दलित दुल्हन की बिंदोली रोक घोड़ी से उतारा था, विरोध में फुले की फोटो लेकर जुलूस निकाल दिया
पूजा मेघवाल नाम की एक लड़की की बिंदोली यात्रा को कुछ लोगों ने रोक लिया. उसके गांव के लोगों ने कथित तौर पर इस बात पर आपत्ति जताई कि एक 'दलित' होने के बावजूद वह घोड़ी पर सवार थी.

देश को आजाद हुए 8 दशक होने को हैं. लेकिन आज भी भारत में जाति, धर्म, पहचान के आधार पर इंसान के साथ भेदभाव जारी है. ऐसा ही एक मामला राजस्थान के उदयपुर से सामने आया है. 29 अप्रैल को यहां पूजा मेघवाल नाम की एक लड़की की बिंदोली यात्रा को कुछ लोगों ने रोक लिया. बिंदोली राजस्थान की एक पारंपरिक रस्म है. इसमें शादी से एक या दो दिन पहले दूल्हा या दुल्हन को गाजे-बाजे के साथ गांव या शहर में घोड़ी पर बैठाकर घुमाया जाता है.
पूजा यही बिंदोली की रस्म निभा रही थीं. गांव के लोगों ने कथित तौर पर आपत्ति जताई कि एक 'दलित' होने के बावजूद वह घोड़ी पर सवार क्यों थीं? आरोप है कि गांव के लोगों ने पूजा को घोड़ी पर से नीचे भी उतार दिया. पूजा की बिंदोली यात्रा पर हमले भी हुए, जिसमें कई लोग घायल हो गए. इसके बाद एक FIR दर्ज की गई.
हालांकि, इसके बाद जो हुआ वो बड़ी बात थी. पूजा ने 8 दिन बाद एक प्रतीकात्मक बिंदोली निकाली, जिसमें वो एक सफेद घोड़ी पर सवार थीं. उसके चारों ओर फिरोजी और नीले रंग की पताका लहरा रही थी. उनके सिर के ऊपर लाल और गोल्डन कलर की एक छतरी थी. इसके अलावा उनके हाथों में थी, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की एक तस्वीर.
इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है. रिपोर्ट के मुताबिक, उदयपुर के टाउन हॉल से कलेक्ट्रेट तक की इस यात्रा में पूजा के चारों ओर लोगों का एक विशाल जनसमूह चल रहा था. इनमें से अधिकतर लोगों ने अपने शरीर के ऊपरी हिस्से पर सफेद कपड़े पहने थे. उनके गले में नीले रंग का स्कार्फ और हाथों में नीले रंग का झंडा या नीले रंग का पोस्टर (प्लेकार्ड जैसे) था. इन झंडों पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें बनी हुई थीं. वहीं पोस्टरों पर 'जय भीम' लिखा था. पूजा के परिवार के सदस्य भी इस यात्रा में शामिल थे. पूजा के पिता भैरूलाल मेघवाल ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया,
भीम आर्मी ने किया यात्रा का नेतृत्वहम यह दिखाना चाहते थे कि हम भी इंसान हैं. हम भी आपकी ही तरह भारत के नागरिक हैं. आजादी को लगभग 80 साल बीत चुके हैं. फिर भी कुछ लोगों की मानसिकता में छुआछूत को लेकर सोच अभी भी बनी हुई है. यहां के ऊंची जाति के लोग नहीं चाहते कि हम घोड़ी पर बैठें. सिर्फ इसलिए कि हम दलित हैं. मेवाड़ इलाके में दलितों के साथ ऐसा होता रहता है. इसलिए, हमने प्रशासन को एक मेमोरेंडम दिया है.
7 मई को निकाली गई इस शोभायात्रा का नेतृत्व 'भीम आर्मी' ने किया था, जिसमें कुछ और संगठन भी शामिल हुए थे. वहीं भीम आर्मी उदयपुर के वाइस प्रेसिडेंट रोशन मेघवाल ने कहा कि ये सावित्रिबाई फुले की देन है कि महिलाओं को हर सेक्टर में बराबर के अधिकार हैं. अगर ऐसा है तो उन्हें घोड़ी चढ़ने से क्यों रोका जा रहा है. रोशन कहते हैं,
आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्जहम सरकार और देश को यह बताना चाहते थे कि जब मान-सम्मान की बात आती है तो हिचकिचाने या डरने की कोई जरूरत नहीं है. देश 'अमृत काल' मना रहा है, लेकिन दलितों को घोड़ी पर चढ़ने से रोका जा रहा है और उन्हें नीचे उतारा जा रहा है. यह एक लोकतांत्रिक देश है और यहां हर किसी को जीने का समान अधिकार है.
पूजा के पिता भैरूलाल ने इस मामले शिकायत की है. इसमें बताया गया कि 29 अप्रैल को उनकी बिंदोली का जुलूस डबोक थाना क्षेत्र के हरियाव में धीरा तलाई की मेन रोड से गुजर रहा था. तभी उनके जुलूस को रोक लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि जुलूस को जातिसूचक गालियां दी गईं. साथ ही उन्हें धमकी दी गई कि वे अपने घर के सामने से जुलूस हटा लें, वरना खून-खराबा हो जाएगा.
पूजा के पिता ने आरोप लगाया कि इसके बाद झगड़ा शुरू हो गया. DJ बंद करवा दिया गया. दुल्हन को घोड़ी से नीचे खींच लिया गया और मेहमानों पर पत्थर भी फेंके गए. साथ आए दूसरे परिवार की महिलाओं और बच्चों ने भी पत्थर फेंके और जुलूस पर लाठियों, रॉड और तलवारों से हमला किया गया. उन्होंने बताया कि इस अफरा-तफरी में कम से कम दो महिलाओं के मंगलसूत्र छीन लिए गए. इसके अलावा लोगों की अन्य कीमती चीजें भी लूटी गईं जिनमें गहने और घड़ियां भी गुम हो गईं.
इस दौरान उनमें से कई लोगों को चोटें भी आईं. FIR में स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, गलत तरीके से रोकना और गैर-कानूनी तरीके से जमावड़ा करना शामिल है. साथ ही इसमें SC/ST एक्ट की कई धाराएं भी जोड़ी गई हैं. यह FIR भाई-बहन लक्ष्मण सिंह, मधु सिंह, किशन सिंह, उदय सिंह और अर्जुन सिंह के साथ-साथ तखत सिंह, फतेह सिंह, विक्रम सिंह और मंजू कुंवर के खिलाफ दर्ज की गई है.
सांकेतिक बिंदोली के बाद भीम आर्मी ने एक ज्ञापन सौंपा और कहा कि अब तक केवल चार लोगों को ही गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने यह भी दावा किया किक तखत सिंह ने तलवार से हमला किया था, इसलिए FIR में आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ी जानी चाहिए. साथ ही उन्होंने कई अन्य पुरुषों और महिलाओं के नाम भी गिनाए, जो कथित तौर पर इस हमले में शामिल थे, लेकिन जिनके नाम FIR में दर्ज नहीं किए गए हैं.
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