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यूपी में परीक्षा के दौरान छात्रा ने सैनिटरी पैड मांगा, प्रिंसिपल ने क्लासरूम के बाहर निकाला

बच्ची ने प्रिंसिपल से सैनिटेरी पेड मांगा था. पहले तो प्रिंसिपल ने बच्ची की बात को नजरअंदाज किया. जब उसने फिर अपनी समस्या बताई तो कथित तौर पर उसे क्लासरूम के बाहर निकाला और एक घंटे तक खड़ा रहने को कहा.

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Bareilly school girl got punished
स्कूलों के जिला इन्स्पेक्टर (DIOS) ने कहा है कि मामले में कड़ी जांच की जाएगी.
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27 जनवरी 2025 (अपडेटेड: 28 जनवरी 2025, 04:15 PM IST)
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उत्तर प्रदेश के बरेली में कथित तौर पर सैनिटरी पैड मांगने के लिए एक छात्रा को परीक्षा के बीच सजा दी गई. पीड़ित बच्ची 11वीं क्लास में पढ़ती है. बीती 25 जनवरी को स्कूल में परीक्षा थी. उसी दौरान छात्रा के पीरियड शुरू हो गए. वो परीक्षा छोड़कर नहीं जा सकती थी, इसलिए उसने प्रिंसिपल को इस बारे में बताया. आरोप है कि प्रिंसिपल ने बच्ची को क्लासरूम से बाहर खड़ा कर दिया. 

समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से दी हिंदू ने बताया है कि बच्ची ने प्रिंसिपल से सैनिटेरी पेड मांगा था. पहले तो प्रिंसिपल ने बच्ची की बात को नजरअंदाज किया. जब उसने फिर अपनी समस्या बताई तो कथित तौर पर उसे क्लासरूम के बाहर निकाला और एक घंटे तक खड़ा रहने को कहा. बाद में बच्ची के पिता को इस बारे में पता चला तो उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने स्कूलों के जिला इंस्पेक्टर (DIOS), राज्य महिला आयोग और महिला कल्याण विभाग में भी शिकायत की. 

इसके बाद DIOS देवकी नंदन ने पिता को मामले में जांच का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि सबूतों को देखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी. शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. 

पिछले साल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देशभर के स्कूलों के लिए एडवाइजरी जारी की थी. इसमें निर्देश दिया गया था कि दसवीं और बारहवीं कक्षा की छात्राओं को बोर्ड की परीक्षा के समय आराम करने के लिए ब्रेक दिया जाना चाहिए. साथ ही सभी परीक्षा सेंटर्स पर फ्री सैनिटेरी पेड उलब्ध होने चाहिए. यह एडवाइजरी सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, CBSE, केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) पर लागू है. ऐसा इसलिए किया गया ताकि सभी छात्राएं अपना पूरा ध्यान परीक्षा पर लगा सकें.

मंत्रालय ने यह भी कहा था कि पीरियड्स में हाइजीन और सेहत को लेकर स्कूलों में कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे ताकि बच्चों, स्टाफ और अध्यापकों में जागरूकता बढ़ाई जाए. इससे पीरियड्स से जुड़ा स्टिग्मा दूर होगा और स्कूलों का माहौल बेहतर बनेगा.

वहीं 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एक जनहित याचिका की सुनवाई करते वक्त कहा था कि सभी स्कूलों और शिक्षा संस्थानों में फ्री सैनिटेरी पेड उपलब्ध होने चाहिए. इसके लिए कोर्ट ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को योजना बनाने और उन्हें सही तरह से लागू करने के निर्देश दिए थें. साथ ही यह भी कहा कि सभी राज्य सरकारों को छात्राओं की सुरक्षा और स्वच्छता का इंतजाम करना होगा.

(ये ख़बर हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहीं मेघा ने लिखी है.)

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