पड़ताल: 12:30 से 3:30 के बीच मोबाइल बंद रखने को क्यों बोला जा रहा है?
कितनी खतरनाक हैं कॉस्मिक किरणें?
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सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में यह दावा किया जाता रहा है कि आज रात 12:30 से 3:30 बजे के बीच आसमान से खतरनाक कॉस्मिक-रे गुजरेंगी. इस दौरान मोबाइल स्विच ऑफ रखें.
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‘दी लल्लनटॉप’ की टीम लोकसभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट आप तक पहुंचा रही है. इसके अलावा फेसबुक के साथ मिलकर देश के अलग-अलग इलाकों में फ़ेक न्यूज़ से बचने के लिए वर्कशॉप भी चला रही है. लोगों से जान रही है कि उन्हें कैसी फ़ेक न्यूज़ मिल रही हैं. इस कड़ी में हमारी टीम पहुंची जबलपुर (मध्य प्रदेश). यहां ‘दी लल्लनटॉप’ के रिपोर्टर विनय ने ऐसी ही वर्कशॉप की.
वर्कशॉप अटेंड करने वाले आशीष झा एक वायरल मैसेज की सच्चाई जानना चाहते हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि आज रात 12:30 से 3:30 बजे के बीच आसमान से खतरनाक कॉस्मिक-रे गुजरेंगी. इस दौरान मोबाइल स्विच ऑफ रखें. आशीष चाहते हैं कि ‘दी लल्लनटॉप’ इस ख़बर की पड़ताल करे.

एक ही बात को इंग्लिश, उर्दू और हिंदी भाषा में शेयर किया जा रहा है.
यह मैसेज पिछले कई सालों से वायरल हो रहा है. सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण जैसे किसी दूसरे ग्रह के पृथ्वी के पास आने के टाइम या किसी धूमकेतु के धरती के पास से गुजरने की सूचना पर यह फिर से वायरल होने लग जाता है. कई भाषाओं में आने वाले इन मैसेज में बस कुछ चीजें कॉमन रहती हैं, जैसे मोबाइल बंद करने का टाइम रात के 12.30 से 3.30 का और सब जगह नासा और बीबीसी का रेफरेंस जरूर होता है. साल 2018 में ऐसी दो घटनाएं हुईं जिसकी वजह बना इस मैसेज के फिर से वायरल होने की. पहली थी 27 जुलाई को हुआ चंद्रग्रहण. दूसरी घटना 31 जुलाई को मंगल ग्रह का पृथ्वी के पास आना. इन दोनों खगोलीय मतलब ग्रहों और उपग्रहों से संबंधित घटनाओं के कारण यह मैसेज फिर से ट्रेंड में आ गया. कुछ-कुछ दिनों पर यह खबर वायरल होती रही है.
ये कॉस्मिक किरणें हाई एनर्जी प्रॉटोन्स होती हैं. यह भी लाइट की स्पीड से ही चलती हैं. ये दो तरीके से पैदा होती हैं. पहला सुपरनोवा की कंडीशन में. सुपरनोवा मतलब होता है तारों का विस्फोट. इस विस्फोट में भयंकर रेडिएशन पैदा होता है. सूरज पर भी ऐसे धमाके होते रहते हैं. इन रेडिएशन्स को कॉस्मिक रेज कहते हैं. अब ये कॉस्मिक रेज ब्रह्मांड में इधर-उधर घूमना शुरू कर देती हैं. ब्रह्मांड में पृथ्वी और दूसरे ग्रह हैं. जब ये कॉस्मिक किरणें पृथ्वी की तरफ आगे बढ़ती हैं तो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराकर वापस चली जाती हैं या डायवर्ट हो जाती हैं यानी इधर-उधर चली जाती हैं.

धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराती हुईं कॉस्मिक किरणें. (प्रतीकात्मक फोटो, क्रेडिट-स्पेस डॉट कॉम)
जब इन कॉस्मिक रेज की तीव्रता ज्यादा होती है तो ये पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को पार कर जाती हैं. लेकिन पृथ्वी तक पहुंचते हुए बहुत कमजोर हो जाती हैं. इनसे न इंसानों पर कोई असर होता है और न ही मोबाइल पर. जब ये कॉस्मिक रेज बहुत तीव्रता की होती हैं तो उपग्रहों और इलेक्ट्रिक ग्रिड पर असर डालती हैं. लेकिन मोबाइल फोन पर इसका कोई असर नहीं होता है.
इस मैसेज में दूसरी बात लिखी है कि बीबीसी और नासा ने इस बात को बताया है. हमने इसके बारे में सर्च किया. बीबीसी और नासा की वेबसाइट पर इस तरह की कोई बात नहीं मिली. कुछ मैसेज में लिखा था कि मंगल ग्रह से कॉस्मिक किरणें आएंगी. लेकिन मंगल कोई तारा नहीं है इसलिए इसमें से कॉस्मिक किरणें निकल ही नहीं सकती हैं.

अब तो कई लोग इस फर्जी पोस्ट से इतने बोर हो चुके हैं कि इस पोस्ट पर मौज लेते दिख रहे हैं.
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वीडियो- पड़ताल: सोशल मीडिया पर दावा, 777888999 नंबर से कॉल आने पर मोबाइल में ब्लास्ट हो रहा है?
वर्कशॉप अटेंड करने वाले आशीष झा एक वायरल मैसेज की सच्चाई जानना चाहते हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि आज रात 12:30 से 3:30 बजे के बीच आसमान से खतरनाक कॉस्मिक-रे गुजरेंगी. इस दौरान मोबाइल स्विच ऑफ रखें. आशीष चाहते हैं कि ‘दी लल्लनटॉप’ इस ख़बर की पड़ताल करे.
दावा
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा हैआज रात 12.30 से 3.30 बजे तक प्रथ्वी के पास से खतरनाक कास्मिक किरणें गुजरेंगी । कृपया आप अपने अपने मोबाइलफ़ोन स्विच ऑफ करके रखे ।और फ़ोन को अपने पास रखकर बिल्कुल न सोइए। अन्यथा आपको हानि पहुँच सकती हे।कृपया इस सन्देश को नजरअंदाज न करे। यदि आपको विश्वासन होतो आप गूगल पर “नासा बी बी सी न्यूज़”सर्च कर विस्तृत समाचार देख सकते हे। कृपया इस सन्देश को अन्य लोगो तक पहुचाने की कृपा करे। धन्न्यवादइसी से जुड़ा एक और मैसेज शेयर किया जा रहा है. रात 12:30 से 3:30 बजे के बीच मोबाइल ऑन रखने से फोन में नेटवर्क टाॅवर के जरिए कॉस्मिक-रे आने और उससे तुरंत फोन ब्लास्ट होने की बात कही जा रही है. इसके अलावा और भी मिलते-जुलते मैसेज के स्क्रीनशॉट नीचे देखें.
(नोट- हमने भाषा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की है. जैसा आया था वैसा आपके सामने है. वर्तनी और ग्रामर की गलती पर ध्यान न दें.)

एक ही बात को इंग्लिश, उर्दू और हिंदी भाषा में शेयर किया जा रहा है.
यह मैसेज पिछले कई सालों से वायरल हो रहा है. सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण जैसे किसी दूसरे ग्रह के पृथ्वी के पास आने के टाइम या किसी धूमकेतु के धरती के पास से गुजरने की सूचना पर यह फिर से वायरल होने लग जाता है. कई भाषाओं में आने वाले इन मैसेज में बस कुछ चीजें कॉमन रहती हैं, जैसे मोबाइल बंद करने का टाइम रात के 12.30 से 3.30 का और सब जगह नासा और बीबीसी का रेफरेंस जरूर होता है. साल 2018 में ऐसी दो घटनाएं हुईं जिसकी वजह बना इस मैसेज के फिर से वायरल होने की. पहली थी 27 जुलाई को हुआ चंद्रग्रहण. दूसरी घटना 31 जुलाई को मंगल ग्रह का पृथ्वी के पास आना. इन दोनों खगोलीय मतलब ग्रहों और उपग्रहों से संबंधित घटनाओं के कारण यह मैसेज फिर से ट्रेंड में आ गया. कुछ-कुछ दिनों पर यह खबर वायरल होती रही है.
पड़ताल
सबसे पहले कॉस्मिक किरण की साइंस को समझते हैं. यह कॉस्मिक शब्द निकला है कॉसमोस से जिसका मतलब होता है ब्रह्मांड. कॉस्मिक मतलब ब्रह्मांड से जुड़ी हुई चीजें. और कॉस्मिक रेज या कॉस्मिक किरणों का मतलब हो गया ब्रह्मांड के किसी पिण्ड से निकलने वाली किरणें. जो ग्रह होते हैं वो कोई एनर्जी सोर्स नहीं होते इसलिए इनसे कोई किरणें पैदा नहीं होती हैं. ये किरणें तारों से पैदा होती हैं. सूरज भी एक तारा ही है. हालांकि यह अपनी एनर्जी खुद ही पैदा पैदा करता है.ये कॉस्मिक किरणें हाई एनर्जी प्रॉटोन्स होती हैं. यह भी लाइट की स्पीड से ही चलती हैं. ये दो तरीके से पैदा होती हैं. पहला सुपरनोवा की कंडीशन में. सुपरनोवा मतलब होता है तारों का विस्फोट. इस विस्फोट में भयंकर रेडिएशन पैदा होता है. सूरज पर भी ऐसे धमाके होते रहते हैं. इन रेडिएशन्स को कॉस्मिक रेज कहते हैं. अब ये कॉस्मिक रेज ब्रह्मांड में इधर-उधर घूमना शुरू कर देती हैं. ब्रह्मांड में पृथ्वी और दूसरे ग्रह हैं. जब ये कॉस्मिक किरणें पृथ्वी की तरफ आगे बढ़ती हैं तो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराकर वापस चली जाती हैं या डायवर्ट हो जाती हैं यानी इधर-उधर चली जाती हैं.

धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराती हुईं कॉस्मिक किरणें. (प्रतीकात्मक फोटो, क्रेडिट-स्पेस डॉट कॉम)
जब इन कॉस्मिक रेज की तीव्रता ज्यादा होती है तो ये पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को पार कर जाती हैं. लेकिन पृथ्वी तक पहुंचते हुए बहुत कमजोर हो जाती हैं. इनसे न इंसानों पर कोई असर होता है और न ही मोबाइल पर. जब ये कॉस्मिक रेज बहुत तीव्रता की होती हैं तो उपग्रहों और इलेक्ट्रिक ग्रिड पर असर डालती हैं. लेकिन मोबाइल फोन पर इसका कोई असर नहीं होता है.
इस मैसेज में दूसरी बात लिखी है कि बीबीसी और नासा ने इस बात को बताया है. हमने इसके बारे में सर्च किया. बीबीसी और नासा की वेबसाइट पर इस तरह की कोई बात नहीं मिली. कुछ मैसेज में लिखा था कि मंगल ग्रह से कॉस्मिक किरणें आएंगी. लेकिन मंगल कोई तारा नहीं है इसलिए इसमें से कॉस्मिक किरणें निकल ही नहीं सकती हैं.
नतीजा
‘दी लल्लनटॉप’ की पड़ताल में ये वायरल मैसेज झूठ निकला. कास्मिक किरणें को लेकर झूठी खबर फैलाई जा रही है.
अब तो कई लोग इस फर्जी पोस्ट से इतने बोर हो चुके हैं कि इस पोस्ट पर मौज लेते दिख रहे हैं.
अगर आपको चुनाव से जुड़ी या उसके अलावा भी किसी ख़बर पर शक हो तो हमें लिखें. हमारा पता है
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वीडियो- पड़ताल: सोशल मीडिया पर दावा, 777888999 नंबर से कॉल आने पर मोबाइल में ब्लास्ट हो रहा है?

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