The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Allahabad High Court to UP officers Dont stop people from namaz in Budaun mosque

'निजी जमीन पर नमाज पढ़ने में दखल मत दो,' यूपी के अफसरों को हाईकोर्ट का सख्त निर्देश

Allahabad High Court ने कहा कि अधिकारियों को निजी परिसर के अंदर पढ़ी जा रही Namaz में किसी भी तरह की दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए. इससे पहले भी हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने आदेश दिया था कि अगर कोई धार्मिक प्रार्थना निजी परिसर में हो रही है तो उस पर रोक नहीं लगाई जा सकती.

Advertisement
Allahabad High Court
कोर्ट ने कहा कि निजी परिसर में नमाज पढ़ने पर कोई कानूनी रोक नहीं है. (सांकेतिक फोटो: आजतक)
pic
अर्पित कटियार
15 मार्च 2026 (अपडेटेड: 15 मार्च 2026, 02:53 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि निजी परिसर में नमाज पढ़ने पर कोई कानूनी रोक नहीं है. अदालत ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे निजी जगह पर की जाने वाली पूजा या इबादत में हस्तक्षेप न करें. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर सार्वजनिक संपत्ति पर कोई कानून-व्यवस्था की स्थिति बनती है, तो पुलिस कानून के मुताबिक जरूरी एक्शन ले सकती है.

निजी संपत्ति पर बनी एक मस्जिद में नमाज पढ़ने को लेकर एक याचिका उच्च न्यायालय में दायर की गई थी. उत्तर प्रदेश के बदायूं के रहने वाले याचिकाकर्ता अलीशेर ने मांग की थी कि प्रशासन को निर्देश दिया जाए कि वह उन्हें, उनके परिवार और मुस्लिम समुदाय के अन्य लोगों को उनकी निजी जमीन के एक हिस्से पर बनी मस्जिद ‘वक्फ मस्जिद रजा’ में शांति से नमाज पढ़ने से न रोके.

लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं के निजी परिसर के अंदर पढ़ी जा रही नमाज में किसी भी तरह की दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए.

यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दिया, जिसमें जस्टिस शेखर बी सराफ और जस्टिस विवेक सरन शामिल थे. अदालत ने कहा कि पहले भी एक दूसरी बेंच इस मुद्दे पर अपना मत दे चुकी है और वह उससे पूरी तरह सहमत है.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने भी जनवरी में दिए गए एक पुराने फैसले का हवाला दिया था, जिसमें अदालत ने कहा था कि अगर कोई धार्मिक प्रार्थना निजी परिसर में हो रही है तो उस पर रोक नहीं लगाई जा सकती.

हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि अगर सार्वजनिक सड़क या सार्वजनिक संपत्ति पर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बनती है, तो पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकती है. 25 फरवरी को हाईकोर्ट ने इस याचिका का निपटारा किया.

ये भी पढ़ें: 20 नमाजियों की 'लिमिट' पर हाईकोर्ट की फटकार, DM-SP से कहा, ‘नहीं हो रही ड्यूटी तो इस्तीफा दो’

इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के स्थानीय अधिकारियों को भी फटकार लगाई थी. प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के संभल की एक मस्जिद में 20 से ज्यादा लोगों के नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी थी. इस फैसले के खिलाफ मुनाज़िर खान कोर्ट चले गए. कोर्ट से उन्होंने कहा कि उन्हें रमजान के महीने में गाटा नंबर-291 पर, जहां एक मस्जिद है, नमाज अदा करने से रोका जा रहा है. 

27 फरवरी को अपने आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को फटकार लगाते हुए कहा कि ‘कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है. अगर आपसे नहीं हो पा रहा है तो इस्तीफा दे दीजिए. या ट्रांसफर ले लीजिए.’

वीडियो: इस्लामाबाद में जुम्मे की नमाज के वक्त धमाका, 31 की मौत 100 से ज्यादा घायल

Advertisement

Advertisement

()