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औरंगजेब की कब्र हटाने का मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा, याचिका में बताया ऐसा क्यों होना चाहिए?

बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें महाराष्ट्र में मुगल बादशाह औरंगजेब के मकबरे को ध्वस्त करने की मांग की गई है.

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Aurangzeb Tomb
औरंगजेब का मकबरा गिराने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर. (PTI)
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विद्या
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21 मार्च 2025 (पब्लिश्ड: 11:51 PM IST)
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मुगल बादशाह औरंगजेब का मकबरा गिराने का मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में पहुंचा है. इस सिलसिले में एक एक्टिविस्ट ने जनहित याचिका (PIL) दायर की है. याचिका में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर जिले के खुल्दाबाद में स्थित औरंगजेब की कब्र को गिराने की मांग की गई है. इस कब्र को लेकर पूरे महाराष्ट्र में विवाद चल रहा है.

इंडिया टुडे से जुड़ीं विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्टिविस्ट केतन तिरोडकर ने अदालत से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को औरंगजेब की कब्र को राष्ट्रीय स्मारकों की लिस्ट से हटाने का निर्देश देने की मांग की है. तिरोडकर ने अपनी याचिका में कहा कि ये जगह ASI एक्ट, 1958 की धारा 3 पर खरा नहीं उतरती है.

ASI एक्ट, 1958 की धारा 3 प्राचीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों को राष्ट्रीय महत्व का बताता है. एक्टिविस्ट का दावा है कि इस एक्ट के तहत औरंगजेब की कब्र को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा नहीं मिलना चाहिए. इसी आधार पर मुगल बादशाह का मकबरा हटाने की मांग की गई है.

औरंगजेब की कब्र 14वीं सदी के चिश्ती संत शेख जैनुद्दीन की दरगाह के परिसर में है. पास में ही औरंगजेब के बेटों में से एक हैदराबाद के पहले निजाम आसफ जाह प्रथम और उनके बेटे नासिर जंग की कब्रें हैं. याचिका में इन कब्रों को भी हटाने की मांग की गई है.

एडवोकेट राजाभाऊ चौधरी के जरिए इस याचिका को दायर किया गया है. याचिका में कहा गया कि राष्ट्रीय महत्व का मतलब किसी खास इलाके या ग्रुप के बजाय ऐसी चीज से है, जो पूरे देश के लिए कीमती हो. इसमें महत्व को पूरे देश पर प्रभाव डालने के तौर पर परिभाषित किया गया है. राष्ट्रीय महत्व के लिए तर्क दिया गया है कि यह प्रभाव ऐसा हो, जिसे भावी पीढ़ियां सकारात्मक तरीके से समझ सकें.

याचिका में कहा गया है कि यह तथ्य कि औरंगजेब का मकबरा एक राष्ट्रीय स्मारक है, जो राष्ट्रीय महत्व को दर्शाता है, मगर ये अपने आप में आत्म-अपमान है. हमने भारत में चंगेज खान, मोहम्मद गौरी या राजा सिकंदर जैसी हस्तियों के लिए कभी स्मारक नहीं बनाए हैं. अदालत उचित समय पर इस याचिका पर सुनवाई करेगी.

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