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'मेंटनेंस के लिए पत्नी का पति की इनकम बढ़ाकर बताना नॉर्मल है', हाई कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?

पति का आरोप है कि पत्नी ने मेंटेनेंस की मांग करने वाली याचिका में उसकी सैलरी को लेकर कई बार झूठ बोला. ऐसे में उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 379 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए.

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30 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 08:41 PM IST)
Allahabad high court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मेंटेनेंस के मामले में पत्नी अपने पति की इनकम बढ़ा-चढ़ाकर बताती ही है. (फोटोः India Today)
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इलाहाबाद हाई कोर्ट का कहना है कि मेंटेनेंस के मामले में पत्नी अपने पति की इनकम बढ़ा-चढ़ाकर बताती ही है. इसे झूठा बयान मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी नही हैं. कोर्ट का ये बयान एक शख्स की याचिका पर आया है, जिसमें उसने अपनी पत्नी के खिलाफ ‘कोर्ट में झूठ बोलने पर’ केस शुरू करने की मांग की है. उसका दावा है कि पत्नी ने मेंटेनेंस की मांग करने वाली याचिका में उसकी सैलरी को लेकर कई बार झूठ बोला. ऐसे में उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 379 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. 

इस कानून के तहत कोर्ट में झूठी गवाही या दलील देने वालों के खिलाफ क्रिमिनल केस का मुकदमा दायर होता है. 

इससे पहले फैमिली कोर्ट ने शख्स की ये अपील खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसने फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. मामला सुनते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस राजबीर सिंह की पीठ ने कहा कि भरण-पोषण (मेंटेनेंस) के मामलों में पत्नी अपने पति की इनकम को बढ़ाकर बताती ही है. ये 'सामान्य बात; है, लेकिन ऐसे हर मामले में उसे झूठा बयान मानकर कार्रवाई शुरू करना जरूरी नहीं है. 

कोर्ट ने कहा कि बीएनएस की धारा 379 का मकसद ‘फालतू’ और ‘परेशान करने वाले’ मुकदमों से बचाव करना है. झूठ बोलने के मामलों में कार्रवाई तभी होनी चाहिए जब यह साफ दिखे कि झूठ जानबूझकर और सोच-समझकर बोला गया है और दोष साबित होने की संभावना भी हो. 

पीठ ने कहा कि ये जरूरी नहीं कि कोर्ट हर मामले में शिकायत दर्ज करे. उसे यह देखना होता है कि ऐसा करना न्याय के हित में जरूरी है या नहीं. हाईकोर्ट ने अपील करने वाले को चेतावनी भी दी कि अदालतों का इस्तेमाल बदला लेने के साधन के रूप में नहीं होना चाहिए.

क्या मामला है?

दरअसल, पति से मेंटेनेंस की मांग करते हुए पत्नी ने फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल की है. पति का कहना है कि उसकी आय को लेकर पत्नी ने कोर्ट में झूठ बोला. अलग-अलग जगहों पर उसकी आय 80 हजार और 1 लाख 25 हजार बताई गई है. जबकि उसकी असल में इनकम 11 हजार रुपये महीना है. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि पत्नी ने शपथपत्र (affidavit) में गलत जानकारी दी है. अपनी इस बात को साबित करने के लिए कोई सबूत भी नहीं दिया. ऐसे में उसके खिलाफ कोर्ट में झूठ बोलने का मामला बनता है.

हालांकि, पत्नी के वकील ने पति के दावे को खारिज किया है. उनका कहना है कि पति लंबे समय से वकालत कर रहा है. वो अपनी असली आय छिपा रहा है. खेती और किराये से मिलने वाले पैसे का जिक्र वह अपनी आय में नहीं कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ इसलिए कि पत्नी ने पति की आय 80 हजार रुपये बताई, उसके खिलाफ धारा 340 CrPC (BNS 379) के तहत कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती. पति की असली आय का फैसला तो फैमिली कोर्ट दोनों पक्षों के सबूतों के आधार पर करेगा.

सारी दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट की बेंच ने भी यही कहा कि मामले में पति की आय का मुद्दा अभी फैमिली कोर्ट में चल रहा है. वहां सबूतों के आधार पर तय किया जाएगा कि पति की वास्तविक आय क्या है. कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है जिससे यह लगे कि बीएनएस की धारा 379 के तहत शिकायत करना न्याय के हित में जरूरी है. इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश में कोई बड़ी कानूनी गलती या गड़बड़ी नहीं लगती. ये कहते हुए हाईकोर्ट ने पति की अपील खारिज कर दी.

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