पूछताछ में खुली राम मंदिर चढ़ावा चोरी की कहानी, अब दान की सुरक्षा के लिए चाक-चौबंद इंतजाम
Ayodhya Ram Mandir row: राम मंदिर चंदा चोरी मामले में पुलिस पूछताछ में कुछ नए तथ्य सामने आए हैं. जांच में पता चला है कि काउंटिंग रूम की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी. चोरी केवल एक ही शख्स करता था. CCTV से बचने के लिए कई पैंतरे आजमाए गए.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर करोड़ों रुपए की चोरी कबूल कर ली है. चोरी के लिए एक व्यवस्थित सिस्टम तैयार किया गया था. पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि आखिर ये खेल कैसे चलता था, पैसे कहां छिपाए जाते थे और बाद में उनका क्या किया जाता था? एक-एक कर आपको बताते हैं.
दरअसल, कोर्ट से परमीशन मिलने के बाद 30 जून को पुलिस टीम जेल पहुंची और करीब दो घंटे तक सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की. सबसे लंबी पूछताछ आरोपी अविनाश मिश्रा से हुई. पुलिस ये समझना चाहती थी कि कथित चोरी का पूरा नेटवर्क कैसे काम करता था, इसमें कौन-कौन शामिल था और चोरी की रकम आखिर कहां गई.
आरोपियों ने क्या बताया?सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि काउंटिंग रूम की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मचारियों के पास होती थी. आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर टिन्नू यादव और कुछ बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से चढ़ावे की रकम निकाली जाती थी.
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि चोरी करने वाला सिर्फ एक व्यक्ति होता था. बाकी लोग उसके चारों ओर घेरा बनाकर खड़े हो जाते थे, ताकि किसी सीसीटीवी कैमरे में हरकत रिकॉर्ड न हो सके. उनका दावा है कि उन्हें पहले से पता था कि कैमरे कहां लगे हैं और किस एंगल से रिकॉर्डिंग होती है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने कबूल किया है कि वे कैमरा एंगल जानने की वजह से सीधी नजर से बचकर चोरी करते थे.
आजतक से जुड़े समर्थ श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने बताया कि टिन्नू यादव की कथित मिलीभगत की वजह से किसी को उन पर शक नहीं होता था. चोरी के बाद रकम पहले बाथरूम में छिपाई जाती थी और मौका मिलने पर बाहर निकाल ली जाती थी. आरोपियों का ये भी दावा है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों के करीबी होने की वजह से उनकी रेगुलर चेकिंग नहीं होती थी, जिससे पैसे बाहर ले जाना आसान हो जाता था.
चोरी किए गए पैसे कहां गए?पूछताछ में मंदिर के कंट्रोल रूम का भी जिक्र हुआ, जहां से सभी सीसीटीवी कैमरों की निगरानी होती है. सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने दावा किया कि कैमरों की निगरानी करने वाले कर्मचारी सिर्फ औपचारिकता निभाते थे और लगातार स्क्रीन पर नजर नहीं रखते थे. इसी भरोसे के चलते वे बेखौफ होकर कथित चोरी करते रहे.
जब पुलिस ने पूछा कि चोरी की रकम का क्या किया गया, तो सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि पैसे जमीन और मकान खरीदने में लगाए गए. उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि मामला इतनी जल्दी सामने आ जाएगा.
पूछताछ के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का नाम भी सामने आया. हालांकि यहां एक बात साफ करना जरूरी है. सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने सिर्फ इतना कहा कि दान राशि की गिनती की प्रक्रिया में अनिल मिश्रा की प्रमुख भूमिका रहती थी.
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किसने लूटा दान पात्र?इस मामले की शुरुआत 25 जून को FIR दर्ज होने के साथ हुई थी. अगले दिन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले टिन्नू यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अविनाश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. अब कोर्ट की अनुमति के बाद पुलिस जेल में जाकर सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि पूरे मामले की हर कड़ी जोड़ी जा सके.
इस कथित चोरी के सामने आने के बाद राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था भी बदल दी गई है. अब पूरी काउंटिंग सीसीटीवी कैमरों की सख्त निगरानी में कराई जा रही है. कैमरों पर लगातार नजर रखने के लिए 12 अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है. काउंटिंग रूम में आने-जाने वाले हर कर्मचारी की कई स्तर पर तलाशी ली जा रही है. साथ ही ड्रेस कोड भी लागू किया गया है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की चूक न हो.
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