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राम मंदिर की दानपेटी से कैसे उड़ाते थे पैसे? हिडन कैमरे में सब दिख गया था

अधिकारियों ने हिडन कैमरे के हफ्तेभर के फुटेज को खंगाला. जिसके बाद मंदिर प्रशासन को पता चला कि कुछ कर्मचारियों ने जानबूझकर सीसीटीवी कैमरों के व्यू को ब्लॉक करने की कोशिश कर रहे थे. जबकि, उनके अन्य साथी तैयार किए गए नोटों को बंडलों को निकालकर अपने कपड़ों में छिपा लेते थे.

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प्रगति पांडे
| संतोष शर्मा
27 जून 2026 (पब्लिश्ड: 04:45 PM IST)
Ram Mandir
मंदिर में हिडन कैमरे ने पकड़ी 'चोरी'. (फोटो- इंडिया टुडे)
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अयोध्या के रामलला मंदिर में कथित चोरी और गबन की जांच तेजी से की जा रही है. जांच के दौरान अब हिडन कैमरा वाला एंगल भी सामने आया. दरअसल, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के अधिकारियों को दान में मिले कैश को जमा करने में कुछ गड़बड़ी का शक हुआ था. इसके बाद उन्होंने इसकी पड़ताल के लिए दान गिनने वाले कमरे में हिडन कैमरा लगा दिया. इस कैमरे में कथित तौर पर आरोपियों को दान में मिली चीजों के साथ ‘हेरफेर’ करते देखा गया.

रामलला मंदिर के दान चोरी और गबन के मामले में 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. जबकि, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य ने अनिल मिश्रा ने अपना पद छोड़ दिया है. इंडिया टुडे से जुड़े संतोष कुमार शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट के अधिकारियों ने हिडन कैमरे के रिकॉर्डिंग से पता किया कि दान की गिनती में शामिल कर्मचारी ‘घालमेल’ कर रहे हैं. रिकॉर्डिंग में देखा गया कि कर्मचारी उस वक्त दान के बक्सों से कैश और गहने निकाल लेते थे, जब उन्हें आधिकारिक तौर पर नहीं दर्ज किया गया होता था. 

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इस कथित गड़बड़ी के बारे में मई 2026 के आखिरी हफ्ते में पता चला, जब ट्रस्ट के अधिकारियों ने बैंक में जमा होने वाली रकम और दान के बक्सों के रिकॉर्ड का मेल किया.

नोटों के बंडलों में गड़बड़ी का शक

आमतौर पर मंदिर में लगे हर दान के बक्से के तकरीबन 7 से 8 लाख रुपये मिलते थे, लेकिन अधिकारियों ने कई हफ्तों तक नोटिस किया कि उनमें 500 को नोटों के बंडल में कमी है. इसी जगह से अधिकारियों को शक होना शुरू हुआ. इसके बाद ही अधिकारियों ने दान गिनने वाले कमरे में हिडन कैमरे लगाए गए. अधिकारियों ने हिडन कैमरे के हफ्ते भर की फुटेज को खंगाला. इसके बाद मंदिर प्रशासन को पता चला कि कुछ कर्मचारी जानबूझकर सीसीटीवी कैमरों के व्यू को ब्लॉक करने की कोशिश कर रहे थे. जबकि, उनके अन्य साथी तैयार किए गए नोटों को बंडलों से निकालकर अपने कपड़ों में छिपा लेते थे.

इसके अलावा भी अधिकारियों को चोरी के एक और तरीके के बारे में जानकारी हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन कर्मचारियों को कैश संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी, वो जानबूझकर नोटों के बंडलों में ज्यादा नोट डाल देते थे. क्योंकि, बैंक अक्सर सिर्फ बंडलों की संख्या की जांच करते थे. न कि हर नोट की. ऐसे में बढ़ी हुई गिनती के आधार पर ही वाउचर बना दिए जाते थे.

बैंक ले जाते समय 'हेरफेर'

आरोपी कर्मचारी कथित तौर पर कैश को बैंक ले जाते समय ही अलग से डाले गए नोटों को निकाल लेते थे. साथ ही यह भी तय करते थे कि जमा की गई रकम ऑफिशियल पेपर से मैच भी करे. गिरफ्तार हुए आरोपियों में से एक अनुकल्प मिश्रा दान के वाउचर तैयार करता था. उसने कथित तौर पर अपने जीजा लवकुश की मदद से यह धोखाधड़ी की. जांच के दौरान लवकुश के घर से कथित तौर पर 10 लाख रुपये कैश मिले थे. इसके अलावा जांच में भी सुरक्षा में कई कमियां पाई गई है. दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों की कोई भी तलाशी या जांच नहीं की जाती थी. कैश के अलावा भगवान राम को चढ़ाए गए गहनों में भी कथित ‘हेरफेर’ होने का आरोप है. 

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: राम मंदिर दान चोरी केस में SIT ने क्या खुलासा कर दिया?

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