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'मेहमानों' के लिए अपनी जान दे दी, पहलगाम के 'हीरो' आदिल को वीरता पुरस्कार मिलेगा

पहलगाम में आतंकवादियों से भिड़ जाने वाले घुड़सवार आदिल हुसैन शाह को जम्मू-कश्मीर सरकार ने मरणोपरांत वीरता पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया है.

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adil hussain shah veerta puraskar
आदिल (बायें) की शहादत के बाद उमर अब्दुल्ला उनके परिवार से मिले थे (india today)
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शेख नावेद
26 जनवरी 2026 (Published: 04:45 PM IST)
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के दौरान लोगों की जान बचाने वाले सय्यद आदिल हुसैन शाह को जम्मू-कश्मीर सरकार ने मरणोपरांत वीरता पुरस्कार देने का ऐलान किया है. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जम्मू-कश्मीर सरकार ने ये घोषणा की. सामान्य प्रशासन विभाग के आयुक्त सचिव एम राजू की ओर से जारी आदेश के मुताब‍िक आदिल हुसैन शाह समेत 56 लोगों को अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित क‍िया जाएगा.  

22 अप्रैल को आदिल ने पहलगाम के बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हुए हमले के दौरान पाकिस्तानी आतंकियों का सामना किया था. जब आतंकवादी पर्यटकों पर हमला कर रहे थे, उस दौरान आदिल ने उन्हें रोकने की कोशिश की. एक आतंकवादी से उसकी राइफल तक छीनने की कोशिश की. इसी जद्दोजहद में एक आतंकवादी ने उसी बंदूक से आदिल को गोली मार दी. आदिल ने भी मौके पर ही दम तोड़ दिया. 

उस वक़्त क्या-क्या हुआ था? वो कहानी बताने से पहले आपको उन लोगों के बारे में बताते हैं, जिन्हें इन अवॉर्ड्स से नवाज़ा जा रहा है. 

इन लोगों भी पुरस्कार

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें सय्यद आदिल हुसैन की तरह, उसी कैटेगरी में पुलिस सब-इंस्पेक्टर निखिल कुमार भी शामिल हैं. निखिल के अलावा, जम्मू-कश्मीर के पूर्व आईएएस अधिकारी मोहम्मद शफ़ी पंडित को मरणोपरांत लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मान‍ित क‍िया जाएगा. मोहम्मद शफ़ी पंडित का निधन सितंबर 2024 में हुआ था. उनके निधन के बाद खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से पूर्व आईएएस शफ़ी पंडित के समाज सेवा से जुड़े कामों की प्रशंसा की थी.

इसके अलावा पब्लिक सर्विस के क्षेत्र में जिन प्रमुख नामों को सम्मान दिया जा रहा है, उनमें जम्मू के मुख्य वन संरक्षक वी.एस. सेंथिल कुमार, जेके मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन के एमडी तारीक़ गनई, सरकार के एडिशनल सेक्रेटरी रोहित शर्मा, पीडब्ल्यूडी की सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर पूजा वज़ीर, और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज-बारामूला के प्रिंसिपल डॉ. माजिद जहांगीर शामिल हैं.

साहित्य के क्षेत्र में डोगरी साहित्यकार यशपाल निर्मल, गोजरी भाषा के लिए चौधरी हसन परवाज़, पहाड़ी के लिए परवेज़ मनूस, कवि फ़ैयाज़ दिलबर (मरणोपरांत), और लेखक केवल कृष्ण शर्मा और रतन लाल शर्मा का नाम है. 

खेल जगत में क्रिकेटर आक़िब नबी डार और बृजेश शर्मा, जूडो खिलाड़ी राकेश सिंह और विशाल खजूरिया, वुशु खिलाड़ी सलीम कुमार, एथलीट रवीस अहमद और मोहम्मद इक़बाल. जिम्नास्ट सुदीप्ति खन्ना और स्केटर आयज़ा नाज़ चिब को चुना गया है.

खेल, साहित्य, और जनसेवा के अलावा, मीडिया जगत से भी जुड़े कई नाम इस फ़ेहरिस्त में शामिल हैं. इनमें एक नाम इंडिया टुडे के सुनील भट्ट का भी है. उनके अलावा मीडिया जगत से जुड़े अवतार कृष्ण भट्ट, विवेक सूरी, दिनेश मल्होत्रा, बिलाल अहमद भट्ट, रज़िया नूर, इशफ़ाक़ गौहर ज़रगर, सैयद ख़ालिद हुसैन, सरोश कफ़ील, नीता शर्मा,  इनायत जहांगीर, सोमिल अबरोल को भी पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया जा रहा है.

इन तमाम नामों के बीच सबसे गहरे मौन के साथ जो नाम हर भारतीय को गर्व महसूस करवाता है, वो नाम है सैयद आदिल हुसैन शाह का.

आदिल की वीरता

तारीख़ थी 22 अप्रैल 2025. कश्मीर के पहलगाम में मौजूद बैसरन घाटी में दोपहर का वक़्त था. आम दिनों की तरह वहां पर्यटक घुड़सवारी कर रहे थे और सैलानियों की रौनक थी. उसी वक़्त गोलियों की आवाज़ गूंजने लगती है. आतंकवादियों ने निहत्थे टूरिस्ट्स पर कायराना हमला कर दिया था. लोगों के नाम पूछ-पूछकर आतंकियों ने उन्हें निशाना बनाया और फिर लोगों को चुन-चुनकर गोलियां मारीं. बच्चों और महिलाओं को छोड़ दिया गया. 

इसी हमले के बीच वहां मौजूद थे सय्यद आदिल हुसैन शाह. पेशे से घुड़सवार. पर उन हालात में वो घोड़े पर सवार कोई आम कश्मीरी नहीं थे, बल्कि इंसानियत के साथ खड़े एक मज़बूत शख़्स थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब आतंकवादी पर्यटकों पर हमला कर रहे थे, उसी दौरान आदिल हुसैन शाह ने उन्हें रोकने की कोशिश की. पहले समझाया कि ये हमारे मेहमान हैं. टूरिस्ट हैं. इन्हें मत मारो लेकिन हथियारबंद आतंकी रुकने को तैयार नहीं थे. 

इसके बाद आदिल ने एक आतंकवादी से उसकी राइफल छीनने की कोशिश की. इसी जद्दोजहद में आतंकवादी गुस्से में आ गया और उसी बंदूक से आदिल को गोली मार दी. उसी दिन उन 25 टूरिस्ट्स के साथ आदिल हुसैन शाह भी शहीद हो गए. न कोई वर्दी. न कोई कवच. न कोई बैज. सिर्फ़ एक आम कश्मीरी जिसने दूसरों की जान बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी.

आदिल के जनाज़े की नमाज़ में खुद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी शरीक हुए थे. पहली सफ़ में खड़े होकर उन्होंने आदिल की नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की. 

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