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लड़कियों से बदसलूकी करता था, तख्ती लेकर खड़ा होने की सजा मिली, हाई कोर्ट की डबल बेंच ने छोड़ दिया

Allahabad High Court student placard punishment: नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के एक छात्र को सजा दी गई थी कि वो 30 दिनों तक एक तख्ती लेकर कॉलेज के गेट के बाहर खड़ा होगा. इस फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बदल दिया है.

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6 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:46 PM IST)
Allahabad High Court student placard punishment
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तख्ती पकड़ने वाला फैसला बदला (फोटो-इंडिया टुडे)
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नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के एक छात्र को 30 दिनों तक 30 मिनट के लिए एक बोर्ड लेकर खड़ा होने का निर्देश दिया गया था. बोर्ड पर लिखा होना था- 'मैं लड़कियों के साथ कभी गलत व्यवहार नहीं करूंगा.' ये फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनाया था, जिसे चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने पलट दिया है. 

कोर्ट ने आदेश को गलत बताते हुए कहा,

“तख्ती पकड़कर खड़ा करने की सजा अपमानजनक और लड़के के कैरेक्टर पर हमेशा के लिए एक धब्बा (दाग) लगा सकता है.”

Live law की रिपोर्ट के मुताबिक, यह छात्र BSc मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी (BSc MLT) की पढ़ाई कर रहा है. 30 मार्च को उसे कॉलेज से निकाल दिया गया था. उस पर आरोप लगा कि वो दूसरी यूनिवर्सिटी की लड़कियों के साथ गलत व्यवहार करता है. यूनिवर्सिटी ने कहा कि उनके पास सबूत के तौर पर वीडियो रिकॉर्डिंग भी है. 

लड़के ने कॉलेज के फैसले को चुनौती देने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की. 29 अक्टूबर को जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई की. युवक के पिता एक किसान है. ये देखते हुए जज ने उसे निकाले जाने के आदेश पर रोक लगा दी. 

कोर्ट ने कहा, “यूनिवर्सिटी के वकील की तरफ से पेश किए दस्तावेजों को देखते हुए याचिकाकर्ता का व्यवहार सही नहीं लगता. उसकी पिछले एकेडमिक ईयर की अटेंडेंस भी 50 प्रतिशत से कम रही है. उसने छात्रों के साथ क्लास बंक की है. इस मामले में कुछ रिकॉर्डिंग भी है.”

पीठ ने आगे फैसला सुनाते हुए कहा, छात्र के पिता एक गरीब किसान हैं. इसलिए उसका निष्कासन रोका जा रहा है. लेकिन कुछ शर्तें है, जो उसे माननी होगी. जो हैं-

-  याचिकाकर्ता 3 नवंबर से 30 दिनों तक रोज सुबह 8.45 बजे से 9.15 बजे तक यूनिवर्सिटी के गेट पर तख्ती लेकर खड़ा रहेगा. इस पर लिखा होगा कि वह किसी भी लड़की के साथ कभी दुर्व्यवहार नहीं करेगा. यूनिवर्सिटी को इसका फोटो क्लिक करना होगा. अगर छात्र ऐसा नहीं करता, तो यूनिवर्सिटी के पास हक होगा कि वो उसे रस्टिगेट कर दे.

- छात्र को यूनिवर्सिटी को एक एफिडेफिट देना होगा. जिसमें लिखा होगा कि वह बाकी की बची हुई क्लास में 95 पर्सेंट की अटेंडेस पूरी करेगा. क्लास के समय वो परिसर से बाहर नहीं जाएगा. छुट्टी लेने के लिए उसे आवेदन देना होगा.

- आदेश में ये भी कहा गया कि अगर फ्यूचर में उसके खिलाफ कोई नई शिकायत आती है, तो यूनिवर्सिटी उसे बिना कोई नोटिस जारी किए निकाल सकती है.

- यह भी कहा गया कि छात्र अपने व्यवहार के लिए यूनिवर्सिटी से माफी मांगेगा.

इसके अलावा पुलिस को दोनों यूनिवर्सिटी के गेट खुलने और बंद होने के समय ‘एंटी-रोमियो मोबाइल स्क्वाड’ तैनात करने का निर्देश दिया गया. हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ छात्र ने एक बार फिर अपील दायर की. जिस पर 4 फरवरी को चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने सुनवाई की. 

कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता के पिछले शैक्षणिक सालों में 50% उपस्थिति को देखते हुए जो शर्तें और निर्देश हैं, वो ठीक थे. लेकिन निर्देश नंबर II (बोर्ड पकड़कर खड़ा होना) कहीं से भी सही नहीं है. ये अपमानजनक है. इससे छात्र के कैरेक्टर पर परमानेंट दाग लग सकता है. 

वीडियो: दिल्ली जनकपुरी में हुई घटना का असली जिम्मेदार कौन?

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