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पत्नी से अलग होने की खुशी में 9 किमी की दंडवत परिक्रमा, यूपी के लड़के के घुटने छिल गए

पत्नी को पाने के लिए पूजा-पाठ, व्रत, तपस्या के बारे में तो आपने सुना होगा लेकिन बस्ती में एक शख्स शादी के दो ही साल बाद अपनी पत्नी से परेशान हो गया. इतना परेशान कि पत्नी से अलग होने के लिए पौराणिक मंदिर में मन्नत मांगी कि पत्नी से अलग कर दो.

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30 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 10:46 PM IST)
Basti Man Takes Dandvat Yatr
शादी टूटने पर मंदिर तक दंडवत यात्रा की. (फोटो- India Today)
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साष्टांग का मतलब जानते हैं? यह किसी के प्रति श्रद्धा-सम्मान जताने की एक मुद्रा है. ‘सर्वोच्च सम्मान’ दिखाने के लिए 8 अंगों की मदद से साष्टांग प्रणाम किया जाता है. इसमें पेट के बल जमीन पर ऐसे लेटना होता है, जिससे शरीर के 8 अंग सिर, छाती, पेट, दोनों हाथ, दोनों घुटने और पैर जमीन को छुएं. इसी तरह से लेट-लेटकर एक परिक्रमा भी की जाती है. इसे साष्टांग दंडवत परिक्रमा कहा जाता है. यूपी के बस्ती में एक शख्स ने 9 किलोमीटर तक ऐसी ही परिक्रमा की क्योंकि उसकी मन्नत पूरी हो गई थी. सोचिए क्या मन्नत रही होगी. नौकरी, पैसा, जमीन या शादी? जवाब है- ‘शादी से आजादी’. 

ये कहानी है यूपी के बस्ती जिले के एक गांव की. इंडिया टुडे से जुड़े संतोष सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां के रहने वाले रवि सुबह-सुबह अपने घर से निकले. न पानी पिया और न खाना खाया. उन्हें बैड़वा माता के मंदिर जाना था. रवि को 9 किलोमीटर की यह दूरी पूरी करते-करते शाम के 6 बज गए. मंदिर तक वो न गाड़ी से गए न पैदल. वो लेट-लेटकर गए. साष्टांग परिक्रमा करते हुए. जब मंदिर पहुंचे तो उनका शरीर थकान से चूर था. घुटना लहूलुहान था. लेकिन चेहरे पर एक मनोकामना पूरी होने के बाद का जो संतोष होता है, वो साफ देखा जा सकता था. 

इस यात्रा में रवि अकेले नहीं थे. उनके साथ उनके माता-पिता भी थे. गांव के दर्जनों लोग भी उनके सहयात्री थे, जो गाजे-बाजे के साथ उनके पीछे-पीछे चल रहे थे. रवि की ये सारी कवायद इसलिए थी क्योंकि वो अपनी पत्नी से कानूनी तौर पर अलग हो गए थे. यही उनकी मनोकामना भी थी. 

रवि ने बताया कि दो साल पहले उनकी शादी हुई थी लेकिन पत्नी से कभी नहीं बनी. आए दिन घर में कलह होती. झगड़े बढ़ते जाते. रोज-रोज के झगड़े से परेशान होकर उन्होंने पत्नी से अलग होने का फैसला किया. उन्होंने पौराणिक मां बैड़वा मंदिर में मन्नत मांगी कि उन्हें पत्नी से अलग कर दें. अगर ऐसा हुआ तो वह साष्टांग दंडवत यात्रा करते हुए उनके मंदिर तक आएंगे. इसके कुछ दिन बाद उनकी मन्नत पूरी हो गई. वो कानूनी रूप से अपनी पत्नी से अलग हो गए. इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि मन्नत पूरी होने के बाद अब वो बैड़वा मंदिर में दंडवत यात्रा करते हुए जाएंगे.

रवि के इस कारनामे की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है. बातें हो रही हैं कि कैसे पहले पत्नी को पाने के लिए या दांपत्य को बचाए रखने के लिए व्रत-उपवास किए जाते थे. कहां अब पत्नी से अलग होने के लिए पति मंदिरों तक दंडवत परिक्रमा कर रहे हैं. 

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