The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Bhopal Barkatullah University seeks nod to be renamed as Vagdevi Bhojpal University

कौन थे बरकतउल्लाह भोपाली जिनके नाम की यूनिवर्सिटी कहलाएगी 'वाग्देवी भोजपाल'?

बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है. विश्वविद्यालय प्रशासन इसका नाम बदलने की तैयारी में है. यूनिवर्सिटी की एग्जिक्यूटिव काउंसिल ने संस्थान का नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय करने का प्रस्ताव पास करके राज्यपाल के पास भेज दिया है.

Advertisement
pic
pic
आनंद कुमार
| रवीश पाल सिंह
4 जून 2026 (अपडेटेड: 4 जून 2026, 10:11 PM IST)
Bhopal barkatullah university vagdevi bhojpal
बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने की तैयारी आगे बढ़ गई है. (इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने की प्रक्रिया एक कदम और आगे बढ़ गई है. यूनिवर्सिटी की एग्जिक्यूटिव काउंसिल ने 3 जून को संस्थान का नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. काउंसिल से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को राज्यपाल और चांसलर मंगुभाई पटेल के पास भेज दिया गया है.

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलेगा

एग्जिक्यूटिव काउंसिल के प्रस्ताव में राजा भोज के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान का जिक्र किया गया है. प्रस्ताव में बताया गया कि राजा भोज की तुलना में बरकतउल्लाह भोपाली के भोपाल का निवासी होने से ज्यादा इस क्षेत्र के लिए किसी तरह का योगदान नजर नहीं आता है. प्रस्ताव में ये भी कहा गया कि भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए विश्वविद्यालय का नाम वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय किया जाना ज्यादा उपयुक्त होगा.

विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश करना होगा

किसी भी सरकारी विश्वविद्यालय का नाम बदलने के लिए लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया होती है. सबसे पहले विश्वविद्यालय की एग्जिक्यूटिव काउंसिल में नाम बदलने का प्रस्ताव रखा जाता है. काउंसिल से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रस्ताव राज्य के उच्च शिक्षा विभाग और फिर सरकार के पास जाता है.

अधिकतर सरकारी विश्वविद्यालय राज्य सरकार के बनाए गए अधिनियमों के तहत संचालित होते हैं, इसलिए नाम बदलने के लिए उस कानून में संशोधन जरूरी है. इसके लिए विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश किया जाता है. विधानसभा से विधेयक पारित होने और राज्यपाल की मंजूरी के बाद सरकार गजट नोटिफिकेशन जारी करती है. गजट पब्लिश होते ही विश्वविद्यालय का नया नाम आधिकारिक तौर पर लागू हो जाता है. इसके बाद विश्वविद्यालय की वेबसाइट, डिग्री, सर्टिफिकेट, रिकॉर्ड और दूसरे सरकारी डॉक्यूमेंट्स में नया नाम अपडेट किया जाता है.

नाम बदलने का विरोध जारी

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की एग्जिक्यूटिव काउंसिल की सदस्य डॉ. ताहिरा अब्बासी ने इस फैसले का विरोध किया है. उन्होंने कहा,

 विश्वविद्यालय का मौजूदा नाम स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्लाह भोपाली की स्मृति से जुड़ा है, इसे बदला जाना उचित नहीं होगा. अगर नया नाम देना है तो किसी नए विश्वविद्यालय को दिया जाए.

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के सबसे पुराना सरकारी विश्वविद्यालयों में से एक है. पहले इसका नाम भोपाल विश्वविद्यालय था. साल 1988 में इसका नाम बदलकर बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय कर दिया गया. ये फैसला स्वतंत्रता आंदोलन में मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली के योगदान को सम्मान करने के लिए लिया गया था.

कौन थे बरकतउल्लाह भोपाली?

बरकतउल्लाह भोपाली का जन्म 1854 में भोपाल में हुआ था. वे भारत से बाहर रहकर आजादी की अलख जगाने वाले शुरुआती क्रांतिकारियों में से एक थे. बरकतउल्लाह गदर पार्टी के अहम सदस्य थे. उन्होंने जापान, अमेरिका, जर्मनी और अफगानिस्तान जैसे देशों में भारत की आजादी की मुहिम चलाई.

दिसंबर 1915 में भारतीय क्रांतिकारियों ने काबुल में भारत की अस्थायी सरकार का गठन किया था. राजा महेंद्र प्रताप को इस सरकार का राष्ट्रपति और बरकतउल्लाह भोपाली को प्रधानमंत्री बनाया गया था. यह सरकार विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए गठित की गई थी. साल 1927 में भारत की आजादी के लिए संघर्ष करते हुए बरकतुल्लाह ने सैन फ्रांसिस्को में आखिरी सांस ली.

वीडियो: VIT भोपाल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने प्रशासन पर क्या आरोप लगाए?

Advertisement

Advertisement

()