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'योगी-मोदी का अपमान बर्दाश्त नहीं', एक और सरकारी अफसर ने इस्तीफा दिया, रोने भी लगे

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी के विरोध में अयोध्या में तैनात GST के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

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ayodhya gst commissioner Prashant kumar singh resigned
प्रशांत कुमार सिंह ने राज्यपाल को दो पन्नों की चिट्ठी के साथ इस्तीफा भेजा है (india today)
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राघवेंद्र शुक्ला
27 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 27 जनवरी 2026, 04:44 PM IST)
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अयोध्या संभाग में तैनात GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ पर जो विवादित 'औरंगजेब' वाली टिप्पणी की है, उससे वो तीन दिन से मानसिक तौर पर आहत थे. जनता के चुने गए प्रतिनिधि और प्रदेश के मुखिया का अपमान वह किसी भी हालत में स्वीकार नहीं कर सकते, इसलिए अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं. प्रशांत कुमार ने ये भी कहा कि जिस प्रदेश का वह नमक खाते हैं और जहां से पगार लेते हैं, उसका नेतृत्व करने वाले व्यक्ति के खिलाफ एक भी शब्द वह बर्दाश्त नहीं करेंगे.

हालांकि, शंकराचार्य और योगी आदित्यनाथ के बीच विवाद को लेकर ये पहला इस्तीफा नहीं है. इससे पहले बरेली के जिला मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी UGC नियमों और योगी द्वारा शंकराचार्य के अपमान का विरोध करते हुए सोमवार, 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया था. बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया.

इसी सिलसिले में अब प्रशांत कुमार सिंह का नाम भी जुड़ा है लेकिन इनका पक्ष दूसरा है. प्रशांत का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में उन्होंने ये फैसला लिया है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भेजे दो पन्नों के अपने इस्तीफे में प्रशांत ने लिखा, 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रदेश के मुखिया हैं और उनका अपमान मैं किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं कर सकता. जिस प्रदेश का मैं नमक खाता हूं, जहां से मुझे वेतन मिलता है, मैं उसी प्रदेश और उसके नेतृत्व का पक्षधर हूं.

पत्र में डिप्टी कमिश्नर ने आगे बताया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की टिप्पणी से वह पिछले तीन दिनों से मानसिक रूप से आहत महसूस कर रहे थे, जिसके चलते उन्होंने यह कठोर फैसला लिया. प्रशांत ने स्पष्ट किया कि यह इस्तीफा उन्होंने किसी के दबाव में नहीं बल्कि आत्मसम्मान और अपने विचारों के आधार पर दिया है.

प्रशांत कुमार सिंह की अयोध्या में पोस्टिंग साल 2023 में हुई थी. वह राज्यकर विभाग के संभागीय उपआयुक्त (डिप्टी कमिश्नर) के पद पर तैनात थे. उनका एक वीडियो भी वायरल है, जिसमें वह अपनी पत्नी से फोन पर बातें करते हुए रोते भी नजर आ रहे हैं.

अब जानते हैं कि प्रशांत सीएम योगी के किस अपमान की बात कर रहे हैं.

ये सारा विवाद शुरु हुआ प्रयागराज के माघ मेले से. यहां ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद शाही स्नान के लिए अपने शिष्यों के साथ पालकी पर बैठकर जा रहे थे. तभी प्रशासन ने संगम से पहले ही उन्हें पालकी से उतरकर पैदल जाने के लिए कह दिया. शंकराचार्य पालकी से ही जाने की जिद पर अड़ गए और ‘अपमान’ का हवाला देकर वहीं धरने पर बैठ गए. प्रशासन ने भी बात दिल पर ले ली. कुछ ही दिन बाद शंकराचार्य को खुद को शंकराचार्य साबित करने का नोटिस भेज दिया गया.

मामले ने और तूल पकड़ा जब एक कार्यक्रम में बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कथित तौर पर शंकराचार्य को 'कालनेमि' बता दिया. इससे विवाद भड़क गया. शंकराचार्य ने भी काशी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे जीर्णोद्धार कार्य पर कमेंट करते हुए योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘औरंगजेब’ बता दिया. उन्होंने कहा कि बचपन से उन्हें बताया गया है कि मूर्तियां तोड़ने वाला औरंगजेब था. मणिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़ के दौरान भगवान की मूर्तियां तोड़ी गईं और जब पता किया गया कि ये किसका काम है, तो मोदी-योगी का नाम सामने आया. ऐसे में वह उन्हें औरंगजेब ही कहेंगे.

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