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अबुझमाड़ में पुलिस और नक्सलियों के बीच एनकाउंटर का शिकार बने 4 बच्चे, एक बच्ची के गर्दन में गंभीर चोट

Abujhmad encounter Four children injured: बच्ची रायपुर के एक मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती है. डॉक्टरों का कहना है कि बाहरी चीज़’ (Foreign Object) गर्दन में बहुत ही नाजुक जगह पर फंसी हुई है. ऑपरेशन के बारे में जल्द ही फ़ैसला लिया जाएगा.

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18 दिसंबर 2024 (अपडेटेड: 18 दिसंबर 2024, 08:37 AM IST)
Abujhmad encounter Four children injured
पुलिस ने 7 नक्सलियों के मारे जाने का दावा किया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर - PTI)
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छत्तीसगढ़ पुलिस ने 12 दिसंबर को अबुझमाड़ क्षेत्र में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुए मुठभेड़ में 7 नक्सलियों के मारे जाने का दावा किया था. तब किसी भी नागरिक के घायल होने की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी. लेकिन अब पुलिस सूत्रों से पता चला है कि इस मुठभेड़ के बीच 4 बच्चे भी घायल हो गए थे. बताया गया कि एक नाबालिग लड़की गोली लगने से बुरी तरह घायल हो गई है. उसकी गर्दन में एक ‘बाहरी चीज़’ (Foreign Object) देखी गई थी.

इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े जयप्रकाश एस नायडु की ख़बर के मुताबिक़, नाबालिग लड़की को 16 दिसंबर की देर रात रायपुर के एक मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचाया गया. जहां उसे दूसरे शहर के अस्पताल से रेफ़र किया गया था. नारायणपुर ज़िले के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

मुठभेड़ में चार नाबालिगों को छर्रे लगने से चोटें आई हैं. ये चोटें माओवादियों की तरफ़ से दागे गए बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL) के छर्रे लगने से आई हैं. उनमें से एक लड़की की गर्दन पर गंभीर चोट आई है, इसलिए उसे रायपुर रेफर कर दिया गया है. बच्चों को घायल करने के लिए माओवादियों के ख़िलाफ़ अलग से मामला दर्ज किया जाएगा.

वहीं, अस्पताल में भर्ती नाबालिग लड़की के पिता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

मुझे नहीं पता कि क्या हुआ. मेरी लड़की खेत में गई थी, तभी किसी चीज़ से उस पर हमला हुआ और वो बेहोश हो गई. फिर हम उसे डॉक्टर के पास ले गए. उन्होंने हमें यहां भेजा है.

बताया गया कि पहले उसे इलाज के लिए बीजापुर के भैरमगढ़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. इसके बाद उन्हें जगदलपुर के एक अस्पताल (वहां से 113 किलोमीटर दूर) ले जाया गया और वहां से उन्हें रायपुर (305 किलोमीटर दूर) भेजा गया. अस्पताल के एक अधिकारी का कहना है

लड़की भाग्यशाली है. ये एक दुर्लभ मामला है. उसकी हालत स्थिर है. फिलहाल उसकी नसें सुरक्षित हैं. लेकिन ‘बाहरी चीज़’ (Foreign Object) बहुत ही नाजुक जगह पर फंसी हुई है. ऑपरेशन के बारे में जल्द ही फ़ैसला लिया जाएगा.

बताते चलें, मेडिकल टर्म में ‘Foreign Object’ का मतलब शरीर में मौजूद ऐसी चीज़ है, जो वहां नैचुरली नहीं होती. हमले में बाहरी चीज़ लगने या किसी चीज़ के निगल लिए जाने से ये शरीर के अंदर आती है. बताया गया कि अन्य तीन घायल बच्चे लड़के थे. उनके भी गर्दन और पीठ पर घाव थे और उनकी हालत अब स्थिर है. इंडियन एक्सप्रेस की इस ख़बर पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा है,

मैंने पहले भी कहा है कि टारगेट सेटल करने से ऐसे ख़तरे पैदा होते हैं. नक्सल समस्या का समाधान ज़रूरी है. लेकिन आम नागरिकों की जान की क़ीमत पर नहीं. इलाक़े में रहने वाले ग़रीब-निर्दोष आदिवासी इसलिए हताहत नहीं हो सकते, क्योंकि कुछ लोगों पर टारगेट सेट किया गया हो. निर्दोषों को नुक़सान पहुंचाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती.

टीएस सिंह देव ने आगे लिखा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद बच्ची को कई दिन बाद रायपुर पहुंचाया गया, ये बहुत निराशाजनक है. उम्मीद है कि उनकी अच्छी देखभाल के लिए, उन्हें बेहतर इलाज मिलेगा.

वीडियो: डी. अनसूया सीताक्का कैसे नक्सली से तेलंगाना की मिनिस्टर बन गईं

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