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बेंगलुरु में 2 लाख की साड़ी खरीदने के लिए सुबह 4 बजे से लगी लाइन, आखिर क्या है खासियत

साड़ी की दुकान के बाहर लाइन लगी है. लोग कुर्सी डाल कर बैठे हुए हैं.कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन के शोरूम के बाहर सुबह 4.00 बजे से लाइन लग जाती हैं ताकि 23 हजार रुपये से लेकर ढाई लाख तक की कीमत वाली Myspre Silk की साड़ियां खरीद सकें.

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bengaluru people line up for mysore silk saree at 4am viral video
मैसूर सिल्क की साड़ी के लिए लोग सुबह 4 बजे से लाइन में लगे हैं (PHOTO- X/ByRakeshSimha)
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मानस राज
21 जनवरी 2026 (Published: 02:24 PM IST)
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8 नवंबर 2016 की बात है. पीएम मोदी टीवी पर आए और नोटबंदी की घोषणा की. हमने देखा कि एटीएम पर तब लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लग गईं. लेकिन ये लाइन पैसे निकालने के लिए थे. एक और मौका हमें याद है जब जियो 4G का सिम कार्ड लेने के लिए लोग लंबी लाइन लगाए खड़े थे. और अब 2026 में बेंगलुरु का एक वीडियो वायरल हो रहा है. यहां कई लोग एक दुकानदार के बाहर लाइन में लगे हुए हैं. कुछ तो बकायदे कुर्सी लगा कर बैठे हैं. और ये लाइन एक खास तरह की साड़ी के लिए है. नाम है मैसूर सिल्क साड़ी. क्योंकि मैसूर का सिर्फ 'पाक' ही नहीं, सिल्क साड़ी भी फेमस है.

सोशल मीडिया पर राकेश कृष्णन सिम्हा नाम के यूजर ने एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में एक साड़ी की दुकान के बाहर लाइन लगी है. लोग कुर्सी डाल कर बैठे हुए हैं. वायरल पोस्ट में राकेश कृष्णन सिम्हा लिखते हैं कि महिलाएं कर्नाटक सोवियत (सॉरी सिल्क) इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन के शोरूम के बाहर सुबह 4.00 बजे से लाइन में लग जाती हैं ताकि 23 हजार रुपये से लेकर ढाई लाख तक की कीमत वाली सिल्क की साड़ियां खरीद सकें. हर ग्राहक को सिर्फ 1 साड़ी मिलती है और लाइन में लगने के लिए टोकन चाहिए होता है.

राकेश अपनी पोस्ट में आगे लिखते हैं,

असली मैसूर सिल्क साड़ियों की लगातार कमी चल रही है (सही कहें तो, सप्लाई में कमी है), खासकर उन साड़ियों की जो कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन बनाती है, जिसके पास प्योर मैसूर सिल्क साड़ियों के लिए ऑफिशियल प्रोडक्शन और GI-टैग वाले अधिकार हैं. यह 2025 में लगातार एक समस्या बनी हुई है, और 2026 में इसके समाधान का कोई साफ संकेत नहीं है. सबसे पहले, कॉर्पोरेशन के पास स्किल्ड बुनकरों और कारीगरों की संख्या सीमित है. उन्हें बेसिक महारत हासिल करने में भी 6-7 महीने लगते हैं.

राकेश बताते हैं कि प्रोडक्शन कॉर्पोरेशन के ट्रेंड वर्कफोर्स और सुविधाओं तक ही सीमित है, जिससे तेजी से प्रोडक्शन बढ़ाना मुश्किल हो गया है. सीजन पीक समय जैसे शादियां, वरलक्ष्मी पूजा, गौरी गणेश, दीपावली जैसे मौकों पर इन साड़ियों की शॉर्टेज हो जाती है. इसके अलावा राकेश सिल्क की क्वालिटी पर भी बात करते हैं, वो कहते हैं कि सोवियत संघ में भी जिंदगी ऐसी ही थी, जहां रोटी को छोड़कर लगभग हर चीज की कमी थी. लेकिन साथ ही राकेश कॉर्पोरेशन की तारीफ भी करते हैं. 

वो लिखते हैं कि कम से कम कॉर्पोरेशन द्वारा बनाई गई साड़ियों की प्रमाणिकता पक्की है. इसके उलट, प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां नकली या चीन में बने आर्टिफिशियल सिल्क से ग्राहकों को धोखा देने के लिए जानी जाती हैं. इसका उदाहरण तिरुपति में हुई घटना से मिलता है, जहां एक प्राइवेट ठेकेदार भक्तों को नकली सिल्क सप्लाई कर रहा था.

मैसूर सिल्क की है खासी डिमांड

जिस तरह बनारस की सिल्क की साड़ियां अपनी क्वालिटी और डिजाइन के लिए मशहूर हैं, उसी तरह मैसूर सिल्क भी काफी मशहूर है. असली मैसूर सिल्क साड़ियों की पहचान 100% शुद्ध शहतूत सिल्क (Mulberry Silk) और असली सोने और चांदी की जरी के इस्तेमाल से होती है. ये साड़ियां हल्की होती हैं और इनका मक्खन जैसा मुलायम टेक्सचर होता है. यही वजह है कि अब तक लोग लोग प्ले-स्टेशन, आईफोन और जियो सिम के लिए लाइन लगाते दिखे, और अब इस शानदार साड़ी के लिए भी लोग लाइन में लग रहे हैं.

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