The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Bengal government ban employees and officers from interacting to media

हमारी परमिशन के बिना मीडिया के पास नहीं जाने का, बंगाल सरकार का कर्मचारी-अधिकारियों को आदेश

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों पर मीडिया से बात करने को लेकर कई तरह की पाबंदियां लगाई है. सरकार के नए सर्कुलर के मुताबिक, सरकारी कर्मचारी अब बिना इजाजत के प्रेस से बात नहीं कर सकते, कोई लेख नहीं लिख सकते, मीडिया इवेंट में भाग नहीं ले सकते और केंद्र या राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना नहीं कर सकते.

Advertisement
pic
21 मई 2026 (पब्लिश्ड: 07:51 PM IST)
Bengal government ban employees and officers
चीफ सेक्रेट्री मनोज अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत पर बैन लगाने वाला सर्कुलर जारी किया है. (एक्स)
Quick AI Highlights
Click here to view more

बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर कई तरह के बैन लगाए हैं. इसमें बिना इजाजत के मीडिया से बातचीत करने, मीडिया के साथ ऑफिशियल डॉक्यूमेंट शेयर करने, मीडिया इवेंट और डिबेट में हिस्सा लेने या फिर पब्लिकली राज्य या केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करने पर रोक शामिल है.

बंगाल में सरकारी कर्मचारियों के मीडिया से बात करने पर रोक

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के चीफ सेक्रेट्री मनोज अग्रवाल ने एक सर्कुलर जारी करके इसकी जानकारी दी है. 19 मई को जारी इस सर्कुलर में पश्चिम बंगाल सिविल सर्विस, ऑल इंडिया सर्विसेज (AIS), पश्चिम बंगाल पुलिस सर्विस और दूसरे राज्य सरकार के दूसरे कर्मचारियों को कंट्रोल करने वाले मौजूदा नियमों के बारे में बताया गया है. सर्कुलर में अलग-अलग सर्विस रूल्स का हवाला देते हुए बताया गया है कि ये रूल्स सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों के लिए मीडिया के साथ बातचीत के नेचर और लिमिटेशन को डिफाइन करते हैं.

यह आदेश राज्य सरकार, ऑटोनोमस बॉडीज, बोर्ड्स, कॉरपोरेशन और सरकार से आर्थिक सहायता लेने वाले शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों पर लागू होगा. इस सर्कुलर में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी बिना इजाजत के मीडिया के साथ बातचीत या कोई डॉक्यूमेंट नहीं शेयर कर सकते, प्राइवेट या स्पॉन्सर्ड मीडिया इवेंट में भाग नहीं ले सकते. 

यही नहीं, कर्मचारी बिना इजाजत के किसी भी मीडिया संस्थान या पब्लिकेशन के लिए आर्टिकल नहीं लिख सकते. या फिर विजुअल मीडियम में डिबेट या किसी प्रोग्राम में नहीं जुड़ सकते हैं. सर्कुलर के मुताबिक, कर्मचारी किसी भी मीडियम (प्रिंट, डिजिटल, ब्रॉडकास्टिंग) से केंद्र या राज्य सरकार की नीतियों या फैसलों की सार्वजनिक तौर पर आलोचना नहीं कर सकते. साथ ही इसमें किसी भी तरह के मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी बात लिखने या बोलने से बचने को कहा गया है, जिससे राज्य और केंद्र सरकार या फिर किसी दूसरे राज्य की सरकार के साथ संबंधों में तनाव पैदा हो सकता हो. 

अभिषेक बनर्जी ने सर्कुलर पर उठाया सवाल

TMC के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुभेंदु सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार में खामोशी एक प्रशासनिक जरूरत बन गई है. अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर आगे लिखा, 

यह चौंकाने वाला सर्कुलर अनुशासन बनाए रखने के लिए नहीं है. यह अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाने और दिल्ली में बैठे आकाओं की हां में हां मिलाने कि लिए मौलिक अधिकारों का गला घोंटने वाला है.

राज्य सचिवालय 'नवान्न' से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में कई सरकारी कर्मचारियों द्वारा मीडिया में बयान देने और प्रशासनिक जानकारी बाहर आने की घटनाओं के बाद यह कदम उठाया गया है. राजनीतिक हलकों में इस फैसले को सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की मीडिया तक पहुंच पर कड़ी निगरानी के तौर पर देखा जा रहा है. 

वीडियो: पश्चिम बंगाल के आसनसोल में पत्थरबाजी क्यों हुई?

Advertisement

Advertisement

()