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प्राचीन शिव मंदिर में नहीं घुसने दे रहे समिति वाले, 130 दलित परिवार अपना हक मांगने पर अड़ गए हैं

Kolkata के एक गांव के लगभग 130 से ज्यादा दलित परिवार एक स्थानीय शिव मंदिर में पूजा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनका आरोप है कि मंदिर समिति के लोग उन्हें मंदिर में घुसने नहीं देते. क्या है पूरा मामला?

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BANGAL kolkata Dalits are not allowed to enter the temple 130 families made the allegation right to worship
आरोप है कि मंदिर समिति के लोग दलित परिवारों को मंदिर में घुसने नहीं देते (फोटो: आजतक)
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अर्पित कटियार
8 मार्च 2025 (Updated: 8 मार्च 2025, 12:14 PM IST)
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कोलकाता से लगभग 150 किलोमीटर दूर ‘पूर्व बर्धमान’ जिले में एक गांव है- गिधाग्राम. इस गांव के लगभग 130 से ज्यादा दलित परिवार एक स्थानीय शिव मंदिर में पूजा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनका आरोप है कि मंदिर समिति के लोग उन्हें मंदिर में घुसने (Dalit Families Temple) नहीं देते. बताया जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर 28 फरवरी को एक बैठक हुई थी, जिसमें कहा गया था कि सभी को पूजा करने का अधिकार है. इसलिए पीड़ित परिवारों को गिधग्राम के गिधवार शिव मंदिर में पूजा करने की अनुमति दी जाएगी. लेकिन इस बैठक के बावजूद भी उन्हें पूजा करने का अधिकार नहीं मिला.

क्या है पूरा मामला?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे विवाद के केंद्र में गिधाग्राम गांव के दासपारा इलाके में बना एक शिव मंदिर है. जो लगभग 200 साल पुराना माना जाता है. मंदिर पर लगी पट्टिका पर लिखा है कि 1997 में इसका जीर्णोद्धार किया गया था. गिधाग्राम ग्राम पंचायत के उपप्रधान पुलक चंद्र कोनार ने अखबार को बताया,

लोग कहते हैं कि स्थानीय जमींदारों ने करीब 200 साल पहले इस मंदिर की स्थापना की थी. बाद में इसे चलाने के लिए एक समिति बनाई गई. दासपारा के लोग अनुसूचित जाति के हैं. उन्हें मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है. वे पूजा करना चाहते हैं, दूसरे लोग उन्हें अनुमति नहीं देते.

मीटिंग के बाद भी भेदभाव जारी

रिपोर्ट के मुताबिक, 24 फरवरी को शिवरात्रि से पहले, दासपारा के निवासियों ने खंड विकास अधिकारी (BDO), उप-विभागीय अधिकारी (SDO) और पुलिस को एक लेटर लिखा. ताकि उन्हें मंदिर में पूजा करने की परमिशन मिले. लेकिन फिर भी शिवरात्रि के दिन उन्हें मंदिर में नहीं घुसने दिया गया. इसके बाद 28 फरवरी को SDO ने गांव के निवासियों, मंदिर समिति के सदस्यों, विधायक, BDO और पुलिस के साथ एक मीटिंग बुलाई थी. जिसमें एक प्रस्ताव पारित किया गया और कहा गया,

हमारे संविधान के जरिए जातिगत भेदभाव पर रोक लगाई गई है. सभी को पूजा करने का अधिकार है. इसलिए दास परिवारों को गिधग्राम के गिधवार शिव मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी.

ये भी पढ़ें: कर्नाटक: मंदिर में पहली बार दलितों के प्रवेश के बाद गांव में तनाव, मूर्ति उठाकर ले गए लोग

‘वे 1800 से ज्यादा, हम सिर्फ 130…’

पीड़ित परिवारों ने बताया कि हर साल मंदिर में होने वाली पूजा के लिए वे लोग चंदा देते हैं. लेकिन इसके बावजूद उन्हें मंदिर में घुसने नहीं दिया जाता. दासपारा के रहने वाले लक्खी दास ने बताया कहा, 

हमें बताया गया था कि एक मार्च से हमारे समुदाय के दो सदस्यों को पुलिस सुरक्षा के साथ मंदिर में प्रवेश करने की परमिशन दी जाएगी. लेकिन 28 फरवरी की रात को पुलिस ने हमें बताया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ जाएगी इसलिए हम मंदिर नहीं जा सकते.

गांव के एक दूसरे निवासी सुकांत दास ने बताया,

हम उनसे लड़ नहीं सकते. गांव में 1,800 से ज्यादा परिवार हैं और हम सिर्फ 130 हैं. हम प्रशासन के कुछ करने और इस भेदभाव को खत्म करने का इंतजार कर रहे हैं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे. वक्त बदल गया है. हम अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर समिति के एक सदस्य राम प्रसाद चक्रवर्ती का कहना है कि गांव के बहुसंख्यकों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए. वहीं, मंदिर समिति का कहना है कि सदियों पुरानी परंपराओं को एक पल में नहीं तोड़ा जा सकता. 

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