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'हम ट्रंप के जाने का इंतजार कर लेंगे...' जब अजित डोभाल को मार्को रुबियो से करनी पड़ी दो टूक बात

India-America Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील पर बात क्यों बन नहीं पा रही थी? NSA अजित डोभाल ने मार्को रुबियो से क्या कह दिया था?

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ajit doval statement before trade deal
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के पीछे क्या?
5 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 5 फ़रवरी 2026, 10:51 AM IST)
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‘हम इंतजार करेंगे तेरा क़यामत तक, खुदा करे कि कयामत हो और तू आए…’ 1967 में आई फिल्म ‘बहू-बेगम’ के इस गाने की लाइनें भारत-अमेरिका ट्रेड डील की कामयाबी पर सटीक बैठ रही है. नोबेल शांति पुरस्कार के चक्कर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने टैरिफ का जो रायता फैलाया था. उसे समेटने में कई महीने लग गये. नतीजा ट्रेड डील अटकी. मगर अंकल सैम का मुल्क उसकी आड़ में भारत को ब्लैकमेल नहीं कर पाया.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत-अमेरिका ट्रेड डील की कहानी उतनी सीधी नहीं थी जितनी दिखती है. पर्दे के पीछे बातचीत कई बार अटकी, शर्तें बदलीं और माहौल भी तनातनी भरा रहा. कहा जा रहा है कि बातचीत के दौरान एक ऐसा पल भी आया जब भारत ने साफ शब्दों में अमेरिका से कह दिया, “हम राष्ट्रपति ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार कर लेंगे.” रिपोर्ट्स के अनुसार यह बात सितंबर 2025 की है, जिसने उस समय चल रही बातचीत की गंभीरता और खींचतान दोनों को उजागर कर दिया.

उस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को वॉशिंगटन भेजा गया था. विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात करने. इस मीटिंग की जानकारी रखने वाले टॉप अधिकारियों ने ब्लूमबर्ग को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि-

डोभाल ने रुबियो से साफ़ कह दिया था कि भारत राष्ट्रपति ट्रंप या उनके करीबियों के दबाव में नहीं आएगा. भारत पहले भी अमेरिका की ऐसी कई सरकारों का सामना कर चुका है जिन्होंने सख्ती दिखाई थी. हम प्रेसिडेंट ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने का इंतज़ार भी कर सकते हैं. लेकिन भारत दोनों देशों के बीच की कड़वाहट को भुलाकर फिलहाल व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करना चाहता है.

इससे पहले सितंबर 2025 में ही पीएम मोदी, प्रेसिडेंट पुतिन और शी जिनपिंग SCO समिट में एक साथ दिखें थे. अमेरिका तब इस बात से झल्लाया भी था. इसी महीने अजित डोभाल को वॉशिंगटन भेजा गया था.

मीटिंग में डोभाल ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत चाहता है कि ट्रंप और उनके अधिकारी सार्वजनिक तौर पर भारत की आलोचना करना कम करें, ताकि दोनों देशों के बिगड़े हुए रिश्तों को फिर से पटरी पर लाया जा सके. ट्रंप उस दौरान लगातार भारत की आलोचना कर रहे थे. ट्रुथ सोशल पोस्ट पर कभी भारत को ‘Dead Economy’ कहते. कभी रूस से तेल खरीदने पर रूस-यूक्रेन युद्द का समर्थन करने का आरोप लगाते.

डोभाल ने साफ किया था कि भारत किसी भी तरह की 'बुलिंग' स्वीकार नहीं करेगा. इस बैठक के बाद ही सितंबर में पॉजिटिव इफेक्ट देखने को मिला था. ट्रंप ने पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी थी. उनके काम की तारीफ की. साल के अंत तक दोनों नेताओं के बीच चार बार और फोन पर बातचीत हुई.

ये भी पढ़ें- 'भारत के इस फैसला के हम टारगेट... ', इंडिया के यूएस से ज्यादा तेल खरीदने के फैसले पर रूस क्या बोला?

2  फरवरी, 2026 को ट्रंप ने पीएम मोदी से फोन पर बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच ट्रेड डील की अनाउंसमेंट कर दी. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऐलान से भारत में कई बड़े अधिकारी भी चौंक गए. यहां तक कि जो लोग ट्रेड बातचीत में शामिल थे, उन्हें भी उस दिन मोदी और ट्रंप की कॉल के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी.

मई 2025 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ट्रंप के सीजफायर कराने का दावा किया था. भारत ने अमेरिका के दावों का गलत बताया था. भारत की विदेश नीति भी यही रही है कि वो पाकिस्तान के मामले में कभी भी दूसरे देश के हस्तक्षेप को नहीं स्वीकार करता. इसके बाद ट्रंप और उनके करीबियों ने भारत के विरोध में कई स्टेटमेंट्स दिए. और अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था.

वीडियो: भारत-अमेरिका ट्रेड डील: भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने क्या बताया?

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