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लीबिया, सीरिया और यूक्रेन में लड़ने के बाद भारत पहुंचा, बंगाल में पकड़े गए मैथ्यू वैनडाइक की पूरी कहानी

जो लोग मिलिट्री और प्रॉक्सी युद्ध की खबरों को फॉलो करते हैं, वो Matthew Vandyke से भली-भांति परिचित होंगे. उसके ऊपर कई बड़े चैनलों ने डॉक्यूमैंट्री बनाई हुई है. इसलिए सवाल उठ रहा है कि वो भारत में क्या कर रहा था.

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18 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 01:56 PM IST)
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मैथ्यू के साथ NIA ने छह और यूक्रेनी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया है.
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आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करने वाली एजेंसी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है. इस अमेरिकी का नाम मैथ्यू वैनडाइक है. मैथ्यू के साथ NIA ने छह और यूक्रेनी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया है. इन सभी पर भारत के नॉर्थ-ईस्ट में ऑपरेट करने वाले हथियारबंद गुटों को ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग, अवैध तरीके से बॉर्डर पार कराने की कोशिश का आरोप है. गिरफ्तार हुए सभी लोगों में मैथ्यू का नाम सबसे अधिक चर्चित है.

कौन हे मैथ्यू वैनडाइक?

मैथ्यू वैनडाइक खुद को एक सिक्योरिटी एनालिस्ट, वॉर कॉरस्पॉन्डेंट और डॉक्यूमैंट्री फिल्ममेकर बताता है. दुनिया मैथ्यू से सबसे पहले 2011 में रूबरू हुई थी. इस साल लीबिया में गृह युद्ध शुरू हुआ था. मैथ्यू तब लीबिया जाकर विद्रोही गुटों की तरफ से लड़ा था. उसे वहीं पर जेल भी हुई थी. जेल से निकलने के बाद उसने Sons Of Liberty International (SOLI) नाम से एक संस्थान का गठन किया. ये संगठन आजादी के लिए लड़ने का दावा करता था. इसका काम पूरी दुनिया में हथियारबंद विद्रोही गुटों को मिलिट्री ट्रेनिंग और हथियार देना था.

भारत में क्या कर रहा था मैथ्यू? 

जो भी मिलिट्री और प्रॉक्सी युद्ध की खबरों को फॉलो करते हैं, वो मैथ्यू से भली-भांति परिचित हैं. उसके ऊपर कई बड़े चैनलों ने डॉक्यूमैंट्री बनाई हुई है. इसलिए सवाल उठ रहा है कि वो भारत में क्या कर रहा था. क्योंकि मैथ्यू जहां भी जाता है, उसका कोई न कोई मकसद होता है. NIA ने उसे कोलकाता से गिरफ्तार किया है. उसके अलावा लखनऊ और दिल्ली से तीन-तीन यूक्रेनी भी गिरफ्तार हुए हैं. इन सातों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां NIA ने उनके ट्रैवल रूट की जांच करने, कथित साजिश के सबूत जुटाने और उनके अन्य साथियों का पता लगाने के लिए 15 दिनों की हिरासत मांगी. कोर्ट ने 11 दिनों की NIA हिरासत मंजूर कर ली है. 

सभी आरोपियों को 27 मार्च को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा. मैथ्यू ने लीबिया के अलावा सीरिया में बशर-अल-असद के खिलाफ भी विद्रोहियों को सपोर्ट किया. यूक्रेन मेें रूस के खिलाफ लड़ाई में मदद की. इराक में ISIS के खिलाफ भी लड़ा. कहानियां ऐसी भी हैं कि वो वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को कमजोर करने के लिए गुप्थ ऑपरेशंस चलाता था.

म्यांमार में लड़ाई से कनेक्शन

एनडीटीवी ने NIA सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि 14 यूक्रेनी नागरिक टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे. वो पहले गुवाहाटी, और फिर बिना कागजों के ही मिजोरम गए. उनका मकसद बॉर्डर पार कर म्यांमार के विद्रोहियों को ड्रोन-वॉरफेयर की ट्रेनिंग देना था. अब जिस सवाल की जांच की जा रही है, वह यह है कि क्या इस नेटवर्क को भारत के अंदर कोई लोकल सपोर्ट है. और ड्रोन को भारतीय क्षेत्र से होकर कैसे भेजा गया था. गिरफ्तारियों के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन की भी जांच हो रही है.

गौर करने वाली बात है कि मार्च 2025 में, मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने चेतावनी दी थी कि विदेशी नागरिक, जिनमें अमेरिका और ब्रिटेन के भाड़े के सैनिक और पूर्व स्पेशल फोर्सेज के जवान शामिल हैं. ये मिजोरम के रास्ते म्यांमार में प्रवेश कर रहे हैं, ताकि वे म्यांमार के मिलिट्री जुंटा से लड़ रहे स्थानीय गुटों को ट्रेनिंग दे सकें.

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