अमरनाथ यात्रा में कितना कूड़ा फैलाते हैं तीर्थयात्री? सफाई करने वाली कंपनी ने सब बताया
Amarnath Yatra 2026: यात्रा के दौरान कई यात्री कचरे को मार्ग में ही फेंक कर चले जाते हैं. ऐसे में कचरे का प्रबंधन करने वाली कंपनी हर साल सैकड़ों टन कचरा इकट्ठा करती है, जिसका अलग-अलग ढंग से निस्तारण किया जाता है.

हर साल अमरनाथ गुफा में दर्शन के लिए लाखों तीर्थयात्री पहुंचते हैं. कैंप से गुफा तक आने-जाने में करीब 3 दिन का समय लगता है. इस दौरान लोगों के मन में होती है श्रद्धा-भक्ति. और हाथ में होती हैं खाने-पीने की चीजें और उनके पैकेट. इन्हें वे बेधड़क यात्रा मार्ग पर फेंकते हुए जाते हैं. अगर आप इसे ‘एक पन्नी या कागज ही तो है’ समझने की भूल कर रहे हैं तो आप भी कूड़ा फैलाने वाली मानसिकता के व्यक्ति हो सकते हैं. क्योंकि यही एक-एक कागज या पन्नी इकट्ठा होकर कई टन गंदे-बदबूदार कूड़े में तब्दील हो रहा है.
अमरनाथ यात्रा के दौरान हर तीर्थयात्री करीब 1 किलोग्राम कचरा छोड़कर जाता है. ऐसा दावा हम नहीं कर रहे, बल्कि, यात्रा मार्ग में कचरे का प्रबंधन करने वाली कंपनी कर रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमरनाथ यात्रा में कचरे के प्रबंधन की जिम्मेदारी इंदौर बेस्ड कंपनी ‘स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट’ करती है. कंपनी साल 2022 से यात्रा के दौरान होने वाले कचरे के प्रबंधन कर रही है.
पिछले साल हुई अमरनाथ यात्रा के दौरान करीब 5 लाख दर्शनार्थियों ने यात्रा की. रिपोर्ट के मुताबिक दो महीने की यात्रा के दौरान कंपनी ने पहाड़ों से करीब 400 टन कचरा इकट्ठा किया था. कंपनी को इस कचरे को पहाड़ से जमीन पर लाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. इसके लिए उन्हें हजारों सफाई कर्मियों और घोड़ों की मदद लेनी पड़ी थी.
3 जुलाई 2026 से अमरनाथ यात्रा शुरू होने वाली है, जो 28 अगस्त तक चलेगी. इससे पहले ही कंपनी के हाथ-पांव फूल रहे होंगे. इसलिए वो यात्रियों को कम कचरा फैलाने के लिए मोटिवेट करने का प्लान बना रही है. प्लान के जरिए कंपनी यात्रियों को ऐसी चीजें इस्तेमाल करने के लिए मोटिवेट करना चाहती है, जिसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सके. यानी खाने-पीने के बर्तन, कपड़े वाले बैग आदि.

पुरानी प्रथा पर लौटना होगा
कंपनी के को-फाउंडर समीर शर्मा ने अखबार से अपने प्लान के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि अगर सभी यात्री पुरानी प्रथा पर लौट आएं, तो यात्रा मार्ग में होने वाले कचरे को कम करने में मदद मिल सकती है. यहां पुरानी प्रथा से मतलब स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करने से है.
कंपनी कचरे को पहाड़ों, ट्रैकिंग के रास्तों और कैंपों से इकठ्ठा करती है. स्वाहा कंपनी ने अपने डाटा के बारे में अखबार को जानकारी दी. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 में कंपनी ने करीब 550 टन, 2023 में 470 टन, 2024 में 520 टन और साल 2025 में करीब 400 टन कचरा इकट्ठा किया.
कचरे का निस्तारण कैसे होता है?
कंपनी इन कचरों को पहले अलग-अलग बांटती है. इसके बाद अलग-अलग कचरे का उसकी किस्म या कैटेगरी के हिसाब से उसका निस्तारण किया जाता है. जैसे कुछ कचरे से खाद बनाई जाती है, जिसे इलाके के किसानों को दिया जाता है. जबकि, कुछ को रीसाइकल किया जाता है. कंपनी यात्रा के दौरान पानी की बोतलों और पैकेट्स के इस्तेमाल को कम करने के लिए मार्ग में वॉटर ATM या वॉटर कूलर लगाने का भी प्लान कर रही है.
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