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अतुल सुभाष की मां ने पोते की कस्टडी मांगी थी, सोचा नहीं होगा सुप्रीम कोर्ट ये कह देगा

Supreme Court ने सुनवाई के दौरान कहा कि Atul Subhash की पत्नी Nikita Singhania को दोषी ना कहा जाए. क्योंकि ये मामला अभी कोर्ट में साबित नहीं हुआ है.

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Atul Sabhash and His Mother
अतुल सुभाष और उनकी मां. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
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सृष्टि ओझा
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7 जनवरी 2025 (Updated: 8 जनवरी 2025, 09:19 AM IST)
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बेंगलुरु के इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद उनकी मां ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. उन्होंने अपने साढ़े 4 साल के पोते की कस्टडी (Atul Subhash Son Custody) मांगी थी. 7 जनवरी को इस मामले में सुनवाई की गई. कोर्ट ने फिलहाल अतुल की मां अंजू मोदी को अंतरिम राहत नहीं दी है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि दादी, बच्चे के लिए अजनबी की तरह हैं. 20 जनवरी को इस मामले में अगली सुनवाई होगी.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने ये भी कहा कि जब तक कोर्ट में साबित नहीं हो जाता, तब तक अतुल की पत्नी को दोषी ना कहा जाए. अंजू मोदी ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं दी जा रही है कि उनका पोता कहां है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया के वकील से भी यही पूछा. जिसके जवाब में वकील ने बताया कि बच्चा उनकी कस्टडी में है. इसके बाद कोर्ट ने पूछा कि वो कितने साल का है? किस स्कूल में है? साथ ही न्यायालय ने बच्चे को कोर्ट में पेश करने और मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण का होने की बात भी की. कोर्ट ने ये भी कहा कि इन सवालों के जवाब रिकॉर्ड में दर्ज हों.  

आपकी सुविधा के लिए बता दें कि बंदी प्रत्यक्षीकरण का मतलब है, किसी की कस्टडी की वैधता पर सवाल उठाना.

अतुल की मां ने क्या कहा?

अंजू मोदी की ओर से पेश हुए वकील ने कोर्ट से कहा कि उन्हें बच्चे से मिलने की अनुमति दी जाए. इस पर कोर्ट ने जवाब दिया,

“बच्चे को परेशान ना करें.”

ये भी पढ़ें: अतुल सुभाष सुसाइड केस: पत्नी निकिता सिंघानिया समेत इन तीन लोगों को मिली जमानत

इसके बाद बेंच ने पूछा कि दादी और बच्चे की मुलाकात आखिरी बार कब हुई थी. इस पर उनके वकील ने कहा कि बच्चा जब ढाई साल का था तभी उनकी मुलाकात हुई थी. इस पर कोर्ट का कहना था कि बच्चा अपनी दादी को बिल्कुल नहीं जानता. बेंच ने कहा,

“आप बच्चे के लिए लगभग अजनबी हैं. देखा जाए तो आप दोनों का परिचय ही नहीं है.”

अतुल की मां की ओर से कहा गया कि उन्होंने बच्चे के साथ समय बिताया है. इस पर कोर्ट ने कहा,

“आप चाहें तो जाकर उससे मिल सकती हैं. लेकिन ये उम्मीद ना करें कि बच्चा आपके साथ सहज रहेगा. बच्चे को माता-पिता के साथ रहना होगा. अगर दोनों नहीं हैं तो कम से कम दोनो में से कोई एक.”

इस पर अंजू मोदी के वकील ने कहा,

“तब ​​नहीं जब एक पैरेंट दूसरे पैरेंट की मौत का दोषी हो.”

इसके बाद बेंच ने कहा,

“अभी नहीं. ये मीडिया ट्रायल नहीं है. ये कोर्ट ट्रायल है और यहीं किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जा सकता है.”

कोर्ट ने ये रिकॉर्ड किया कि बच्चा अपनी मां की कस्टडी में है. जमानत की शर्तों का पालन करने के लिए उसे मां के साथ बेंगलुरु ले जाया जाएगा. 

कोर्ट ने Nikita Singhania को जमानत दी

4 जनवरी को इस मामले में बेंगलुरु की एक अदालत ने निकिता सिंघानिया, उनकी मां निशा सिंघानिया और भाई अनुराग सिंघानिया को जमानत दे दी थी. बेंगलुरु पुलिस ने तीनों को 14 दिसंबर को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया था. हालांकि, कर्नाटक हाई कोर्ट ने निकिता सिंघानिया के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया.

34 साल के अतुल ने 9 दिसंबर को बेंगलुरु में आत्महत्या कर ली थी. उन्होंने अपनी पत्नी और उनके परिवार पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इन आरोपों को लेकर उन्होंने 24 पन्नों का एक सुसाइड नोट लिखा था और एक लंबा वीडियो भी रिकॉर्ड किया था.

वीडियो: अतुल सुभाष केस में आरोपियों की मिली जमानत, कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

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