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ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद लखनऊ में प्रदर्शनकारियों पर हुआ लाठीचार्ज? सच ये रहा

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई की मौत के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है. वीडियो एक प्रदर्शन का है जिसमें पुलिस प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर रही है. वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ये लखनऊ का है जहां अमेरिका-इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर यूपी पुलिस ने लाठीचार्ज किया.

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9 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 03:09 PM IST)
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ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद लखनऊ में प्रदर्शनकारियों पर हुआ लाठीचार्ज? सच ये रहा
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ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई की मौत के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है. वीडियो एक प्रदर्शन का है जिसमें पुलिस प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर रही है. वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ये लखनऊ का है जहां अमेरिका-इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर यूपी पुलिस ने लाठीचार्ज किया. कहा जा रहा कि खामनेई के लिए उपद्रव कर रहे कट्टरपंथियों पर पुलिस ने लाठीयां बरसाईं.

लेखन वार्ता नाम के फेसबुक पेज ने वायरल वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “UP पुलिस ने लखनऊ में जबरन सड़क रोककर. ईरानी धार्मिक कट्टरपंथी खामनेई के लिए उपद्रव कर रहे मज़हबी कट्टरपंथियों पर लाठीयां बरसाईं.”

वायरल पोस्ट का स्क्रीनशॉट
वायरल पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इसी तरह के दावे कई अन्य यूजर्स ने शेयर किए हैं जिनके पोस्ट यहां देख सकते हैं.


पड़ताल

क्या है वीडियो की सच्चाई? वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को सर्च करने पर हमें ये वीडियो 27 सितंबर, 2025 को एक इंस्टाग्राम पेज पर मिला. कैप्शन में इसे बरेली का बताया गया है. 

इंस्टाग्राम पर 6 महीने पहले अपलोड किया गया वीडियो
इंस्टाग्राम पर 6 महीने पहले अपलोड किया गया वीडियो

इसी तरह हमें The Panipat नाम के फेसबुक पेज पर भी ये वीडियो मिला जिसे अलग एंगल से शूट किया गया था. वीडियो 27 सितंबर, 2025 को अपलोड किया गया था. वीडियो के साथ लिखे कैप्शन के मुताबिक, मामला बरेली का है जहां मौलाना तौकीर रजा के आह्वान पर मुस्लिम युवक इस्लामिया मैदान में इकट्ठा होने जा रहे थे. उन्हें ‘I love Mohammad’ मुद्दे पर ज्ञापन देना था. पुलिस ने इन्हें रोकने का प्रयास किया.

इससे साफ हो गया कि वीडियो हाल-फिलहाल का नहीं है. 6 महीने पुराना है. कई मीडिया संस्थानों में भी इस प्रदर्शन को कवर किया गया था. बीबीसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बरेली में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल प्रमुख मौलाना तौकीर रजा की अपील पर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए थे. रिपोर्ट बता रही है कि प्रशासन ने इसके लिए अनुमति नहीं दी गई थी.

नतीजा

कुल मिलाकर, साफ है कि बरेली में प्रोटेस्ट का 6 महीने पुराना वीडियो भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है.  


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