लीबिया में फंसे 16 भारतीय मजदूर, ना वेतन मिल रहा ना पासपोर्ट, काम के बदले मिली पिटाई
सितंबर 2024 में इन मजदूरों ने अपनी मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. उनकी मांग थी कि उनके जो पैसे काटे गए हैं वो उन्हें वापस मिलें. और उनके काम करने का समय घटाया जाए.
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लीबिया, उत्तरी अफ़्रीका में स्थित एक देश है. यहां भारत के 16 मजदूर एक सीमेंट फैक्ट्री में काम करने गए थे. लेकिन, पिछले 4 महीनों से वे वहां बेहद मुश्किल परिस्थितियों में जी रहे हैं. द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ ये लोग लीबिया के शहर बेंगाज़ी में एक सीमेंट फैक्ट्री की प्लांट में काम कर रहे थे. लेकिन अब वहां ‘क़ैद जैस हालात’ में फंसे हुए हैं.
ये सभी मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग इलाकों से हैं. अखबार ने इनमें से दो मजदूरों से बात की है. उन्होंने बताया कि वे भारत से लीबिया दुबई होते हुए आए थे. अबू बकर नाम के एक ट्रेवल कॉन्ट्रैक्टर ने उनके आने की पूरी व्यवस्था की थी. अबू बकर दुबई से ही अपना काम करता है. लेकिन, वो लीबिया का रहने वाला है.
वहीं इंडिया टुडे से जुड़े गजेंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक़ इन युवकों को सोशल मीडिया के जरिये नौकरी के झांसे में फंसाया गया था. इन्हें टूरिस्ट वीज़ा पर लीबिया लाया गया था, जबकि काम करने के लिए वर्किंग वीज़ा की जरूरत होती है. एक एजेंट के माध्यम से ये अपने मुल्क़ से इतनी दूर लीबिया में काम करने पहुंचे थे.
इन मजदूरों में से एक 26 साल के मिथिलेश विश्वकर्मा हैं. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले हैं. उन्होंने बताया, “16 सितंबर, 2023 को मैं पहले लखनऊ से दुबई पहुंचा. फिर, अबू बकर की मदद से मैं दुबई से बेंगाज़ी पहुंचा. अबू बकर ने ही मुझे हवाई जहाज के टिकट के पैसे दिए और लीबिया का टूरिस्ट वीज़ा दिलवाया. जब मैं बेंगाज़ी पहुंचा तो सबसे पहले मेरा पासपोर्ट ले लिया गया. कहा गया कि वीज़ा अपडेट करने के लिए ये लिया जा रहा है. और तब से लेकर आज तक मेरा पासपोर्ट वापस नहीं किया गया है. बाकी मजदूरों के पासपोर्ट भी इसी तरह उनसे छीन लिए गए.”
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रिपोर्ट के मुताबिक बेंगाज़ी पहुंचने के तीन महीने बाद मजदूरों की मुसीबतें बढ़नी शुरू हो गईं. फैक्ट्री ने उनके पैसे काटने शुरू कर दिए. उन्होंने इसके ख़िलाफ़ आवाज नहीं उठाई. क्योंकि बाकी मजदूरों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर वो ऐसा करेंगे तो इसके परिणाम ‘बेहद बुरे’ होंगे.
पैसों में कटौती के साथ-साथ काम करने का समय भी बढ़ा दिया गया. पहले जहां साढ़े आठ घंटों की शिफ्ट होती थी, वो 16 घंटों तक पहुंच गई. मजदूरों को बीच रात बुलाकर काम करने के लिए कहा जाने लगा. आखिर में मजदूरों की हिम्मत जवाब दे गई. सितंबर 2024 में उन्होंने अपनी मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. उनकी मांग थी कि उनके जो पैसे काटे गए हैं वो उन्हें वापस मिलें और उनके काम करने का समय घटाया जाए.
मिथिलेश विश्वकर्मा ने बताया कि जब कॉन्ट्रैक्टर को मजदूरों के विरोध के बारे में पता चला तो वो दुबई से लीबिया आया और उसने उनकी और एक और मजदूर की ख़ूब पिटाई की. उस दिन के बाद से मजदूरों ने काम करना बंद कर दिया है. तब से उन्हें वेतन भी नहीं दिया गया है. वो फैक्ट्री के भीतर दो कमरों में रह रहे हैं.
इसी फैक्ट्री में काम करने वाले एक अन्य मजदूर हैं राजकुमार साहनी. 31 साल के राजकुमार भी गोरखपुर के रहने वाले हैं. 21 दिसंबर को उन्हें इस फैक्ट्री में आए हुए 2 साल हो जाएंगे. वो इतने लंबे समय से अपने घर नहीं आए हैं. उन्होंने अभी तक अपने 17 महीने के नवजात बेटे को नहीं देखा है. उनके घरवालों को पता है कि वो किस मुश्किल में फंसे हुए हैं.
राजकुमार के परिवार वालों ने ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान के पास और विदेश मंत्रालय में एप्लिकेशन दायर की है. इसमें मानव सेवा संस्थान नाम की लोकल नॉन प्रॉफिट संस्था उनकी मदद कर रही है.
मानव सेवा संस्थान के डायरेक्टर राजेश मणि ने बताया, “ये बेहद दुःखद है कि इन मजदूरों को बीते चार महीनों से काम के पैसे नहीं मिल रहे हैं. और इन्हें रोजमर्रा की जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं. इनके मोबाइल फ़ोन भी इनसे छीन लिए गए हैं. जिस वजह से इनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है. इस वजह से इनके परिवार वाले बेहद चिंतित हैं."
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक़ विदेश में फंसे इन युवकों को अपने देश वापस लाने के लिए राजेश मणि ने लीबिया स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क भी किया था. राजेश का कहना है कि उन्हें ‘भरोसा’ दिया गया था कि ‘15 नवंबर तक’ इन लोगों को वापस ले आया जाएगा. राजेश मणि ने विदेश मंत्री जयशंकर के साथ-साथ लीबिया के राजदूत और काउंसलर को मेल और ट्वीट भी किए हैं.
सभी मजदूरों से बात करने के बाद वहां की पूरी परिस्थिति के बारे में विदेश मंत्रालय को भी बता दिया गया है. अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही वहां फंसे सभी युवक भारत आ सकेंगे.
लीबिया में फंसे इन 16 मजदूरों के नाम हैं-
- रामनाथ चौहान
- सत्यम यादव
- तबरेज़ खान
- मिथिलेश विश्वकर्मा
- अकबर अली
- राजकुमार साहनी
- विशाल साहनी
- कन्हैया कुमार
- मुकेश यादव
- धर्मेंद्र कुमार
- राकेश सिंह
- अब्बास अली
- अनुप यादव
- असलम अंसारी
- हदीस अली
- विजय दानी
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