बंगाल चुनाव के बाद बीजेपी समर्थक महिला का घर टूटने का दावा झूठा, दिल्ली का वीडियो जोड़कर फैलाया जा रहा भ्रम
दो क्लिप वायरल हैं. पहली क्लिप में एक महिला न्यूज़ चैनल के कैमरे पर कहती दिख रही है कि उसे ममता बनर्जी पर नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है. जबकि दूसरे क्लिप में एक रोती-बिलखती महिला पीएम मोदी के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रही है और उन्हें अपनी इस हालत का जिम्मेदार ठहरा रही है.

पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद राज्य में अवैध अतिक्रमण हटाने की मुहिम जारी है, जिसके तहत कई जगहों पर बुलडोज़र की कार्रवाई देखने को मिली है. इसी बीच सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग वीडियो क्लिप्स को जोड़कर एक नया दावा किया जा रहा है. यूज़र्स का कहना है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जिस महिला ने बीजेपी का खुलकर समर्थन किया था, नतीजों के बाद प्रशासन ने उसी का घर उजाड़ दिया.
उसके दो क्लिप वायरल हैं. पहली क्लिप में एक महिला न्यूज़ चैनल के कैमरे पर कहती दिख रही है कि उसे ममता बनर्जी पर नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है. जबकि दूसरे क्लिप में एक रोती-बिलखती महिला पीएम मोदी के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रही है और उन्हें अपनी इस हालत का जिम्मेदार ठहरा रही है. सोशल मीडिया पर इन दोनों महिलाओं को एक ही शख्स बताते हुए दावा किया जा रहा है कि बीजेपी पर भरोसा करने का अंजाम इस महिला को अपना घर गंवाकर भुगतना पड़ा है.
Zaid Shaikh नाम के एक फेसबुक यूज़र ने वायरल वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “बंगाल में चुनाव के समय यह अंधभक्तीन कह रही थी दीदी पर भरोसा नहीं है बीजेपी पर भरोसा है, बीजेपी बंगाल जीती फिर बुलडोजर चला दिया तो इस अंधभक्तीन का घर भी लपेटे में आ गया.”

इसी तरह के दावे कई अन्य यूज़र्स ने भी शेयर किए हैं जिनके पोस्ट यहां देख सकते हैं.
पड़ताल
क्या है वीडियो की सच्चाई? क्या दोनों वीडियो में नज़र आ रहीं महिलाएं एक ही हैं? यह जानने के लिए हमने दोनों क्लिप एक-एक करके देखें.
पहला हिस्सा.
इस क्लिप में महिला जिस माइक आईडी पर बयान दे रही है, उस पर ‘प्यारा हिंदुस्तान’ लिखा हुआ साफ देखा जा सकता है. इस नाम के यूट्यूब चैनल पर ये वीडियो 19 अप्रैल को पोस्ट किया गया था. वीडियो पश्चिम बंगाल का बताया गया है.

दूसरा हिस्सा.
इसमें ‘ज’ अक्षर का एक वाटरमार्क दिखाई देता है, जो ‘जनपथ न्यूज नेटवर्क’ का लोगो है. इस चैनल पर रोती हुई महिला का यह वीडियो 4 मार्च को अपलोड किया गया था. इससे यह साफ है कि इस क्लिप का बंगाल चुनाव के नतीजों से कोई वास्ता नहीं है. क्योंकि पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को संपन्न हुआ था. ‘जनपथ न्यूज नेटवर्क’ पर वीडियो की ओरिजनल रिपोर्ट देखने पर पता चला कि ग्राउंड पर मौजूद पत्रकार प्रफुल दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के नजदीक स्थित 'भाई राम कैंप' की झुग्गियों में रहने वाले परिवारों का दर्द सुन रहे थे.

आजतक की फैक्ट चेक टीम ने रिपोर्टर प्रफुल से संपर्क किया, तो उन्होंने साफ किया कि इस वीडियो का बंगाल से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है.
दोनों वीडियो में नज़र आ रहीं महिलाएं अलग हैं. दोनों जगह अलग है और दोनों मामले अलग हैं.
नतीजाकुल मिलाकर, हमारी पड़ताल में साफ है कि दो अलग-अलग क्लिप को जोड़कर भ्रामक दावा किया गया है.
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