अडानी के साथ लौट रही है 'ऑगस्टा वेस्टलैंड', अबकी बार 'लियोनार्डो' नाम से, हेलिकॉप्टर बनाएगी
इस डील का मकसद भारत की सेनाओं की हेलीकॉप्टर की जरूरतों को पूरा करना है. हेलीकॉप्टर के निर्माण के साथ-साथ इस डील के तहत पालयट्स की ट्रेनिंग की भी व्यवस्था की जाएगी. इस पार्टनरशिप के तहत Leonardo और Adani Defence मिलकर भारत में ये हेलीकॉप्टर बनाएंगे.
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भारत की डिफेंस कंपनी अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इटली की कंपनी लियोनार्डो के साथ एक बड़ी डील की है. इस डील के तहत अडानी डिफेंस और लियोनार्डो साथ मिलकर भारत में हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चर करेंगे. नई दिल्ली में 3 फरवरी को दोनों कंपनियों ने जानकारी दी कि इस पार्टनरशिप का मकसद भारत को हेलीकॉप्टर प्रोडक्शन बेस बनाना है. गौर करने वाली बात ये है कि लियोनार्डो वही कंपनी है जो कभी ऑगस्टा वेस्टलैंड नाम से जानी जाती थी. साल 2016 में ऑगस्टा वेस्टलैंड को लियोनार्डो नाम दिया गया. साथ ही तब लियोनार्डो का इसकी पेरेंट कंपनी फिनमेकैनिका में विलय कर दिया गया था.
क्या बनाएगी अडानी डिफेंस?एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इस डील का मकसद भारत की सेनाओं की हेलीकॉप्टर की जरूरतों को पूरा करना है. हेलीकॉप्टर के निर्माण के साथ-साथ इस डील के तहत पालयट्स की ट्रेनिंग की भी व्यवस्था की जाएगी. इस पार्टनरशिप के तहत लियोनार्डो, हेलीकॉप्टर्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला उन्नत डिजाइन, और बेहतर तकनीक उपलब्ध कराएगी. वहीं अडानी डिफेंस अपनी बेहतर निर्माण क्षमता, बड़े औद्योगिक ढांचे और डिफेंस सेक्टर में अपने अनुभव का उपयोग करते हुए भारत में अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर तैयार करेगी. पार्टनरशिप के तहत अडानी ग्रुप सेनाओं की ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए काम करेगा. अडानी और लियोनार्डो मिलकर AW169M और AW109 ट्रेकरM हेलीकॉप्टरों के प्रोडक्शन पर काम करेंगे. लियोनार्डो के ये दो हेलीकॉप्टर मिलिट्री ऑपरेशंस में इस्तेमाल किए जाते हैं.
AW109 TrekkerMइनमें से एक हेलीकॉप्टर AW109 TrekkerM है. ये एक तीन-टन क्लास का मिलिट्री हेलीकॉप्टर है जो कई तरह के मिशन में काम आता है जिसमें सैनिकों को ले . इससे सैनिकों को ले जाना, कार्गो की सप्लाई, मेडिकल इवैक्यूएशन माने राहत और बचाव, खोज और बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू), स्पेशल फोर्सेज ऑपरेशन, कमांड और कंट्रोल (C2), जैसे मिशन शामिल हैं. लियोनार्डो का दावा है कि ये हेलीकॉप्टर मुश्किल माहौल में भी काम करने में सक्षम है. भारत में ठंडे पहाडों से लेकर गर्म रेगिस्तान, हर तरह के इलाके मौजूद हैं. ऐसे में इस हेलीकॉप्टर को भारतीय सेनाओं के लिए मुफीद माना जा रहा है. इसका मजबूत डिजाइन, छोटा आकार और मजबूत लैंडिंग गियर इसे कई तरह के मिशन को अंजाम देने में मदद करते हैं. साथ ही इसमें कुछ हथियार भी इंटीग्रेट किए जा सकते हैं, इसलिए इसे मल्टीरोल हेलीकॉप्टर कहा जाता है.

लियोनार्डो का AW169 M इसी हेलीकॉप्टर के AW169 का मिलिट्री वर्जन है. ये एक डबल इंजन वाला हेलीकॉप्टर है जो दिन और रात, दोनों समय ऑपरेट कर सकता है. कंपनी का दावा है कि ये हेलीकॉप्टर गर्म मौसम से लेकर ऊंचाई वाले इलाकों में आसानी से ऑपरेट कर सकता है. कंपनी के मुताबिक ये हेलीकॉप्टर FADEC सिस्टम से लैस है. FADEC सिस्टम, विमान या हेलीकॉप्टर में इस्तेमाल किया जाता है. . विमान या हेलीकॉप्टर में संभावित खराबियों का पहले ही पता लगा लेता है. इसके लिए ये सिस्टम इंजन में होने वाली हर हरकत जैसे उसके कंपन, तापमान और थर्मल पैटर्न को मॉनिटर करता रहता है. इस सिस्टम की वजह से न सिर्फ क्षमता बढ़ती है बल्कि ईंधन की खपत में भी कमी आती है.

इस पार्टनरशिप को लेकर एनडीटीवी से बात करते हुए अडानी डिफेंस के सीईओ आशीष राजवंशी ने कहा,
ऑगस्टा वेस्टलैंड और लियोनार्डो का क्या रिश्ता है?आज देश में केवल एचएएल ही हेलीकॉप्टर बनाती है. उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है. लेकिन आज हमें और भी उन्नत तकनीक और कैपेबिलिटी की जरूरत है. इसमें बहुत सारे लोग कॉन्ट्रिब्यूट कर सकते हैं. जैसे की रक्षा सचिव ने बोला कि अगले 10 से 15 साल में हमें हजार के करीब हेलीकॉप्टर की जरूरत है. ऐसे में चार या पांच प्लेयर मिलकर इंडिया की जरूरत को पूरा करेंगे. इससे भारत में हेलीकॉप्टर तकनीक का बेस बनेगा, हेलीकॉप्टर का उत्पादन होगा आपका लॉन्ग टर्म सस्टेनेबिलिटी मिलेगी. हमारी ट्रेनिंग भी होगी. इस तरह की डील से भारत में एक पूरा इकोसिस्टम डेवलप होगा. पूरा सप्लाई चेन विकसित होगा.
ऑगस्टा वेस्टलैंड, 2010 के बाद से ये नाम काफी सालों तक सुर्खियों में रहा. ऑगस्टा वेस्टलैंड VVIP चॉपर घोटाला एक कथित भ्रष्टाचार का मामला था. 2010 में भारत ने इटली की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी फिनमेकैनिका द्वारा बनाए गए 12 ऑगस्टा वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर लगभग 3,600 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत पर खरीदने पर सहमति जताई थी. आरोप था कि ऑगस्टा वेस्टलैंड को फायदा पहुंचाने के लिए इसमें बिचौलियों या शायद राजनेताओं को भी रिश्वत दी गई थी.
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक आरोप था कि ऑगस्टा वेस्टलैंड की मदद करने के लिए कई पैरामीटर जैसे हेलीकॉप्टर के केबिन की ऊंचाई, अधिकतम ऊंचाई जिस पर हेलीकॉप्टर उड़ सकता था जैसी चीजों में बदलाव किया गया था. फरवरी 2010 में, उस समय की UPA सरकार ने 3,600 करोड़ रुपये में 12 ऑगस्टा वेस्टलैंड AW101 हेलीकॉप्टर खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था. इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वीवीआईपी लोगों को लाने-ले जाने के लिए किया जाना था।
लेकिन यह घोटाला सबसे पहले इटली में सामने आया था. फरवरी 2013 में, ऑगस्टा वेस्टलैंड के CEO ब्रूनो स्पैग्नोलिनी को इटली के अधिकारियों ने इस आरोप में गिरफ्तार किया कि कंपनी ने भारतीय वायु सेना (IAF) के साथ डील पक्की करने के लिए बिचौलियों को रिश्वत दी है. इस डील को 2014 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने रद्द कर दिया था. लियोनार्डो के हेलीकॉप्टर्स के नाम में AW ऑगस्टा वेस्टलैंड से ही आया है. काफी समय तक ये विवाद सुर्खियों में रहा. और अब एक बार फिर इस लियोनार्डो ने भारत में कदम रखे हैं. लेकिन इस बार कोई खरीद की डील नहीं, बल्कि पार्टनरशिप की डील है जो भारत में ही हेलीकॉप्टर का उत्पादन करेगी.
वीडियो: अमेरिका से आए समन को अडानी तक क्यों नहीं पहुंचा रही भारत सरकार?

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