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बेटी मृत पिता के iPhone का डेटा एक्सेस करने के लिए कोर्ट पहुंची, बड़ा फैसला आया

Court allows daughter access dead dad’s iPhone: महिला ने अपने पिता की मृत्यु के बाद उनके iPhone और iCloud अकाउंट का एक्सेस मांगा था. जिसे Apple कंपनी ने ये कहते हुए देने से इनकार कर दिया कि वे तभी डेटा प्रोवाइड कर सकते हैं, जब वे कोर्ट से ऑर्डर लेकर आए.

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8 मई 2026 (अपडेटेड: 8 मई 2026, 07:34 PM IST)
Court allows daughter access dead dad’s iPhone
कोर्ट ने माना कि डिजिटल डेटा भी संपत्ति है. (फोटो- Unsplash.com)
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गुजरात के गांधीनगर स्थित एक सिविल कोर्ट ने कहा है कि 'इंडियन सक्सेशन एक्ट' के तहत मृतक व्यक्ति के डिजिटल डेटा को भी उसकी संपत्ति का हिस्सा माना जा सकता है. एक महिला ने अपने मृत पिता के iPhone और Apple iCloud अकाउंट एक्सेस कराने की मांग की थी. कोर्ट ने उसकी याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की. 

महिला ने अपने पिता की मृत्यु के बाद उनके iPhone और iCloud अकाउंट का एक्सेस मांगा था. जिसे Apple कंपनी ने ये कहते हुए देने से इनकार कर दिया कि वे तभी डेटा प्रोवाइड कर सकते हैं, जब वे कोर्ट से ऑर्डर लेकर आए.

अप्रैल 2025 में शैशव शाह की मौत हो गई थी. उनकी यादों के लिए, जरूरी डॉक्यूमेंट्स के लिए उनकी पत्नी और बेटी उनके iCloud का एक्सेस चाहते थे. इसके लिए उन्होंने ऐपल कंपनी से मदद मांगी. कंपनी ने कहा कि उन्हें एक्सेस दे दिया जाएगा, लेकिन उससे पहले वे कोर्ट से ऑर्डर लेकर आएं कि वे उसके कानूनी प्रतिनिधि हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद परिवार ने वकील जीत भट्ट की मदद से कोर्ट में अर्जी डाली. 'उत्तराधिकार अधिनियम' के तहत घोषणा और 'प्रशासन पत्र' (Letter of Administration) जारी करने की मांग की. मृतक की पत्नी को भी अपनी तरफ से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जमा करना पड़ा. इसमें लिखा था कि उनकी बेटी को पिता के आईफोन डेटा का एक्सेस देने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है.

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि मृतक के iCloud अकाउंट में कीमती प्राइवेट डिटेल्स मौजूद थीं. जैसे तस्वीरें, वीडियो, वॉइस नोट्स, दस्तावेज और कॉन्टैक्ट डिटेल्स. Apple ने कहा कि iCloud अकाउंट के लिए पासवर्ड या सिक्योरिटी रीसेट करने में मदद कर सकते हैं. मगर कोई डेटा सिर्फ फोन में सेव है और फोन लॉक है, तो कंपनी के पास उसे निकालने का तकनीकी तरीका नहीं है.

महिला ने आगे कहा कि कंपनी ने उन्हें ऐसा अदालती आदेश लेकर आने पर जोर दिया, जो उन्हें मृतक के वैध प्रतिनिधियों के रूप में प्रमाणित करे. मामले में तर्क दिया गया कि भारतीय कानूनी ढांचे में डिजिटल डेटा को ‘संपत्ति’ के रूप में मान्यता दी जा सकती है.

सुनवाई के बाद अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल जज हिमांशु चौधरी ने कहा,

"यह अदालत इस बात से सहमत है कि मृतक के Apple iCloud अकाउंट में जमा डिजिटल डेटा एक कीमती डिजिटल संपत्ति है. ये मृतक की संपत्ति का हिस्सा है जिसे इस कानून के तहत प्रबंधित किया जा सकता है."

निजता के आधार पर कोर्ट ने कहा, “निजता का अधिकार व्यक्ति की मृत्यु के साथ ही समाप्त हो जाता है. जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है.” 

रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने ये भी कहा है कि भारतीय कानूनों में ‘चल संपत्ति’ और ‘संपत्ति’ की परिभाषाएं इतनी व्यापक हैं कि उनमें डिजिटल डेटा को शामिल किया जा सकता है.

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