकारी अस्पताल गया, शीशी में 'कीड़ा' कर रहा था 'जलक्रीड़ा'
कुछ समय पहले भी जेपी अस्पताल में एक मरीज को फफूंद लगी दवाइयां देने का आरोप लगा था.
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मध्यप्रदेश के भोपाल में जिला अस्पताल में सामने आए एक मामले ने स्वास्थ्य विभाग को सवालों के घेरे में ले लिया. अस्पताल में एक मरीज खांसी का इलाज कराने गया था, पर आरोप है कि जो माउथवॉश उसे दिया गया उसमें कीड़ा था. जबकि शीशी बिल्कुल सील बंद. हालांकि, माउथवॉश के अंदर कीड़ा ही था या कुछ और इस बात की पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है.
इंडिया टुडे के पत्रकार रवीश की रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के जेपी अस्पताल में एक मरीज खांसी की दवा लेने के लिए डॉक्टर के पास गया था. डॉक्टर ने उसकी जांच की और पर्चे पर दवाइयां लिख दी. जब वो मेडिकल काउंटर सेंटर पर पहुंचा, तो केमिस्ट ने उसे अन्य दवा के साथ Chlorhexidine mouthwash भी दिया. मगर जब मरीज ने वो माउथवॉश देखा, तो उसमें एक तैरता हुआ कीड़े जैसा कुछ मिला. जानकारी के लिए बता दें कि ये माउथवॉश मसूड़ों की सूजन और रेडनेस को ठीक करने के लिए दिया जाता है.
इस मामले पर भोपाल के चीफ मेडिकल और हेल्थ ऑफिसर (CMHO) मनीष शर्मा का कहना है,
“एक जांच समिति बनाई गई है. वो जांच करेगी तो पता चलेगा कि स्टोरेज में गड़बड़ी थी या बोतल में लीकेज था. ये भी देखा जाएगा कि माउथवॉश में जो पार्टिकल निकला है, वो क्या है.”
इससे कुछ समय पहले भी जेपी अस्पताल में फफूंद लगी दवाइयां देने का मामला सामने आया था. इस मामले पर CMHO ने कहा कि फफूंद वाली दवाइयों पर जो डिस्पैच नंबर था, वो हमारे पास था ही नहीं. जिस सीरीज की वो बात कर रहे हैं उस दवा का हमारे यहां 10 दिसंबर को स्टॉक खत्म हो गया था. टीम ने जांच किया तो इसके बारे में पता लगा.
इन सभी मामलों के बाद सरकारी अस्पताल में मेडिसिन स्टोरेज पर जांच करने के लिए एक टीम का गठन किया गया है. मनीष शर्मा का कहना है कि एक टीम बनाई गई है, जो जिला अस्पताल का निरीक्षण करेगी. दवाई स्टोरेज की व्यवस्था देखेगी.
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