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संभल की मस्जिद में 'गिनती के नमाजी' वाला आदेश रद्द, HC ने कहा- 'बखेड़ा करने वालों पर कार्रवाई हो'

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की. बेंच ने साफ कहा कि राज्य सरकार को नमाज के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम दुरुस्त करने होंगे. अगर कोई इसमें बाधा पहुंचाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.

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आनंद कुमार
| पंकज श्रीवास्तव
16 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 09:24 PM IST)
Allahabad High Court sambhal mosque
संभल मस्जिद में नमाजियों की संख्या तय करने वाले फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. (इंडिया टुडे)
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल की एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या को सीमित करने के प्रशासनिक आदेश को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने 16 मार्च को इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की. अदालत ने राज्य सरकार को नमाज के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. साथ ही इसमें बाधा डालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आदेश भी दिया है.

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की. बेंच ने साफ कहा कि राज्य सरकार को नमाज के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम दुरुस्त करने होंगे. अगर कोई इसमें बाधा पहुंचाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.

संभल जिला प्रशासन ने इलाके की एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित रखने का आदेश दिया था. इसके खिलाफ संभल के रहने वाले मुनाजिर खान ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. 

इससे पहले 27 फरवरी को इसी याचिका पर हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने संभल प्रशासन के खिलाफ बेहद तल्ख टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था,

“प्रशासन मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता. अगर डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके विश्नोई को लगता है कि वे कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर ट्रांसफर करवा लेना चाहिए. हर परिस्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखना उनका काम है.”

डिवीजन बेंच ने आगे कहा कि यह राज्य का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा कर सके. याचिकाकर्ता मुनाजिर खान ने बताया,

“पिछले साल फरवरी में हयातनगर थाने से पुलिसवाले आए और उन्होंने कहा कि सिर्फ 20 लोग ही मस्जिद में नमाज पढ़ सकते हैं. उसमें भी एक बार में 5 से 6 लोग ही नमाज अदा कर सकते हैं.”

इसके बाद मुनाजिर ने 18 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. 27 फरवरी को उनकी याचिका पर पहली सुनवाई हुई, जिसे 14 मार्च को हाई कोर्ट की साइट पर अपलोड किया गया. फिर 16 मार्च की सुनवाई में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस याचिका का निपटारा कर दिया.

वीडियो: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल के अफसरों को क्यों फटकार लगाई?

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