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एयर इंडिया हादसा: मुआवजे को लेकर पीड़ितों पर 'दबाव' बनाने का आरोप, एयरलाइन ने सफाई दी

Air India crash victims family claim: एयर इंडिया का AI 171 प्लेन 12 जून 2025 को क्रैश हुआ था. हादसे की बरसी के दो दिन पहले कहा गया कि पीड़ित लोगों को अंतिम मुआवजा लेने के लिए कहा गया. जिस पर कई लोगों ने सवाल उठाए. एयर इंडिया ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि परिजनों पर कोई दबाव नहीं है.

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10 जून 2026 (पब्लिश्ड: 06:27 PM IST)
Air India crash victims family claim
एयर इंडिया का AI 171 प्लेन 12 जून 2025 को क्रैश हुआ था. (फोटो-इंडिया टुडे)
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एयर इंडिया का AI 171 प्लेन 12 जून 2025 को क्रैश हुआ था. हादसे की बरसी से दो दिन पहले एक विवाद सामने आया है. आरोप है कि कंपनी ने क्रैश में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों को तय समय-सीमा के अंदर अंतिम मुआवजा लेने के लिए कहा है. इस पर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की बेटी राधिका मिश्रा समेत कई लोगों ने सवाल उठाए.

अब मामले पर सफाई देते हुए एयर इंडिया ने राधिका मिश्रा को लेटर लिखकर कहा है कि उन्हें तय समय के अंदर उनके ऑफर को एक्सेप्ट करने का कोई दबाव नहीं है. इंडिया टुडे से जुड़े अमित भारद्वाज ने बताया कि पत्र में कंपनी ने कहा है,

“AI-171 की त्रासदी के कारण कई परिवारों और लोगों की जान जाने और उन्हें हुए दुख से हम बहुत दुखी हैं. आपके पिता के निधन पर अपना दुख व्यक्त करने के लिए हमारे पास शब्द नहीं हैं. मगर हम मुआवजे के मामलों पर परिवारों के साथ बातचीत कर रहे हैं. ये हमारा कर्तव्य है. हम यह भी अच्छी तरह समझते हैं कि आर्थिक मुआवजा परिवार के किसी सदस्य के खोने की भरपाई कभी नहीं कर सकता.”

एयरलाइन ने मुआवजे पर आगे कहा,

“हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि किसी भी परिवार या व्यक्ति पर हमारे ऑफर को एक निश्चित समय सीमा के अंदर स्वीकार करने का कोई दबाव नहीं है. इसलिए हमारे अंतिम मुआवजे के ऑफर में इसे स्वीकार करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई थी.”

कंपनी का कहना है कि परिवार जांच रिपोर्ट आने तक इंतजार कर सकते हैं. मगर ये जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) स्वतंत्र रूप से कर रहा है. ऐसे में एयर इंडिया ये नहीं जानता कि रिपोर्ट कब जारी की जाएगी.

पत्र में कंपनी ने 'रसीद, डिस्चार्ज और क्षतिपूर्ति दस्तावेज' (RDI) में लिखी कुछ बातों पर ध्यान दिलाते हुए कहा,

• RDI में इस्तेमाल की गई भाषा वैसी ही है जैसी एयरलाइंस आमतौर पर ऐसे हालात में अपनाती हैं. फिर वे भारत में हों या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर.

• एयर इंडिया किसी भी तीसरे पक्ष (जैसे इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियां) को बचाना नहीं चाहती. ऐसे हादसों में कई बार यात्री या उनके परिवार सीधे तीसरे पक्षों से मुआवजे की मांग करते हैं. थर्ड पार्टी अक्सर एयरलाइन के खिलाफ भी दावा करते हैं. इसलिए, ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने का मतलब है कि फाइनल मुआवजे का समझौता सचमुच फाइनल हो और एयर इंडिया को भविष्य में किसी भी सीधे दावे (परिवार के अन्य सदस्यों से) या अप्रत्यक्ष दावे (उपकरण बनाने वालों, सप्लायरों आदि से) से बचाया जा सके.

• जैसा कि ऊपर बताया गया है, जो परिवार RDI करने से पहले जांच के नतीजों का इंतजार करना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए पूरी तरह आजाद हैं. इसी तरह, जो परिवार फाइनल मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाना चाहते हैं, उनके पास ऐसा करने का ऑप्शन है.

रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ग्रुप द्वारा बनाए गए AI-171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के लगभग सभी परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद (एक्स-ग्रेशिया) दी है.

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