एक सड़क हादसे के बाद कोकराझार क्यों हिंसा की आग में जल उठा? इंटरनेट तक बंद है
तनाव मुख्य रूप से पश्चिमी असम के कोकराझार जिले के करिगांव इलाके में फैला. यह बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन का हिस्सा है. विवाद 19 जनवरी की रात उस समय शुरू हुआ, जब बोडो समुदाय के तीन लोगों को ले जा रही एक गाड़ी ने आदिवासी समुदाय के दो लोगों को टक्कर मार दी.

असम के कोकराझार में एक सड़क हादसे के बाद सांप्रदायिक तनाव फैल गया जिसके बाद भारी हिंसा देखने को मिली. हालात को काबू में रखने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात किया गया. हालात ये हो गए कि राज्य सरकार ने जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं.
तनाव मुख्य रूप से पश्चिमी असम के कोकराझार जिले के करिगांव इलाके में फैला. यह बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन का हिस्सा है. विवाद 19 जनवरी की रात उस समय शुरू हुआ, जब बोडो समुदाय के तीन लोगों को ले जा रही एक गाड़ी ने आदिवासी समुदाय के दो लोगों को टक्कर मार दी. इंडियन एक्सप्रेस ने असम पुलिस के IG (लॉ एंड ऑर्डर) अखिलेश सिंह के हवाले से लिखा कि जैसे ही वाहन ने उन दो लोगों को टक्कर मारी, वहां मौजूद अन्य लोग गाड़ी में बैठे लोगों पर हमला करने लगे.
इस हिंसा में सिखना झ्वह्वलाओ बिस्मित नाम के एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग कोकराझार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इलाज करा रहे हैं. कोकराझार के पुलिस अधीक्षक अखत गर्ग ने बताया कि रात में ही 19 लोगों को हिरासत में लिया गया और जांच शुरू कर दी गई. उन्होंने कहा कि पुलिस लोगों को समझाने की कोशिश कर रही है कि वे कानून अपने हाथ में न लें.
इस सब के बाद 20 जनवरी को दोनों समुदायों के बीच तनाव और बढ़ गया. लोगों ने करिगांव पुलिस चौकी के पास से गुजरने वाले नेशनल हाईवे को जाम कर दिया, सड़क पर टायर जलाए, कुछ घरों में आग लगा दी, एक दफ्तर की इमारत को भी आग के हवाले कर दिया और पुलिस चौकी पर हमला करने की कोशिश की. IGP (लॉ एंड ऑर्डर) ने कहा कि मंगलवार को दोनों पक्षों के समूह आपस में भिड़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पत्थरबाजी करने वालों को रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.
इस बीच प्रशासन ने पूरे कोकराझार जिले में अगले आदेश तक मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाने का आदेश जारी किया. विभाग ने कहा कि आशंका है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट का इस्तेमाल भड़काऊ संदेश और अफवाहें फैलाने के लिए किया जा सकता है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शांति की अपील करते हुए बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के प्रमुख हग्राम मोहिलारी ने आरोप लगाया कि किसी “तीसरे पक्ष” ने हालात को बिगाड़ने और राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि यहां कुछ गलतफहमियां हुई हैं और कोई तीसरा पक्ष इस स्थिति का फायदा उठाकर इसे राजनीतिक रंग देना चाहता है, जिसे बढ़ावा नहीं दिया जा सकता. उन्होंने बोडो और आदिवासी समुदाय दोनों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि दोनों इसी क्षेत्र के लोग हैं और उन्हें साथ मिलकर रहना है.
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी शांति की अपील की. उन्होंने समाज के प्रमुख लोगों और राजनीतिक नेताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सभी लोग मिलकर जल्द से जल्द शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में सरकार की मदद करें.
रिपोर्ट के मुताबिक एक अलग आदेश के जरिए सरकार ने कोकराझार से सटे बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन के चिरांग जिले में भी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं. आदेश में कहा गया है कि कोकराझार की घटना का असर आसपास के जिलों में तेजी से फैल रहा है और वहां भी कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है.
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