बुजुर्ग मां की सांसें धीमी हुईं, परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली, फिर...
घटना अजबगढ़ के रामजी का ग्वाडा गांव की है. बुजुर्ग महिला का नाम चमेली देवी है. उनकी उम्र करीब 65 साल है. इंडिया टुडे से जुड़े हिमांशु शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 मई की रात अचानक चमेली देवी की तबीयत खराब हो गई. उनकी सांसें धीमी पड़ गईं और शरीर में कोई हरकत भी नहीं हो रही थी. इसके बाद घर वालों ने उन्हें मृत मान लिया.

राजस्थान के अलवर में एक बुजुर्ग महिला के घर वाले उन्हें मरा हुआ मानकर अंतिम संस्कार की तैयारियां करने में लगे थे. रिश्तेदारों को भी मौत की सूचना दे दी गई. लेकिन अंतिम संस्कार के ऐन पहले कथित मृत महिला के शरीर में मूवमेंट देखी गई. इसके बाद परिजन फौरन उन्हें जिला अस्पताल ले गए. जहां, डॉक्टर ने बताया कि महिला की सांसें चल रही हैं. बुजुर्ग की तबीयत अब स्थिर बताई जा रही है. उन्हें इस वक्त ICU में रखा गया है.
घटना अजबगढ़ के रामजी का ग्वाडा गांव की है. बुजुर्ग महिला का नाम चमेली देवी है. उनकी उम्र करीब 65 साल है. इंडिया टुडे से जुड़े हिमांशु शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 मई की रात अचानक चमेली देवी की तबीयत खराब हो गई. उनकी सांसें धीमी पड़ गईं और शरीर में कोई हरकत भी नहीं हो रही थी. इसके बाद घर वालों ने उन्हें मृत मान लिया.
परिजनों ने बुजुर्ग की मौत की सूचना अपने रिश्तेदारों को भी दे दी. अगले दिन सुबह घर में चमेली देवी के अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं. लेकिन तभी महिला के पैरों में हरकत हुई. पहले किसी ने ध्यान नहीं दिया. लेकिन दोबारा शरीर में मूवमेंट होने पर घर वाले हैरान रह गए.
महिला के जिंदा होने की उम्मीद पर घर वाले आनन-फानन में उन्हें दौसा जिला अस्पताल ले गए. जहां Principal Medical Officer (PMO) डॉ. आर.के. मीणा की देखरेख में उनका इलाज शुरू हुआ. महिला को ICU में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है. डॉ. का कहना है कि उनकी सेहत में पहले से काफी सुधार है.
डॉ. मीणा ने महिला की तबीयत के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा,
'महिला की सांसें बेहद धीमी हो गई थीं, जिसके कारण उन्हें मृत समझ लिया गया. अस्पताल में सीटी स्कैन सहित अन्य जांच करवाई गई हैं. सीटी स्कैन रिपोर्ट सामान्य आई है. लेकिन ब्लड में इंफेक्शन की शिकायत है.'
डॉक्टरों के मुताबिक, बुजुर्ग अब चल-फिर भी रही हैं. चमेली देवी के घर वालों ने बताया कि उन्हें पहले से ही सांस से जुड़ी समस्या है. इसकी वजह से उन्हें 2 मई 2026 को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के बाद उन्हें 4 मई को छुट्टी दे दी गई थी.
परिवार का कहना है कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. हालांकि मामला लापरवाही का लगता है. डॉक्टरों ने ग्रामीणों को सलाह देते हुए बताया कि कई गंभीर बीमारियों में शरीर की मूवमेंट बहुत कम हो जाती है. ऐसे में बिना डॉक्टर की पुष्टि के किसी को मरा हुआ मान लेना खतरनाक साबित हो सकता है.
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